7th Pay Commission: जानें 7वें वेतन आयोग के तहत ग्रेच्युटी में क्या कुछ बदला, लाखों कर्मचारियों को मिल रहा फायदा
रुपया (Photo Credits: Pixabay)

7th Pay Commission News: मोदी सरकार ने पिछले साल लाखों सरकारी कर्मचारियों (Government Employees) के साथ-साथ नौकरीपेशा लोगों को बड़ी खुशखबरी दी थी. केंद्र के इस कदम से खासकर प्राइवेट सेक्टर में काम कर रहे लोगों को बड़ा फायदा पहुंचा. दरअसल सरकार ने सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप ग्रेच्युटी (Gratuity) के नियमों में अहम बदलाव किए.

ग्रेच्युटी का भुगतान (संशोधन) अधिनियम, 2018 पिछले साल 29 मार्च से लागू कर दिया गया है. ग्रेच्युटी का भुगतान अधिनियम, 1972 उन सभी प्रतिष्ठानों पर लागू होता है जिसमें 10 या इससे अधिक कर्मी होते हैं. इस कानून का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों को उनकी सेवानिवृत्ति के बाद सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है, चाहे यह सेवानिवृत्ति की वजह से हो या शारीरिक अपंगता या फिर शरीर के किसी महत्वपूर्ण अंग के काम करना बंद करने की वजह से हो. इस प्रकार ग्रेच्युटी का संशोधन अधिनियम, 1972 उद्योगों, कारखानों और प्रतिष्ठानों में काम करने वाली जनता की सामाजिक सुरक्षा के लिये एक महत्वपूर्ण कानून है. 7th Pay Commission: बिहार में विश्वविद्यालय शिक्षकों की चांदी, नवंबर महीने से बढ़ जाएगी इतनी सैलरी

सातवें वेतन आयोग के लागू होने से पहले इस कानून के तहत ग्रेच्युटी के भुगतान की अधिकतम सीमा 10 लाख रुपये थी. केंद्रीय कर्मचारियों के लिये केंद्रीय कर्मचारी सिविल सेवा (पेंशन) विनियम 1972 के तहत ग्रेच्युटी भुगतान के नियम भी इससे मिलते जुलते ही थी. सातवें वेतन आयोग के तहत सीसीएस (पेंशन) विनियम, 1972 के तहत अधिकतम भुगतान सीमा 10 लाख रुपये तय की गई थी. लेकिन सातवें वेतन आयोग के लागू होने के बाद सरकारी कर्मचारियों के मामले में इसे बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दिया गया.

वहीं, प्राइवेट सेक्टर में कार्यरत कर्मियों के लिये भी महंगाई और वेतन में वृद्धि को देखते हुये सरकार ने तय किया कि जो कर्मी ग्रेच्यटी का भुगतान कानून, 1972 के दायरे में हैं उनके लिये भी अधिकतम भुगतान की सीमा को परिवर्तित किया जाना चाहिये. इसलिये सरकार ने ग्रेच्युटी का भुगतान कानून, 1972 में संशोधन कर 20 लाख रुपये की अधिकतम सीमा तय कर दी.

साथ ही महिला कर्मियों के लिये ग्रेच्युटी के भुगतान के लिये निरंतर सेवा में रहने की परिभाषा को भी बदल दिया और अब इसे 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह कर दिया गया.

ग्रेच्युटी को सरल शब्दों में समझाया जाए तो, इसका मतलब कर्मचारियों की सेवा के बदले कंपनी द्वारा साभार जताने हेतु दी गई धनराशी है. ग्रेच्युटी कैलकुलेट करने का एक निश्चित मानक है- हर साल के बदले आखिरी महीने की बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता (DA) जोड़कर उसे पहले 15 से गुणा किया जाता है. फिर उसी कंपनी में नौकरी के सालों की संख्या से और इसके बाद आने वाली रकम को 26 से भाग दिया जाता है. वर्तमान समय में पांच साल की नौकरी पर ही ग्रेच्युटी मिलती है.