Fraud in Ladki Bahin Yojana: महाराष्ट्र की 2,652 महिला सरकारी कर्मचारियों ने किया बड़ा फ्रॉड, अब सरकार वसूलेगी 3.58 करोड़ रुपये
Ladki Bahin Yojana | Representative Image Wikimedia Commons

मुंबई: महाराष्ट्र सरकार की ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहन योजना’ में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है. इस योजना का लाभ पाने के लिए 2,652 महिला सरकारी कर्मचारियों ने झूठे दस्तावेजों के आधार पर पैसे लिए, जबकि सरकारी नियमों के अनुसार वे इस योजना के लिए अयोग्य थीं. अब सरकार इनसे कुल 3.58 करोड़ रुपये की वसूली करने जा रही है.

क्या है 'लाडकी बहन योजना'?

‘लाडकी बहन योजना’ की शुरुआत 2024 में महायुति सरकार द्वारा राज्य विधानसभा चुनावों से पहले की गई थी. इस योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है. लेकिन स्पष्ट नियम है कि सरकारी कर्मचारी इस योजना के पात्र नहीं हैं.

कैसे हुआ फर्जीवाड़ा का खुलासा?

इस घोटाले का खुलासा तब हुआ जब सूचना प्रौद्योगिकी विभाग ने आधार (UID)-आधारित डेटा वेरिफिकेशन की प्रक्रिया शुरू की. सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने 1.6 लाख सरकारी कर्मचारियों का डेटा साझा किया, जिसमें से 1.2 लाख की जांच हो चुकी है.

जांच में सामने आया कि क्लास III और IV की महिला कर्मचारियों ने अगस्त 2024 से अप्रैल 2025 के बीच 13,500- 13,500 रुपये की राशि उठाई. अब प्रशासन इन कर्मचारियों से यह पूरी राशि वापस वसूलने की तैयारी में है.

दो योजनाओं का दोहरा लाभ भी बना परेशानी

जांच में यह भी पता चला कि करीब 7.7 लाख महिलाओं को लाडकी बहन योजना और नमो शेतकरी योजना दोनों का लाभ मिल रहा था. जो कि नियमों का सीधा उल्लंघन है. सरकार ने इन सभी की भुगतान प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगा दी है.

प्रशासन ने क्या कदम उठाए?

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, दोषी कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई जल्द शुरू होगी. ये कर्मचारी सिर्फ योजना नियमों का ही नहीं, बल्कि सेवा आचरण संहिता (Service Conduct Rules) का भी उल्लंघन कर रही हैं. ऐसे में विजिलेंस और भ्रष्टाचार निरोधक विभाग इन मामलों की जांच और वसूली में सहयोग करेंगे.

स्वेच्छा से लौटाएं पैसा, नहीं तो कार्रवाई तय

सरकारी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर अन्य अयोग्य लाभार्थी स्वेच्छा से योजना की रकम वापस नहीं करते, तो उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

‘लाडकी बहन योजना’ जैसी योजनाएं समाज की जरूरतमंद महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए होती हैं. लेकिन जब सरकारी कर्मचारी ही धोखाधड़ी करके इसका लाभ उठाते हैं, तो वास्तव में जरूरतमंदों का हक मारा जाता है. सरकार की यह सख्ती इस बात का संकेत है कि अब फर्जीवाड़ा करने वालों के लिए कोई जगह नहीं है.