Fact Check: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो कुछ दिन पहले साझा किया था, जिसमें पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा उनके साथ बातचीत कर रहे और इसी दौरान एफबीआई के अधिकारी आकर उन्हें गिरफ्तार कर लेते है. सोशल मीडिया पर ये वीडियो जमकर वायरल हो रहा है. बता दें की ये वीडियो एआई से बनाया हुआ है. इसमें हैरानी की बात ये है की इस वीडियो को खुद ट्रम्प ने भी शेयर किया था. वीडियो की थीम'कोई भी कानून से ऊपर नहीं थी. इस वीडियो में दावा किया गया था था कि ओवल ऑफिस में ओबामा को गिरफ्तार किया गया है.
इस वीडियो को अब भी X के Truth Seeker नाम के हैंडल पर देखा जा सकता है. ये भी पढ़े:एडिटेड Video से फैलाया जा रहा झूठ; विदेश मंत्री ने नहीं मानी पाकिस्तान के साथ जंग में राफेल के नुकसान की बात
एआई से बनाया हुआ है पूर्व राष्ट्रपति की गिरफ़्तारी का वीडियो
Barack Obama Arrested in the Oval Office – AI-Generated Video Posted by Donald Trump on Truth Social
The former U.S. president is seen being detained by FBI agents in the clip, prompting laughter from the current American leader. pic.twitter.com/irKs5TAgNF
— Truth Seeker (@mib_63) July 21, 2025
वीडियो की थीम 'कोई भी कानून से ऊपर नहीं'
वीडियो की शुरुआत एक बयान से होती है जिसमें ओबामा कहते हैं कि 'खासकर राष्ट्रपति कानून से ऊपर नहीं होता.इसके बाद वीडियो में अमेरिका के कई नेताओं के पुराने बयान दिखाए गए हैं जिनमें कहा गया है, 'कोई कानून से ऊपर नहीं है.इसके तुरंत बाद, क्लिप में ओबामा को ओवल ऑफिस में गिरफ्तार होते दिखाया जाता है. ट्रंप इस दौरान पास में बैठे मुस्कुराते नजर आते हैं. वीडियो का अंत एक दृश्य से होता है जिसमें ओबामा को जेल की नारंगी पोशाक पहने हुए सलाखों के पीछे दिखाया गया है.
वीडियो पर सफाई नहीं
ट्रंप ने यह वीडियो शेयर करते समय कहीं भी यह नहीं बताया कि यह फर्जी वीडियो है.इस बात ने आलोचकों को मौका दे दिया.कई राजनीतिक विश्लेषकों और सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे 'गंभीर रूप से गैर-जिम्मेदाराना कदम' बताया है, क्योंकि यह जनता को गुमराह कर सकता है.
ट्रंप पहले भी लगा चुके हैं गंभीर आरोप
यह विवाद उस समय आया है जब कुछ सप्ताह पहले ही ट्रंप ने ओबामा पर 'उच्च स्तरीय चुनावी धोखाधड़ी' का आरोप लगाया था.उनका कहना था कि 2016 के चुनाव के बाद ओबामा प्रशासन ने उनके खिलाफ झूठे आरोप गढ़े ताकि उनकी राजनीतिक साख को नुकसान पहुंचे.
ट्रंप के खिलाफ रची गई थी साजिश
पूर्व डेमोक्रेट नेता और मौजूदा राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड ने हाल ही में एक बड़ा दावा किया है.उन्होंने कहा कि उनके पास ऐसे 'पक्के और चौंकाने वाले सबूत'हैं जो यह साबित करते हैं कि ओबामा प्रशासन के कुछ शीर्ष अधिकारी 2016 में रूस-ट्रंप साजिश की झूठी कहानी गढ़ने में शामिल थे.गबार्ड ने यह भी कहा कि अब समय आ गया है कि ओबामा प्रशासन के इन अधिकारियों के खिलाफ ट्रायल चलाया जाए.
ओडीएनआई की रिपोर्ट
इस पूरे विवाद के बीच, अमेरिका के खुफिया विभाग ओडीएनआई ने एक 114 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट जारी की है.रिपोर्ट में बताया गया है कि 2016 के चुनाव से पहले, खुफिया एजेंसियों ने आकलन किया था कि रूस साइबर माध्यमों से अमेरिकी चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश नहीं कर रहा था.यह भी उल्लेख किया गया कि 8 दिसंबर 2016 को राष्ट्रपति को दी गई खुफिया ब्रीफिंग के ड्राफ्ट में कहा गया था कि रूस के कथित साइबर हमलों का चुनावी परिणामों पर कोई असर नहीं पड़ा.
राजनीति में तकनीक बन जाए हथियार
डोनाल्ड ट्रंप द्वारा साझा किया गया यह वीडियो भले ही एक मजाक या तंज के रूप में पोस्ट किया गया हो, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि एआई तकनीक का इस तरह से इस्तेमाल लोकतंत्र के लिए खतरनाक है.













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