Bharatiya Antariksh Hackathon 2026: इसरो ने लॉन्च किया 'भारतीय अंतरिक्ष हैकाथॉन 2026'; जानें पात्रता, महत्वपूर्ण तारीखें और आवेदन का तरीका
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 'भारतीय अंतरिक्ष हैकाथॉन' के तीसरे संस्करण की शुरुआत की है. इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता के जरिए अंतरिक्ष विज्ञान और रिसर्च से जुड़े छात्रों से तकनीकी चुनौतियों के समाधान मांगे गए हैं.
Bharatiya Antariksh Hackathon 2026: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (Indian Space Research Organisation) यानी इसरो (ISRO) ने 'भारतीय अंतरिक्ष हैकाथॉन' (Bharatiya Antariksh Hackathon) के तीसरे संस्करण को आधिकारिक तौर पर लॉन्च कर दिया है. 11 जून को घोषित की गई यह राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता विशेष रूप से अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और अनुसंधान (स्पेस टेक्नोलॉजी और रिसर्च) की पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए तैयार की गई है. इस पहल का मुख्य उद्देश्य भारत के बढ़ते अंतरिक्ष अभियानों से जुड़ी वास्तविक तकनीकी चुनौतियों के लिए देश भर के युवाओं से नवोन्मेषी (इन्नोवेटिव) समाधान खोजना है. हैकाथॉन के दौरान प्रतिभागियों को इसरो के वैज्ञानिकों और विषय विशेषज्ञों से सीधे मार्गदर्शन (मेंटरशिप) मिलेगा. अंतरिक्ष एजेंसी ने यह भी संकेत दिया है कि उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को भविष्य में इसरो में इंटर्नशिप के अवसर मिल सकते हैं. यह भी पढ़ें: ISRO PSLV-C62 Mission Launch Live Streaming: भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी 2026 के पहले मिशन में EOS-N1 सैटेलाइट कर रही है तैनात, यहां देखें ऑनलाइन टेलीकास्ट
फोकस क्षेत्र और प्रमुख चुनौतियां
साल 2026 के इस हैकाथॉन में आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान और जमीनी अनुप्रयोगों (टेरेस्ट्रियल एप्लीकेशन) से जुड़े 15 अलग-अलग विषय (प्रॉब्लम स्टेटमेंट्स) शामिल किए गए हैं. इनमें मुख्य रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग (ML), जलवायु मॉडलिंग (क्लाइमेट मॉडलिंग), कृषि ट्रैकिंग और सैटेलाइट ऑपरेशन्स जैसे क्षेत्र शामिल हैं.
प्रतियोगिता के तहत छात्रों को कुछ बेहद खास प्रोजेक्ट्स पर काम करने का मौका मिलेगा. उदाहरण के लिए, छात्रों को चंद्रयान-2 के डेटा का उपयोग करके चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास सतह के नीचे छिपे बर्फ का पता लगाने की तकनीक विकसित करनी होगी. इसके अलावा, आदित्य-एल1 मिशन के डेटा की मदद से सौर ज्वालाओं (सोलर फ्लेयर्स) का पूर्वानुमान लगाने का मॉडल तैयार करना होगा. अन्य प्रमुख चुनौतियों में भारत की जलवायु का एआई-संचालित "डिजिटल ट्विन" डिजाइन करना और शहरी क्षेत्रों में बढ़ते तापमान (अर्बन हीट) को कम करने व वायु गुणवत्ता की निगरानी के लिए मशीन लर्निंग मॉडल विकसित करना शामिल है.
इसरो ने भारतीय अंतरिक्ष हैकथॉन 2026 लॉन्च किया
कौन कर सकता है आवेदन? (पात्रता मानदंड)
इस हैकाथॉन में भाग लेने के लिए भारत के उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ रहे छात्र पात्र हैं। योग्यता की शर्तें इस प्रकार हैं:
- स्नातक (अंडरग्रेजुएट) छात्र.
- स्नातकोत्तर (पोस्टग्रेजुएट) और मास्टर डिग्री के छात्र.
- पीएचडी (PhD) उम्मीदवार और रिसर्च स्कॉलर्स.
प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए टीम में 3 से 4 सदस्यों का होना अनिवार्य है. अंतर-विषयी सहयोग (इंटरडिसिप्लिनरी कोलैबोरेशन) को बढ़ावा देने के लिए, इसरो ने अलग-अलग कॉलेजों या विश्वविद्यालयों के छात्रों को मिलाकर एक साझा टीम बनाने की भी अनुमति दी है. इस हैकाथॉन में भाग लेना पूरी तरह से निशुल्क है; इसके लिए कोई पंजीकरण या सबमिशन फीस नहीं ली जा रही है.
महत्वपूर्ण तारीखें और टाइमलाइन
हैकाथॉन के लिए पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) और शुरुआती विचार (आइडिया) जमा करने का पोर्टल 10 जून से खुल चुका है. इच्छुक टीमें 1 जुलाई 2026 की समयसीमा (डेडलाइन) तक अपने आवेदन जमा कर सकती हैं.
रजिस्ट्रेशन और आइडिया सबमिशन
10 जून - 1 जुलाई 2026
आधिकारिक पोर्टल पर आवेदन करने और शुरुआती तकनीकी विचार जमा करने की अवधि.
ऑनलाइन एक्सप्लेनर सेशन्स
15 - 16 जून 2026
इसरो वैज्ञानिकों द्वारा विभिन्न प्रॉब्लम स्टेटमेंट्स को समझाने के लिए ऑनलाइन सत्र.
शॉर्टलिस्टेड टीमों की घोषणा
20 जुलाई 2026
समीक्षा के बाद अगले दौर के लिए चुनी गई टीमों की अंतिम सूची जारी होगी.
इंडक्शन सेशन
21 जुलाई 2026
चुनी गई टीमों के लिए आधिकारिक इंडक्शन और ब्रीफिंग सत्र का आयोजन.
ग्रैंड फिनाले
6 - 7 अगस्त 2026
दो दिवसीय मुख्य मुकाबला जहां टीमें अपने फाइनल वर्किंग मॉडल और समाधान पेश करेंगी.
इच्छुक छात्र इस प्रतियोगिता से जुड़ी अधिक जानकारी और ऑनलाइन आवेदन के लिए सीधे इसरो के आधिकारिक पोर्टल isro.gov.in पर जा सकते हैं.