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जॉर्जिया में क्यों भड़की हिंसा? राष्ट्रपति भवन को घेरा, जानें चुनावी धांधली और सरकार विरोधी गुस्से की पूरी कहानी

जॉर्जिया की राजधानी त्बिलिसी में चुनावी धांधली के खिलाफ हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं. प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति भवन को घेरने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस के साथ उनकी हिंसक झड़प हुई. प्रदर्शनकारी सत्तारूढ़ पार्टी पर रूस समर्थक होने का आरोप लगाते हुए नए चुनाव और प्रधानमंत्री की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं.

जॉर्जिया में क्यों भड़की हिंसा? राष्ट्रपति भवन को घेरा, जानें चुनावी धांधली और सरकार विरोधी गुस्से की पूरी कहानी
(Photo : X)

जॉर्जिया, जो यूरोप और एशिया के बीच बसा एक छोटा सा देश है, वहां इस समय हालात बहुत तनावपूर्ण हैं. राजधानी त्बिलिसी की सड़कों पर हजारों लोग उतर आए हैं और सरकार के खिलाफ जमकर प्रदर्शन कर रहे हैं. शनिवार को तो मामला इतना बढ़ गया कि गुस्साई भीड़ ने राष्ट्रपति भवन (ओर्बेलियानी पैलेस) पर धावा बोलने की कोशिश की, जिसके बाद उनकी सुरक्षा बलों के साथ हिंसक झड़प हो गई.

आखिर ये पूरा मामला क्या है?

इस पूरे बवाल की जड़ में हाल ही में हुए स्थानीय निकाय चुनाव हैं. देश की ज्यादातर विपक्षी पार्टियां, जो यूरोपियन यूनियन (EU) के साथ जुड़ना चाहती हैं, उन्होंने इन चुनावों का बहिष्कार किया. उनका आरोप है कि सत्तारूढ़ 'जॉर्जियन ड्रीम पार्टी' चुनावों में धांधली करती है. यह सिर्फ अभी की बात नहीं है, पिछले साल हुए संसदीय चुनावों के बाद से ही देश में राजनीतिक संकट बना हुआ है. तब भी अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने माना था कि चुनाव में गड़बड़ियां हुई थीं.

इस संकट के बीच, प्रधानमंत्री इराकली कोबाखिद्ज़े की सरकार ने यूरोपीय संघ में शामिल होने की बातचीत को रोक दिया, जिससे लोगों का गुस्सा और भड़क गया. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि 'जॉर्जियन ड्रीम पार्टी' रूस की तरफ झुक रही है और देश को यूरोप से दूर ले जा रही है.

सरकार का क्या कहना है?

दूसरी तरफ, सरकार इन प्रदर्शनों को एक विदेशी साजिश बता रही है. प्रधानमंत्री कोबाखिद्ज़े ने सीधे तौर पर यूरोपीय संघ पर देश में दंगे भड़काने का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि EU के झंडे लेकर दंगाइयों ने राष्ट्रपति भवन के बाहर आगजनी की. उन्होंने यहां तक कह दिया कि EU के राजदूत प्रदर्शनकारियों की मदद कर रहे हैं ताकि देश की सरकार को उखाड़ फेंका जा सके.

प्रदर्शनकारियों की मांगें क्या हैं?

शनिवार को हुए प्रदर्शन का नेतृत्व एक जाने-माने ओपेरा सिंगर, पाता बरचुलाद्जे कर रहे थे. प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें हैं:

  1. देश में दोबारा संसदीय चुनाव कराए जाएं.
  2. प्रधानमंत्री इराकली कोबाखिद्जे समेत 'जॉर्जियन ड्रीम पार्टी' के 6 बड़े नेताओं को तुरंत गिरफ्तार किया जाए.
  3. जेल में बंद करीब 60 राजनीतिक कैदियों को रिहा किया जाए.

आगे क्या होगा?

फिलहाल स्थिति गंभीर बनी हुई है. एक तरफ प्रदर्शनकारी हैं जो इसे "शांतिपूर्ण क्रांति" बता रहे हैं और देश का भविष्य यूरोप के साथ देखते हैं. दूसरी तरफ सरकार है जो इसे विदेशी ताकतों की साजिश मान रही है और प्रदर्शनकारियों पर सख्ती बरत रही है. यूरोपीय संसद और अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी पिछले चुनाव के नतीजों को मानने से इनकार कर चुके हैं और नए चुनाव की मांग कर रहे हैं. इस टकराव ने जॉर्जिया को एक ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहां से यह तय होगा कि देश रूस के प्रभाव में जाएगा या पश्चिम के साथ अपने रिश्ते मजबूत करेगा.

(The above story first appeared on LatestLY on Oct 05, 2025 07:16 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).