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Cough Syrup Controversy: राजस्थान चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने प्रतिबंधित कफ सिरप देने पर डॉक्टर और फार्मासिस्ट निलंबित

राजस्थान चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने सीकर जिले के हाथीडह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के एक डॉक्टर और एक फार्मासिस्ट को निलंबित करने की कार्रवाई शुरू की है. इन दोनों ने एक बच्चे को प्रतिबंधित कफ सिरप दी थी. हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि हाल ही में भरतपुर और सीकर में दो बच्चों की मृत्यु के मामलों में डॉक्टरों ने डेक्सट्रोमेथॉर्फन कफ सिरप नहीं दिया था.

Cough Syrup Controversy: राजस्थान चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने प्रतिबंधित कफ सिरप देने पर डॉक्टर और फार्मासिस्ट निलंबित
(Photo Credits Pixabay/Rep)

जयपुर, 2 अक्टूबर : राजस्थान चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने सीकर जिले के हाथीडह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के एक डॉक्टर और एक फार्मासिस्ट को निलंबित करने की कार्रवाई शुरू की है. इन दोनों ने एक बच्चे को प्रतिबंधित कफ सिरप दी थी. हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि हाल ही में भरतपुर और सीकर में दो बच्चों की मृत्यु के मामलों में डॉक्टरों ने डेक्सट्रोमेथॉर्फन कफ सिरप नहीं दिया था. राज्य सरकार के अधिकारियों ने कहा कि चिकित्सा और स्वास्थ्य विभाग ने मुफ्त दवा योजना के तहत बांटे गए कफ सिरप की गुणवत्ता को लेकर मिली शिकायतों को गंभीरता से लिया है.

हाल की खबरों को स्पष्ट करते हुए, अधिकारियों ने पुष्टि की कि भरतपुर और सीकर में दो बच्चों की मौत के मामलों में डॉक्टरों ने डेक्सट्रोमेथॉर्फन सिरप नहीं दिया था. हालांकि, सीकर जिले के हाथीडह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एक अन्य इकाई के डॉक्टर और फार्मासिस्ट के खिलाफ एक बच्चे को प्रतिबंधित कफ सिरप देने के लिए निलंबन की कार्रवाई शुरू की गई है. स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने बच्चों की मौत की खबरों के बाद, जो कथित तौर पर कफ सिरप के सेवन से हुई थीं, तुरंत जांच के आदेश दिए थे. इसके बाद, राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आरएमएससीएल) ने संबंधित कफ सिरप के उपयोग और वितरण पर प्रतिबंध लगा दिया और जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की. दवा के नमूने राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशाला भेजे गए हैं. यह भी पढ़ें : राजस्थान: जयपुर के कई इलाकों में बारिश, शुक्रवार के लिए अलर्ट जारी

अधिकारियों ने गुरुवार को साफ किया कि सिरप की वजह से कोई मौत नहीं हुई. भरतपुर के कालसाडा निवासी 30 वर्षीय मोनू जोशी 25 सितंबर को खांसी, सर्दी और बुखार की शिकायत लेकर कालसाडा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गए. डॉक्टर ने उन्हें डेक्सट्रोमेथोरफैन हाइड्रोब्रोमाइड सिरप और अन्य दवाएं दीं. बाद में, मोनू ने बिना डॉक्टर की सलाह के यह सिरप अपने तीन साल के बेटे गगन को दे दिया, जब उसे सर्दी और निमोनिया हुआ. गगन की हालत बिगड़ने पर उसे महुआ के डॉ. अशोक जैन के पास ले जाया गया, जिन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए उसे जयपुर के जेके लोन अस्पताल रेफर कर दिया. गगन को 25 सितंबर को दोपहर 2 बजे वहां भर्ती कराया गया और सुधार के बाद 27 सितंबर को छुट्टी दे दी गई.

इसी तरह, 1 अक्टूबर को प्रकाशित समाचार, जिसमें तीन भाई-बहनों द्वारा कफ सिरप पीने और एक की मृत्यु होने की बात कही गई थी, के संबंध में तथ्य यह है कि 18 सितम्बर को 50 वर्षीय नहनी मलाह स्थित उपकेन्द्र में जांच के लिए गई थी और उसे उपकेन्द्र स्तर पर उपलब्ध पीसीएम दवा दी गई थी जिस बच्चे की मौत की खबर आई है, वह पहले से ही निमोनिया से पीड़ित था और उसे भरतपुर से जयपुर रेफर किया गया था. सम्राट की 22 सितंबर को मृत्यु हो गई. सीकर के खोरी गांव के महेश कुमार शर्मा के बेटे नित्यांश की मौत के मामले में, बच्चे की 7 जुलाई को झुंझुनू के चिराना स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बुखार और सर्दी की शिकायत के बाद जांच की गई थी. पर्चे में डेक्सट्रोमेथॉर्फन सिरप का जिक्र नहीं था.

उसकी मां खुशबू शर्मा के अनुसार, 28 सितंबर की रात लगभग 9 बजे बच्चे को हल्की खांसी हुई. उन्होंने उसे घर पर पहले से मौजूद 5 मिली डेक्सट्रोमेथॉर्फन सिरप दिया. 29 सितंबर की रात 2 बजे बच्चे ने पानी पिया और सो गया. उस समय वह ठीक लग रहा था. लेकिन, सुबह 5 बजे जब बच्चे की मां उठी तो बच्चा बेहोश था. उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. भरतपुर और सीकर दोनों मामलों में डॉक्टरों द्वारा डेक्सट्रोमेथॉर्फन सिरप निर्धारित नहीं किया गया था.

(The above story first appeared on LatestLY on Oct 03, 2025 08:37 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).