Indore Contaminated Water: इंदौर में दूषित पानी पीने से 13 की मौत और हजारों बीमार, विपक्ष ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के इस्तीफे की मांग की
इंदौर में पिछले कुछ दिनों से दूषित पानी की आपूर्ति के कारण 13 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि हजारों लोग अस्पतालों में भर्ती हैं. इस संकट को लेकर शहर में भारी आक्रोश है और विपक्ष ने नगरीय विकास मंत्री के इस्तीफे की मांग की है.
Indore Contaminated Water: स्वच्छता में नंबर-1 रहने वाले इंदौर शहर में इस वक्त दूषित पानी की आपूर्ति ने हाहाकार मचा दिया है. शहर के विभिन्न इलाकों में गंदा पानी पीने से अब तक लगभग 13 लोगों की मौत हो चुकी है. स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, हजारों की संख्या में लोग उल्टी, दस्त और पेट संक्रमण की शिकायत के बाद अस्पतालों में भर्ती हैं. इस घटना ने नगर निगम की जल वितरण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
मौतों से जनता में आक्रोश
इंदौर के घनी आबादी वाले क्षेत्रों में पिछले एक सप्ताह से गंदे और बदबूदार पानी की शिकायतें मिल रही थीं. स्थानीय निवासियों का आरोप है कि नगर निगम को बार-बार सूचना देने के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए. वर्तमान में स्थिति इतनी गंभीर है कि शहर के सरकारी और निजी अस्पताल मरीजों से भरे हुए हैं. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रेनेज लाइन और पेयजल पाइपलाइन के आपस में मिलने (क्रॉस-कनेक्शन) की वजह से यह घातक संक्रमण फैला है. यह भी पढ़े: Fazilka Shocker: पंजाब के फाजिल्का में लापरवाही के चलते दुखद हादसा, शख्स की कमर में लगी लोडेड पिस्टल चलने से मौत; देखें वीडियो
विपक्ष हमलावर: इस्तीफे और कार्रवाई की मांग
इस मानवीय त्रासदी को लेकर मध्य प्रदेश की राजनीति गरमा गई है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोला है. पटवारी ने आरोप लगाया कि "शहर में मय्यतें उठ रही हैं और प्रशासन आंकड़ों को छिपाने में लगा है." उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है.
कैलाश विजयवर्गीय के इस्तीफे की उठी मांग
विपक्ष ने सीधे तौर पर प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को (Kailash Vijayvargiya) निशाने पर लिया है. कांग्रेस का कहना है कि मंत्री के गृह नगर में इस तरह की लापरवाही अक्षम्य है, इसलिए उन्हें तुरंत अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए.
प्रशासन का पक्ष और बचाव कार्य
प्रशासन पर आरोप लग रहे हैं कि वे मौतों का सही आंकड़ा छिपाने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि, भारी दबाव के बाद नगर निगम ने प्रभावित इलाकों में टैंकरों के जरिए पानी की सप्लाई शुरू की है और दूषित पाइपलाइनों की जांच के लिए टीमें तैनात की हैं. कलेक्टर ने मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं और कहा है कि पानी के सैंपल्स की रिपोर्ट आने के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी.
इंदौर की साख पर लगा दाग
लगातार कई वर्षों से देश का सबसे स्वच्छ शहर होने का गौरव हासिल करने वाले इंदौर के लिए यह घटना एक बड़े धब्बे की तरह देखी जा रही है। शहर के सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने मांग की है कि केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई करने के बजाय, नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा न हो.