Employees’ Provident Fund Organisation (EPFO) के नए नियमों को लेकर देशभर में नाराजगी बढ़ रही है. खासतौर पर वेतनभोगी वर्ग इन नियमों को लेकर नाराज है. इसी बीच साकेत गोखले (Saket Gokhale) ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है और इन नियमों को खुली चोरी बताया है. टीएमसी सांसद साकेत गोखले ने इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि यह नियम मध्यमवर्गीय कर्मचारियों को सजा देने जैसा है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा. “नए ईपीएफओ नियम चौंकाने वाले और हास्यास्पद हैं. यह वेतनभोगी लोगों के अपने पैसों की खुली चोरी है.” उन्होंने यह भी कहा कि सरकार बेरोजगारी की बढ़ती समस्या से घबराई हुई है और इसी वजह से ऐसे कठोर कदम उठाए जा रहे हैं.
क्या हैं ईपीएफओ के नए नियम?
केंद्र सरकार ने हाल ही में ईपीएफ (EPF) निकासी से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है. पहले जहां कोई भी कर्मचारी 2 महीने की बेरोजगारी के बाद अपना पीएफ निकाल सकता था, अब इसके लिए न्यूनतम 1 साल की बेरोजगारी जरूरी होगी. इतना ही नहीं, पेंशन से जुड़ी राशि अब केवल 36 महीने की बेरोजगारी के बाद ही निकाली जा सकेगी. इसके अलावा, कर्मचारी के ईपीएफ बैलेंस का 25% हिस्सा रिटायरमेंट तक लॉक रहेगा यानी वह इसे बीच में निकाल नहीं सकेगा.
साकेत गोखले ने PF निकासी के नए नियम को लेकर मोदी सरकार की आलोचना की
The new EPFO rules introduced by the Modi Govt are SHOCKING AND RIDICULOUS. It is open THEFT of salaried people's own money.
Here's what the new rules say:
👉 Earlier, on losing your job, you could withdraw your EPF balance after 2 months of employment. That minimum period has…
— Saket Gokhale MP (@SaketGokhale) October 15, 2025
क्यों बढ़ी है नाराजगी?
वेतनभोगी कर्मचारी ईपीएफ को अपनी बचत और सुरक्षा का अहम साधन मानते हैं. किसी भी आर्थिक संकट या नौकरी छूटने की स्थिति में यह राशि उनके लिए राहत बनती है. लेकिन अब 1 साल की बेरोजगारी की शर्त से यह सुविधा कई लोगों के लिए मुश्किल बन जाएगी. नए नियमों से वेतनभोगी वर्ग में आक्रोश है. कई संगठनों और कर्मचारियों ने सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है.
सरकार का उद्देश्य क्या बताया जा रहा है?
हालांकि सरकार की ओर से इन नियमों को लेकर विस्तृत स्पष्टीकरण अभी नहीं आया है, लेकिन माना जा रहा है कि इसका उद्देश्य लंबी अवधि तक बचत को बनाए रखना और रिटायरमेंट फंड को सुरक्षित रखना है.













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