Udhampur News: जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में भारी बारिश से बहा पुल, ग्रामीण ऑटो को कंधों पर उठाकर नदी पार करने पर मजबूर; VIDEO
जम्मू-कश्मीर के उधमपुर ज़िले के बंत गांव में भारी बारिश के चलते तवी नदी पर बना पुल बह गया, जिससे ग्रामीणों की परेशानियां कई गुना बढ़ गई हैं. अब लोग मजबूरी में नदी को पार करने के लिए खतरनाक रास्ता अपना रहे हैं. नदी के बीच से पैदल चलना और ऑटो रिक्शा तक कंधों पर उठाकर ले जाना पड़ रहा हैं.
Udhampur News: जम्मू-कश्मीर के उधमपुर ज़िले के बंत गांव में भारी बारिश के चलते तवी नदी पर बना पुल बह गया, जिससे ग्रामीणों की परेशानियां कई गुना बढ़ गई हैं. अब लोग मजबूरी में नदी को पार करने के लिए खतरनाक रास्ता अपना रहे हैं. नदी के बीच से पैदल चलना और ऑटो रिक्शा (Auto Rickshaw) तक कंधों पर उठाकर ले जाना पड़ रहा हैं.
तवी नदी पानी में बहा
इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया (X) पर वायरल हो रहा है, जिसमें देखा जा सकता है कि ग्रामीण, आम नागरिकों के साथ मिलकर एक ऑटो रिक्शा को कंधों पर उठाकर तेज बहाव वाली तवी नदी को पार कर रहे हैं. वीडियो में साफ दिख रहा है कि नदी का बहाव तेज है और यह कार्य जानलेवा जोखिम से भरा है. यह भी पढ़े: Jammu and Kashmir: जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश से अब तक 5000 से अधिक लोगों का रेस्क्यू, एलजी मनोज सिन्हा ने अधिकारियों से की बात
ऑटो रिक्शा को कंधों पर ले जाते ग्रामीण
पुल के बहने से 50,000 से अधिक लोग प्रभावित
इस पुल के बहने से क्षेत्र की 10 पंचायतों और 20 से अधिक गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह टूट गया है, जिससे करीब 50,000 लोग प्रभावित हुए हैं. सबसे ज्यादा असर स्कूल जाने वाले बच्चों पर पड़ा है, जिन्हें हर दिन जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ रही है.
अब तक कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन ने अब तक कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की है.आपातकालीन सेवाएं, जैसे ऐम्बुलेंस, दवाइयां और राशन की आपूर्ति भी बाधित हो गई है.
9 साल की लड़ाई के बाद बना था पुल
स्थानीय लोगों के अनुसार, इस पुल को करीब 9 साल पहले लंबी लड़ाई के बाद मंजूरी मिली थी. यह पुल क्षेत्र के लिए जीवनरेखा की तरह था, लेकिन 26 अगस्त को हुई भारी बारिश और तवी नदी के उफान के चलते यह बह गया.
प्रशासन का वादा
प्रशासन का कहना है कि जल्द ही सर्वेक्षण के बाद एक अस्थायी पुल या वैकल्पिक मार्ग तैयार किया जाएगा. लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि ये वादे सिर्फ कागजों तक सीमित रह गए हैं. उनका कहना है कि जब तक नया पुल नहीं बनता, तब तक उनका जीवन हर दिन जोखिम में बना रहेगा.