Finmin Report: कम खरीफ बुवाई, खाद्यान्न स्टॉक, कीमतों के निपुण प्रबंधन की मांग- फिनमिन रिपोर्ट
वित्त मंत्रालय की शनिवार को एक रिपोर्ट में खरीफ सत्र के दौरान कम फसल बुवाई रकबे के मद्देनजर कृषि जिंसों के स्टॉक के कुशल प्रबंधन की आवश्यकता को रेखांकित किया गया है, जिसमें कहा गया है कि मुद्रास्फीति के मोर्चे पर बिल्कुल निश्चिंत होने की जरुरत नहीं है।
नयी दिल्ली, 17 सितंबर वित्त मंत्रालय की शनिवार को एक रिपोर्ट में खरीफ सत्र के दौरान कम फसल बुवाई रकबे के मद्देनजर कृषि जिंसों के स्टॉक के कुशल प्रबंधन की आवश्यकता को रेखांकित किया गया है, जिसमें कहा गया है कि मुद्रास्फीति के मोर्चे पर बिल्कुल निश्चिंत होने की जरुरत नहीं है. वित्त मंत्रालय द्वारा जारी मासिक आर्थिक समीक्षा के अनुसार, कुल मिलाकर, भारत में मुद्रास्फीति का दबाव सरकार द्वारा पहले से किये गये प्रशासनिक उपायों, चुस्त मौद्रिक नीति और अंतरराष्ट्रीय जिंस की कीमतों में नरमी और आपूर्ति-श्रृंखला बाधाओं के रहते गिरावट की ओर जाता प्रतीत होता है, यह भी पढ़ें: BJP की नई कवायद- SC वोट साधने के लिए 75 हजार बस्तियों और साढ़े 7 हजार हॉस्टल्स में संपर्क अभियान चलाएगी पार्टी
हालांकि, इसने कहा, ‘‘मुद्रास्फीति के मोर्चे पर निश्चिंत होने की एकदम आवश्यकता नहीं है क्योंकि खरीफ सत्र में कम फसल-बुवाई का रकबा, कृषि वस्तुओं के स्टॉक और बाजार कीमतों के कुशल प्रबंधन की मांग करता है। इसके लिए बेवजह कृषि निर्यात में कोई व्यवधान डालने की आवश्यकता नहीं है.’’
खरीफ की मुख्य फसल धान की बुवाई 16 सितंबर को लगभग 19 लाख हेक्टेयर घटकर 399.03 लाख हेक्टेयर रह गई, जबकि एक साल पहले की इसी अवधि में यह रकबा 417.93 लाख हेक्टेयर थी। खरीफ मौसम में बुवाई जून से दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत और अक्टूबर से कटाई के साथ शुरू होती है.
झारखंड में मुख्य रूप से धान के रकबे में 9.37 लाख हेक्टेयर की गिरावट आई है, इसके बाद मध्य प्रदेश (6.32 लाख हेक्टेयर), पश्चिम बंगाल (3.65 लाख हेक्टेयर), उत्तर प्रदेश (2.48 लाख हेक्टेयर) और बिहार (1.97 लाख हेक्टेयर) में गिरावट आई है.
खरीफ मौसम भारत के कुल चावल उत्पादन में लगभग 80 प्रतिशत का योगदान देता है।
सितंबर में, खाद्य मंत्रालय ने कहा था कि कम बुवाई के कारण भारत का खरीफ चावल उत्पादन 60-70 लाख टन तक घट सकता है.
फसल वर्ष 2021-22 (जुलाई-जून) के दौरान देश का कुल चावल उत्पादन पिछले वर्ष के 12 करोड़ 43.7 लाख टन की तुलना में रिकॉर्ड 13 करोड़ 2.9 लाख टन (खरीफ में 11 करोड़ 17.6 लाख टन और रबी सत्र में एक करोड़ 85.3 लाख टन) होने का अनुमान है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की वृद्धि मजबूत रही है और मुद्रास्फीति ऐसे समय में नियंत्रण में है जबकि धीमी वृद्धि और उच्च मुद्रास्फीति दुनिया की अधिकांश प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित कर रही है.
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)
(The above story first appeared on LatestLY on Sep 17, 2022 11:38 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

