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Crackers Banned: उत्तर प्रदेश में पटाखा प्रतिबंधित होने से व्यापारी परेशान

उत्तर प्रदेश में पटाखों की बिक्री प्रदूषण के बारे में जागरूकता, जारी महामारी और गैर-ग्रीन पटाखों पर सरकार के प्रतिबंध से बुरी तरह प्रभावित हुई है. लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज और अन्य प्रमुख शहरों में पटाखे बेचने वाली दुकानें पिछले वर्षों की तुलना में कम हैं.

Crackers Banned: उत्तर प्रदेश में पटाखा प्रतिबंधित होने से व्यापारी परेशान
पटाखे (Photo Credits: ANI)

लखनऊ, 2 नवंबर : उत्तर प्रदेश में पटाखों की बिक्री प्रदूषण के बारे में जागरूकता, जारी महामारी और गैर-ग्रीन पटाखों पर सरकार के प्रतिबंध से बुरी तरह प्रभावित हुई है. लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज और अन्य प्रमुख शहरों में पटाखे बेचने वाली दुकानें पिछले वर्षों की तुलना में कम हैं. पिछले 19 वर्षों से पटाखे बेच रहे अजमल ने कहा, "पुलिस द्वारा बहुत सारे प्रतिबंध हैं, जिनका दुरुपयोग किया जा रहा है. हम नहीं जानते कि कौन सा ग्रीन पटाखा है और कौन सा नहीं. पुलिस हमें परेशान करती है और पैसे वसूलती है. इसके अलावा, सरकार ने कहा है कि पटाखों की दुकानें खुली जगहों पर ही लगनी चाहिए. जब तक बाजार क्षेत्र में आपकी दुकान नहीं होगी, वहां पटाखा खरीदने कौन आएगा?"

उन्होंने कहा कि व्यापार में उनके अधिकांश सहयोगियों ने इस साल पटाखों की दुकानें नहीं लगाने का फैसला किया. राज्य की राजधानी में पहले औसतन लगभग 1,500 पटाखों की दुकानें हुआ करती थीं, लेकिन इस साल यह संख्या घटकर 500 रह गई है. अधिकांश दुकानों ने ट्रांस-गोमती क्षेत्र में अनुमति मांगी है, जो उत्तरी क्षेत्र के अंतर्गत आता है. एडीसीपी उत्तर प्राची सिंह ने बताया कि सोमवार रात तक 185 दुकानों ने पटाखे बेचने की अनुमति मांगी थी. संयुक्त पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था पीयूष मोर्डिया ने बताया कि दुकानदारों को एक खिड़की से तीन दिन का अस्थायी परमिट जारी किया गया है. मोर्डिया ने कहा, "हमने स्पष्ट रूप से कहा है कि केवल हरे पटाखे ही बेचे जाने चाहिए, परिसर में अग्नि सुरक्षा के प्रावधान होने चाहिए और पटाखों की ध्वनि 110 डेसिबल से अधिक नहीं होनी चाहिए." यह भी पढ़ें : जेएनयू में नौ केंद्र प्रमुखों की नियुक्ति का फैसला कुलपति ने बिना अधिकार के लिया: अदालत

प्रयागराज में आपूर्ति के साथ-साथ मांग में कमी के कारण पटाखों की दुकानों की संख्या भी कम हो गई है और दरियागंज क्षेत्र में दो दुकानें लगाने वाले तौफीक खान अब इसकी जगह मौसमी फल बेच रहे हैं. उन्होंने कहा, "कोविड के बाद के समय में सांस की समस्या के कारण ग्राहक पटाखे खरीदने से सावधान हैं और लॉकडाउन के कारण आपूर्ति भी प्रभावित हुई है." कानपुर में सुनील कुमार ने कहा, "पटाखा व्यवसाय अब लाभहीन है, इसलिए मरे हुए घोड़े को कोड़े मारने के बजाय स्विच करना बेहतर है. भले ही शादी का मौसम नजदीक है, लोग पटाखों के लिए लेजर शो पसंद कर रहे हैं." लखनऊ में फायरवर्क्‍स डीलर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा, "दिवाली के लिए शायद ही कोई समय बचा है और सरकार ने अभी तक पटाखों की बिक्री और खरीद के संबंध में दिशानिर्देश जारी नहीं किए हैं. ऐसे में व्यापारियों को इसमें निवेश करने का डर है."

(The above story first appeared on LatestLY on Nov 03, 2021 02:08 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).