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Faridabad: फेफड़ों में फंसे खाने के कण, सांस के लिए जूझ रहे दो मासूमों को डॉक्टरों ने दिया जीवनदान

फरीदाबाद के एक निजी अस्पताल में डॉक्टरों ने जटिल 'रिजिड ब्रोंकोस्कोपी' प्रक्रिया के जरिए दो मासूम बच्चों के फेफड़ों से मूंगफली और बादाम के टुकड़े निकालकर उनकी जान बचाई. बच्चों का ऑक्सीजन लेवल गिरकर 40% तक पहुंच गया था.

Faridabad: फेफड़ों में फंसे खाने के कण, सांस के लिए जूझ रहे दो मासूमों को डॉक्टरों ने दिया जीवनदान
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: PICRYL)

फरीदाबाद: हरियाणा के फरीदाबाद में डॉक्टरों की एक टीम ने मौत के मुंह में जा रहे दो मासूमों को नई जिंदगी दी है. शहर के अमृता अस्पताल (Amrita Hospital) में दो अलग-अलग मामलों में 14 महीने और 8 महीने के बच्चों के फेफड़ों में खाने के कण (मूंगफली और बादाम) फंस गए थे, जिससे उन्हें सांस लेने में गंभीर तकलीफ हो रही थी. डॉक्टरों ने 'रिजिड ब्रोंकोस्कोपी' (Rigid Bronchoscopy) नामक जटिल प्रक्रिया के जरिए इन बाहरी कणों को सफलतापूर्वक बाहर निकाला.

पहला मामला 14 महीने के बच्चे का था, जिसे बेहद नाजुक स्थिति में इमरजेंसी में लाया गया था. बच्चे के दाएं फेफड़े में मूंगफली का टुकड़ा फंसने के कारण उसकी सांस की नली पूरी तरह ब्लॉक हो गई थी, जिससे उसका ऑक्सीजन सैचुरेशन (Saturation) गिरकर महज 40% रह गया था. सामान्य तौर पर यह 95-100% होना चाहिए.

दूसरे मामले में 10 महीने का बच्चा पिछले कई दिनों से लगातार खांसी और सांस की तकलीफ से जूझ रहा था. जांच में पता चला कि उसके बाएं फेफड़े में बादाम का टुकड़ा फंसा है, जिससे शरीर में कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ गया था. यह भी पढ़ें: 'Jeeja Saali' Suicide in Hardoi: हरदोई में 'जीजा-साली' ने ट्रेन के आगे कूदकर दी जान, प्रेम संबंधों का था मामला, लखनऊ-दिल्ली रेल मार्ग पर हुई घटना

सर्जरी के जरिए मिली नई जिंदगी

अस्पताल के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के डॉक्टरों ने दोनों बच्चों की रिजिड ब्रोंकोस्कोपी की. यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें एक विशेष उपकरण (ब्रोंकोस्कोप) को सांस की नली में डालकर सीधे देखा जाता है और फंसी हुई चीजों को निकाला जाता है.

'छोटे बच्चों के फेफड़े बहुत नाजुक होते हैं, इसलिए यह प्रक्रिया बेहद चुनौतीपूर्ण थी. हमने क्रायोथेरेपी (Cryotherapy) जैसी आधुनिक तकनीक का भी उपयोग किया ताकि फेफड़ों को नुकसान पहुंचाए बिना कणों को निकाला जा सके.' - डॉ. सौरभ पाहुजा, वरिष्ठ परामर्शदाता

अभिभावकों के लिए डॉक्टरों की चेतावनी

इस घटना के बाद डॉक्टरों ने माता-पिता के लिए सख्त चेतावनी जारी की है। विशेषज्ञों के अनुसार:

  • दाढ़ का अभाव: 5 साल से कम उम्र के बच्चों में सख्त खाने (जैसे सूखे मेवे) को पीसने के लिए 'दाढ़' (Molars) पूरी तरह विकसित नहीं होती हैं.
  • सांस की नली में रुकावट: खाते समय अचानक हंसने या रोने से भोजन के कण भोजन नली के बजाय सांस की नली (Windpipe) में चले जाते हैं, जो जानलेवा हो सकता है.
  • सावधानी: बच्चों को साबुत मूंगफली, बादाम, बीज या सख्त कैंडी देने से बचें. इन्हें पीसकर या पेस्ट बनाकर ही देना सुरक्षित है.

(The above story first appeared on LatestLY on Jan 18, 2026 01:26 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).