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Anti-Brahmin Campaign in UP: इस्तीफे के बाद पीसीएस अधिकारी Alankar Agnihotri का बड़ा आरोप, ‘यूपी सरकार में चल रहा ब्राह्मण विरोधी अभियान’ (Watch Video)

बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा देकर योगी सरकार पर 'ब्राह्मण विरोधी' होने का गंभीर आरोप लगाया है. उन्होंने प्रयागराज माघ मेले में संतों के अपमान का मुद्दा उठाते हुए इस्तीफा दिया, जिसके बाद सरकार ने उन्हें निलंबित कर विभागीय जांच शुरू कर दी है

Anti-Brahmin Campaign in UP: इस्तीफे के बाद पीसीएस अधिकारी Alankar Agnihotri का बड़ा आरोप, ‘यूपी सरकार में चल रहा ब्राह्मण विरोधी अभियान’ (Watch Video)
(Photo Credits IANS)

Anti-Brahmin Campaign in UP:  उत्तर प्रदेश के बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट के पद पर तैनात पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने अपने इस्तीफे के साथ प्रदेश की राजनीति में नया तूफान खड़ा कर दिया है. सोमवार को गणतंत्र दिवस के अवसर पर इस्तीफा देने वाले अग्निहोत्री ने आरोप लगाया है कि उत्तर प्रदेश सरकार में पिछले कुछ समय से 'ब्राह्मण विरोधी अभियान' चल रहा है. उनके इन तीखे बयानों और 'काला कानून' (UGC नियमों) के विरोध के बाद, राज्य सरकार ने उनका इस्तीफा स्वीकार करने के बजाय उन्हें 'कदाचार' के आरोप में निलंबित (Suspend) कर दिया है.

शंकराचार्य और संतों के अपमान का मुद्दा

अलंकार अग्निहोत्री ने अपने त्यागपत्र और मीडिया बयानों में प्रयागराज के माघ मेले की हालिया घटनाओं का जिक्र किया है. उन्होंने आरोप लगाया कि ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों के साथ पुलिस ने दुर्व्यवहार किया. यह भी पढ़े:  Alankar Agnihotri’s Resignation Row: पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे के बाद सवालों के घेरे में योगी सरकार, विपक्ष ने प्रशासनिक दबाव पर उठाए सवाल

शिष्यों की शिखा का अपमान: अग्निहोत्री का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने संन्यासियों की 'शिखा' (चोटी) पकड़कर उन्हें घसीटा और बुजुर्ग संतों के साथ मारपीट की.

प्रशासनिक रवैया: उन्होंने सवाल उठाया कि क्या प्रशासन ब्राह्मणों का 'नरसंहार' (Massacre) चाहता है? उन्होंने इस अपमान को अपनी अंतरात्मा पर चोट बताते हुए इस्तीफा देने का निर्णय लिया.

अलंकार अग्निहोत्री का योगी सरकार पर बड़ा आरोप

'ब्राह्मणों पर अत्याचार का आरोप

अग्निहोत्री ने यूजीसी द्वारा जारी किए गए नए समानता नियमों (Equity Regulations 2026) को भी अपने इस्तीफे का प्रमुख कारण बताया है. उन्होंने इसे एक 'विभाजनकारी नीति' करार दिया जो सामान्य वर्ग के मेधावी छात्रों को निशाना बनाएगी. उनका दावा है कि ये नियम शैक्षणिक संस्थानों में केवल सामान्य वर्ग के छात्रों के उत्पीड़न का मार्ग प्रशस्त करेंगे.

बंधक बनाने का सनसनीखेज आरोप

इस्तीफे के बाद कल रात एक और हाई-प्रोफाइल ड्रामा देखने को मिला. अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि उन्हें बरेली के जिलाधिकारी (DM) के आवास पर करीब 45 मिनट तक 'बंधक' बनाकर रखा गया और उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया. हालांकि, डीएम अविनाश सिंह ने इन आरोपों को "कल्पना और आधारहीन" बताते हुए खारिज कर दिया है. इस बीच, उत्तर प्रदेश शासन ने देर रात आदेश जारी कर अग्निहोत्री को निलंबित कर दिया और उन्हें शामली जिलाधिकारी कार्यालय से संबद्ध कर दिया है.

शंकराचार्य का समर्थन

अग्निहोत्री के इस कदम के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने खुद उनसे फोन पर बात की और उनके 'साहस' की सराहना की. शंकराचार्य ने उन्हें आश्वासन दिया कि सनातनी समाज उनका अभिनंदन करता है और उन्हें धर्म के क्षेत्र में सरकारी पद से भी बड़ा सम्मान दिया जाएगा. दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने इसे सरकार की विफलता बताते हुए कहा है कि जब एक उच्चाधिकारी असुरक्षित महसूस कर रहा है, तो आम जनता का क्या होगा.

(The above story first appeared on LatestLY on Jan 27, 2026 11:36 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).