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LPG Cylinder Refills Update: रसोई गैस संकट के बीच क्या भारत में 14.2 किलो की जगह 10 kg का LPG सिलेंडर मिलेगा? समझें हॉर्मुज विवाद का असर

हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी तनाव के कारण रसोई गैस की वैश्विक आपूर्ति बाधित हुई है. घरेलू स्टॉक को बचाने के लिए भारत की सरकारी तेल कंपनियां अब 14.2 किलो के बजाय 10 किलो के एलपीजी रिफिल का विकल्प तलाश रही हैं.

LPG Cylinder Refills Update: रसोई गैस संकट के बीच क्या भारत में 14.2 किलो की जगह 10 kg का LPG सिलेंडर मिलेगा? समझें हॉर्मुज विवाद का असर

LPG Cylinder Refills Update:  भारत की सरकारी तेल विपणन कंपनियां घरेलू एलपीजी सिलेंडर की रिफिल मात्रा को वर्तमान 14.2 किलोग्राम से घटाकर लगभग 10 किलोग्राम करने की योजना पर विचार कर रही हैं. सोमवार, 23 मार्च 2026 को सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी संकट की वजह से अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह प्रभावित हुई है. इस कदम का उद्देश्य सीमित स्टॉक का संरक्षण करना और देश भर में अधिक से अधिक परिवारों तक कुकिंग फ्यूल की पहुंच सुनिश्चित करना है.

हॉर्मुज संकट और आयात पर पड़ता असर

भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है, जिससे वह वैश्विक आपूर्ति में होने वाले किसी भी बदलाव के प्रति बेहद संवेदनशील है. हॉर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा पारगमन का एक प्रमुख मार्ग है, जहां चल रहे तनाव ने कार्गो की आवाजाही को काफी धीमा कर दिया है. आंकड़ों के अनुसार, फिलहाल कोई नया एलपीजी कार्गो भारत के लिए रास्ते में नहीं है और कई भारतीय टैंकर फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं.

10 किलो रिफिल का गणित और लाभ

एक मानक 14.2 किलो का एलपीजी सिलेंडर आमतौर पर एक औसत परिवार के लिए 35 से 40 दिन चलता है. अधिकारियों का मानना है कि रिफिल की मात्रा घटाकर 10 किलो करने से उपलब्ध स्टॉक को अधिक समय तक चलाया जा सकेगा.

  • यह मात्रा एक महीने की सामान्य घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त मानी जा रही है.

  • इस बदलाव के लागू होने पर सिलेंडरों पर नई मात्रा का स्पष्ट लेबल होगा.

  • गैस की मात्रा के आधार पर ही सिलेंडर की कीमतों में भी कटौती की जाएगी.

संचालन और नियामक चुनौतियां

हालांकि यह योजना अभी चर्चा के स्तर पर है, लेकिन इसे धरातल पर उतारने के लिए कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. बॉटलिंग प्लांटों में रिफिलिंग प्रक्रिया में बदलाव और सरकार से आधिकारिक नियामक मंजूरी लेना आवश्यक होगा. इसके अतिरिक्त, घरेलू रसोई गैस एक राजनीतिक और सामाजिक रूप से संवेदनशील मुद्दा है, इसलिए अधिकारी किसी भी अंतिम निर्णय से पहले उपभोक्ताओं की संभावित प्रतिक्रिया का भी आकलन कर रहे हैं.

भारत में खपत की वर्तमान स्थिति

भारत में प्रतिदिन लगभग 93,500 टन एलपीजी की खपत होती है, जिसमें घरेलू क्षेत्र की हिस्सेदारी सबसे अधिक है. हॉर्मुज संकट के जल्द समाप्त होने के संकेत नहीं मिलने के कारण आने वाले हफ्तों में आपूर्ति का दबाव और बढ़ सकता है. ऐसे में तेल कंपनियां इस आवश्यक ईंधन की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाने को मजबूर हो सकती हैं.

(The above story first appeared on LatestLY on Mar 23, 2026 11:58 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).