Delimitation: परिसीमन 'राजनीतिक नोटबंदी' साबित होगा, इसे महिला आरक्षण से न जोड़ें: लोकसभा में शशि थरूर की चेतावनी
शशि थरूर (Photo Credits: IANS)

नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने शुक्रवार को लोकसभा में प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की. उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि परिसीमन (Delimitation) का यह अभ्यास 'राजनीतिक नोटबंदी' (Political Demonetization) साबित हो सकता है. थरूर ने महिला आरक्षण (Women's Reservation) को परिसीमन से जोड़ने के सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे लोकतंत्र की आत्मा से जुड़ा विषय बताया. उन्होंने तर्क दिया कि महिला आरक्षण को वर्तमान संसदीय शक्ति के आधार पर तुरंत लागू किया जाना चाहिए, न कि इसे भविष्य की जनगणना और जटिल प्रशासनिक प्रक्रियाओं के भरोसे छोड़ना चाहिए. यह भी पढ़ें: Women Reservation Bill 2026: महिला आरक्षण बिल भारतीय राजनीति की 'दशा और दिशा' बदल देगा; प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Watch Video)

महिला आरक्षण को 'बंधक' बनाने का आरोप

थरूर ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि आज महिला आरक्षण के पक्ष में सभी दलों के बीच आम सहमति है, लेकिन सरकार ने इसे परिसीमन और जनगणना की शर्त से बांधकर जटिल बना दिया है. उन्होंने कहा, 'महिला आरक्षण की फसल कटाई के लिए तैयार है, लेकिन इसे परिसीमन से जोड़ना भारतीय महिलाओं की आकांक्षाओं को देश के सबसे विवादास्पद प्रशासनिक अभ्यासों में से एक का बंधक बनाने जैसा है.'

उनके अनुसार, यह केवल नक्शों को फिर से खींचने का काम नहीं है, बल्कि राजनीतिक शक्ति के संतुलन में एक गहरा बदलाव है, जो हमारे संघवाद के ताने-बाने को तनावपूर्ण बना सकता है.

'राजनीतिक नोटबंदी' का डर

सरकार पर निशाना साधते हुए थरूर ने नोटबंदी का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा, 'आपने परिसीमन का प्रस्ताव उसी जल्दबाजी में पेश किया है जैसी नोटबंदी के समय दिखाई गई थी. हम सभी जानते हैं कि उस फैसले से देश को कितना नुकसान हुआ था. परिसीमन भी एक राजनीतिक नोटबंदी साबित होगा. ऐसा न करें.'

उन्होंने जोर देकर कहा कि इस विषय पर व्यापक विचार-विमर्श की आवश्यकता है क्योंकि यह राज्यों के बीच शक्ति संतुलन को सीधे प्रभावित करेगा. यह भी पढ़ें: Parliament Special Session 2026: महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयकों पर कल शाम 4 बजे होगी वोटिंग, सदन में 18 घंटे चलेगी चर्चा

दक्षिण बनाम उत्तर भारत का मुद्दा

थरूर ने क्षेत्रीय चिंताओं को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि परिसीमन उन राज्यों के साथ अन्याय कर सकता है जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण के राष्ट्रीय लक्ष्यों को सफलतापूर्वक लागू किया है.

  • दक्षिण भारत की चिंता: तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण और मानव विकास में निवेश किया है. थरूर का तर्क है कि यदि नए जनसंख्या आंकड़ों पर परिसीमन होता है, तो उत्तर भारत के उन राज्यों को अधिक राजनीतिक महत्व (सीटें) मिलेगा जो जनसंख्या रोकने में विफल रहे हैं.
  • विकास की सजा: उन्होंने सवाल किया कि क्या हम यह संदेश देना चाहते हैं कि शासन में उत्कृष्टता (Governance Excellence) राजनीतिक अप्रासंगिकता की ओर ले जाती है?

आर्थिक संतुलन और राज्यों की आवाज

शशि थरूर ने आर्थिक दृष्टिकोण से भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि दक्षिण के राज्य देश की अर्थव्यवस्था के इंजन हैं और राष्ट्रीय कोष में उनके योगदान के मुकाबले उन्हें कम धन प्राप्त होता है.  परिसीमन के बाद संसद में इन राज्यों की आवाज और अधिक हाशिए पर चली जाएगी. उन्होंने चेतावनी दी कि इससे 'लोकतांत्रिक बहुमत की तानाशाही' (Tyranny of the democratic majority) पैदा होने का खतरा है, जो देश की एकता के लिए शुभ संकेत नहीं है.