EPFO: अब दो PF अकाउंट को मर्ज करना हुआ और भी आसान; टैक्स बचाने और UPI से पैसे निकालने के लिए अपनाएं ये तरीका
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: Facebook)

नई दिल्ली: आज के समय में बेहतर अवसरों के लिए बार-बार नौकरी बदलना एक आम बात है, लेकिन इसके साथ ही कई Provident Fund (PF) खातों को मैनेज करना एक बड़ी चुनौती बन गया है. अक्सर देखा जाता है कि नई कंपनी कर्मचारी के लिए एक नया UAN (Universal Account Number) जारी कर देती है, जिससे पुराने खाते का पैसा और सर्विस हिस्ट्री पीछे छूट जाती है. वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि इन खातों को मर्ज करना न केवल सुविधा के लिए, बल्कि टैक्स लाभ सुरक्षित करने के लिए भी बेहद जरूरी है. यह भी पढ़ें: PF Interest: पीएफ धारकों के लिए खुशखबरी! EPFO ने खातों में सालाना ब्याज डालने की प्रक्रिया शुरू; ऐसे चेक करें अपना बढ़ा हुआ बैलेंस

UPI और बैंक जैसी सुविधाओं का आगाज़

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अब अपने सबसे बड़े डिजिटल बदलाव EPFO 3.0 को रोलआउट करने की तैयारी में है.

  • UPI विड्रॉल: अप्रैल 2026 से, सदस्य BHIM UPI के जरिए सीधे अपने पीएफ खाते से ₹25,000 तक की तत्काल निकासी कर सकेंगे.
  • बैंक जैसी पहुंच: नए कोर बैंकिंग सिस्टम के कारण, अब सदस्य देश के किसी भी ईपीएफओ कार्यालय से अपनी सेवाएं ले सकेंगे.
  • ऑटो क्लेम सेटलमेंट: अब 90% दावों का निपटारा एआई (AI) के जरिए महज 3 दिनों के भीतर हो रहा है.

दो UAN को मर्ज करना क्यों है अनिवार्य?

जब आप नौकरी बदलते हैं, तो आपकी सर्विस हिस्ट्री का निरंतर बने रहना जरूरी है. यदि आपके पास दो अलग-अलग UAN हैं, तो उन्हें मर्ज करने के निम्नलिखित फायदे हैं:

  1. टैक्स फ्री निकासी: पीएफ से पैसा तभी टैक्स-फ्री होता है जब आपकी कुल सर्विस 5 साल या उससे अधिक हो. खातों को मर्ज करने पर अलग-अलग कंपनियों की सर्विस अवधि को जोड़ दिया जाता है.
  2. पेंशन का लाभ: 10 साल की निरंतर सेवा पूरी करने पर ही आप पेंशन के हकदार होते हैं, जो केवल खातों के विलय से ही संभव है.
  3. ब्याज का नुकसान: निष्क्रिय या डुप्लीकेट खातों पर ब्याज मिलना बंद हो सकता है या उस ब्याज पर टैक्स लग सकता है.

कैसे करें दो खातों को मर्ज? (स्टेप-बाय-स्टेप गाइड)

विशेषज्ञों ने खातों को जोड़ने के लिए निम्नलिखित प्रक्रिया सुझाई है:

5 साल का नियम और टैक्स का गणित

इनकम टैक्स एक्ट के तहत, यदि आप 5 साल की निरंतर सेवा से पहले पीएफ निकालते हैं, तो उस पर 10% TDS (पैन होने पर) कटता है.

  • उदाहरण: यदि आपने पहली कंपनी में 3 साल और दूसरी में 3 साल काम किया है, तो मर्ज करने के बाद आपकी सेवा 6 साल मानी जाएगी और निकासी टैक्स-फ्री होगी.
  • चेतावनी: योगदान न रहने की अवधि (Non-contributory period) के दौरान जमा होने वाला ब्याज हमेशा टैक्स के दायरे में रहता है, इसलिए समय पर क्लेम करना बेहतर है.