Hyderabad News: आमतौर पर लोग अपनी छुट्टियां मॉल, पार्क या सिनेमाघरों में बिताना पसंद करते हैं, लेकिन हैदराबाद अब एक ऐसा अनुभव पेश कर रहा है जो आपको सोचने पर मजबूर कर देगा. शहर की प्रसिद्ध चंचलगुडा जेल में 'फील द जेल' (Feel the Jail) नाम की एक अनूठी पहल शुरू की गई है. इसके तहत कोई भी आम नागरिक मात्र ₹500 का शुल्क जमा कर 24 घंटे के लिए कैदी की तरह जेल में रह सकता है. इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मनोरंजन नहीं, बल्कि लोगों को जेल के अनुशासन और वहां की कठिन परिस्थितियों से रूबरू कराना है.
संगारेड्डी मॉडल की सफलता के बाद हैदराबाद में शुरुआत.
जेल में रहने के इस विचार की जड़ें तेलंगाना के ही संगारेड्डी जिले में हैं. साल 2016 में संगारेड्डी हेरिटेज जेल संग्रहालय में यह प्रयोग पहली बार शुरू किया गया था. 1796 में निजाम काल में बनी उस पुरानी जेल को जब म्यूजियम में बदला गया, तो वहां पर्यटकों को 24 घंटे जेल में बिताने का विकल्प दिया गया. इस मॉडल की भारी सफलता और लोकप्रियता को देखते हुए अब इसे हैदराबाद की हाई-सिक्योरिटी चंचलगुडा जेल में भी लागू किया जा रहा है. यह भी पढ़े: Chandrababu Naidu Arrest Update: गिरफ्तारी के बाद न्यायिक हिरासत में भेजे गए चंद्रबाबू नायडू, राजमुंदरी सेंट्रल जेल में कैदी नंबर 7691 से जाने जाएंगे
कैसी होगी एक 'नकली कैदी' की दिनचर्या?
जो लोग इस अनुभव का हिस्सा बनेंगे, उन्हें किसी भी अन्य वास्तविक कैदी की तरह ही नियमों का पालन करना होगा.
-
कैदी की वर्दी और बर्तन: पंजीकरण के बाद व्यक्ति को कैदी वाली वर्दी, एक एल्युमीनियम की प्लेट और मग दिया जाएगा.
-
सादा भोजन: खाने में वही भोजन मिलेगा जो जेल के मैन्युअल के अनुसार असली कैदियों को दिया जाता है.
-
सख्त अनुशासन: सुबह तय समय पर उठना, कोठरी की सफाई और जेल के तय नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा. इसका मकसद यह दिखाना है कि जेल की चारदीवारी के अंदर की जिंदगी कितनी नीरस और चुनौतीपूर्ण होती है.
जेल संग्रहालय: इतिहास और सुधार की झलक.
चंचलगुडा जेल परिसर में एक विशेष म्यूजियम भी तैयार किया गया है. यहाँ पुरानी हथकड़ियां, जंजीरें, बुनाई मशीनें और जेल में इस्तेमाल होने वाले ऐतिहासिक औजार प्रदर्शित किए गए हैं. ऑडियो और वीडियो गाइड के जरिए यह भी समझाया गया है कि कैदियों की अदालत में पेशी कैसे होती है और उनके सुधार के लिए खेती व हथकरघा जैसे कौशल विकास कार्यक्रम कैसे चलाए जाते हैं.
युवाओं को अपराध से दूर रखने की कोशिश.
प्रशासन का मानना है कि यह पहल विशेष रूप से युवाओं के लिए एक बड़ी सीख साबित होगी. जब लोग खुद महसूस करेंगे कि जेल में रहना कितना कठिन है और वहां आपकी व्यक्तिगत आजादी किस तरह छीन ली जाती है, तो वे अपराध के रास्ते पर जाने से बचेंगे. यह अनुभव लोगों को आजादी की असली कीमत समझाने और समाज में कानून के प्रति सम्मान बढ़ाने का एक जरिया बनेगा.
यह पहल उन लोगों के लिए एक गंभीर और अलग तरह का अनुभव है, जो समाज के एक ऐसे पहलू को करीब से देखना चाहते हैं जिससे अक्सर लोग दूर भागते हैं.













QuickLY