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Hijab Controversy: कर्नाटक हाई कोर्ट ने सुनवाई पूरी की, फैसला रखा सुरक्षित

एजी ने तर्क दिया कि हिजाब पहनना इस्लाम का एक अनिवार्य हिस्सा नहीं है और सरकार के पास निश्चित रूप से सार्वजनिक व्यवस्था, स्वास्थ्य और नैतिकता के मामले में निर्णय लेने का अधिकार है. पीठ को मौलिक अधिकारों, प्रकृति में व्यक्तिगत, प्रतिबंधों के अधीन होने पर भी सूचित किया गया था.

Hijab Controversy: कर्नाटक हाई कोर्ट ने सुनवाई पूरी की, फैसला रखा सुरक्षित
कर्नाटक उच्च न्यायालय (Photo Credits: ANI)

बेंगलुरू: कर्नाटक उच्च न्यायालय (Karnataka High Court) की पीठ ने शुक्रवार को कक्षाओं में भाग लेने के दौरान हिजाब (Hijab) पहनने के अधिकार की मांग करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई पूरी कर ली और सभी वकीलों से लिखित दलीलें जमा करने को कहा, क्योंकि उन्होंने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. मुख्य न्यायाधीश रितु राज अवस्थी (Ritu Raj Awasthi), और न्यायमूर्ति कृष्णा एस दीक्षित (Krishna S Dixit) और न्यायमूर्ति जेएम खाजी (JM Khaji) की तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने मामले की तात्कालिकता और संवेदनशीलता को देखते हुए आज एक दिन में 11 दिनों के तर्क और प्रतिवादों को सुना. Hijab Controversy: कर्नाटक हाईकोर्ट ने वकील से शुक्रवार तक दलीलें पूरी करने को कहा

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील, (जो कॉलेज के छात्र हैं), ने कहा कि इस संबंध में जारी किए गए सरकारी आदेश का कोई कानूनी आधार नहीं है और इसने धर्म के पालन के उनके मौलिक अधिकार का उल्लंघन किया और इस तरह उन्हें शिक्षा के अधिकार से वंचित कर दिया जो सर्वोपरि है. उन्होंने यह भी तर्क दिया कि कॉलेज विकास समिति (सीडीसी) और स्कूल विकास और प्रबंधन समिति (एसडीएमसी) के गठन में कानूनी वैधता नहीं है.

उन्होंने एक अकादमिक माहौल में निर्णय लेने की शक्ति दी जा रही विचारधारा से जुड़े राजनीतिक प्रतिनिधियों की नियुक्ति पर भी सवाल उठाया. उन्होंने यह भी कहा कि अधिनियम में वर्दी निर्धारित करने का कोई प्रावधान नहीं है.

सरकार ने महाधिवक्ता प्रभुलिंग नवदगी के माध्यम से तर्क दिया कि हिजाब पहनने पर निर्णय लेने में सरकार की कोई भूमिका नहीं है और इसे सीडीसी और एसडीएमसी के विवेक पर छोड़ दिया गया है.

एजी ने तर्क दिया कि हिजाब पहनना इस्लाम का एक अनिवार्य हिस्सा नहीं है और सरकार के पास निश्चित रूप से सार्वजनिक व्यवस्था, स्वास्थ्य और नैतिकता के मामले में निर्णय लेने का अधिकार है. पीठ को मौलिक अधिकारों, प्रकृति में व्यक्तिगत, प्रतिबंधों के अधीन होने पर भी सूचित किया गया था.

सरकार ने अचानक इस मुद्दे को उठाने में कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (सीएफआई) और अन्य संगठनों की भूमिका पर खुफिया जानकारी और रिपोर्ट भी जमा कर दी है. फैसले का बेसब्री से इंतजार है, क्योंकि इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा हो चुकी है.

उडुपी प्री-यूनिवर्सिटी गर्ल्स कॉलेज से शुरू हुई हिजाब पंक्ति राज्य में एक संकट बन गई है, छात्रों ने बिना हिजाब के कक्षाओं में जाने से इनकार कर दिया और कहा कि वे अंतिम फैसला आने तक इंतजार करेंगे. हालांकि हाई कोर्ट ने कक्षाओं के अंदर हिजाब और भगवा शॉल या स्कार्फ दोनों पर प्रतिबंध लगाने का अंतरिम आदेश जारी किया था, लेकिन आंदोलन जारी है.

(The above story first appeared on LatestLY on Feb 25, 2022 11:07 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).