पुराने भाजपा परिवारों के वंशज और सिंधिया के वफादारों की वापसी से कांग्रेस को बढ़त मिलने की संभावना
कांग्रेस ने अपने राजनीतिक भविष्य को सुरक्षित करने के लिए विधानसभा चुनाव से पहले सत्तारूढ़ भाजपा से आए कम से कम आठ उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है. उनमें से तीन ने 'घर-वापसी' की, वे मार्च 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थन में भगवा पार्टी में शामिल हो गए थे.
भोपाल, 19 नवंबर : कांग्रेस ने अपने राजनीतिक भविष्य को सुरक्षित करने के लिए विधानसभा चुनाव से पहले सत्तारूढ़ भाजपा से आए कम से कम आठ उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है. उनमें से तीन ने 'घर-वापसी' की, वे मार्च 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थन में भगवा पार्टी में शामिल हो गए थे.
इनमें से अधिकांश दलबदलुओं का राजनीति में मजबूत आधार और जीतने की क्षमता है, शायद यही मुख्य कारण था कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रमुख कमलनाथ, जिन्होंने खुद उम्मीदवारों का चयन किया, उन्हें पार्टी का उम्मीदवार बनाया. भाजपा के पूर्व मंत्री दीपक जोशी इस साल मई में कांग्रेस में शामिल हुए और वह देवास जिले में अपने गृह क्षेत्र खातेगांव से चुनाव लड़ रहे हैं. जोशी का कांग्रेस में जाना भाजपा के लिए पहला बड़ा झटका था, क्योंकि वह पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी के बेटे हैं. यह भी पढ़ें : सचिन तेंदुलकर ने विरोट कोहली के लिए मैदान में भिजवाया खास संदेश, क्रिकेट के ‘भगवान’ ने दी नीली जर्सी
बागली (2003, 2008) और हाटपिपलिया (2013) से तीन विधानसभा चुनाव जीतने वाले जोशी ने शिवराज सिंह चौहान के मंत्रिमंडल में तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास और स्कूल शिक्षा मंत्री के रूप में भी काम किया. उनके पिता कैलाश जोशी, मध्य प्रदेश के नौवें मुख्यमंत्री (24 जून 1977 से 18 जनवरी 1978) थे, जब वह जनता पार्टी के सदस्य थे. मुंगावली विधानसभा सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार राव यादवेंद्र सिंह यादव तीन बार के भाजपा विधायक राव देशराज सिंह यादव के बेटे हैं. जोशी परिवार की तरह देशराज भी जनसंघ से जुड़े रहे हैं. वह बीजेपी के बृजेंद्र सिंह यादव के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं.
सिंधिया के वफादार वैद्यनाथ यादव, जो मार्च 2020 में भाजपा में शामिल हो गए थे, ने चुनाव से पहले अपनी 'घर-वापसी' की. उन्हें राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह के कारण फिर से कांग्रेस में शामिल कर लिया गया, ताकि सिंधिया पर सेंध लगाई जा सके और साथ ही भाजपा के महेंद्र यादव के खिलाफ एक मजबूत उम्मीदवार खड़ा किया जा सके, जो सिंधिया के करीबी भी माने जाते हैं. एक और सिंधिया वफादार, जिन्होंने 'घर-वापसी' की और कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं, नीरज शर्मा हैं. कांग्रेस ने उन्हें सागर जिले की सुरखी विधानसभा सीट से राज्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के खिलाफ मैदान में उतारा है.
बालाघाट जिले के एक प्रमुख राजनीतिक चेहरे, पूर्व भाजपा सांसद बोध सिंह भगत ने भगवा पार्टी छोड़ दी है और कटंगी से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं. कांग्रेस ने होशंगाबाद से पूर्व भाजपा विधायक गिरिजा शंकर शर्मा को उनके भाई और तीन बार के विधायक सीतासरन शर्मा के खिलाफ मैदान में उतारा है. शर्मा परिवार पिछले तीन दशकों से इस सीट पर जीत हासिल कर रहा है, इसलिए कांग्रेस से उनकी उम्मीदवारी ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है.
रीवा की सेमरिया सीट से बीजेपी के पूर्व विधायक अभय मिश्रा कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं. मिश्रा और उनकी पत्नी नीलम मिश्रा ने मिलकर 2008 और 2013 में इस विशेष सीट से दो विधानसभा चुनाव जीते हैं. भाजपा ने केवल एक उम्मीदवार सिद्धार्थ तिवारी को मैदान में उतारा है, जो पुराने कांग्रेस परिवार से हैं. वह रीवा की त्योंथर सीट से पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्रीनिवास तिवारी के पोते हैं और ब्राह्मण चेहरा होने के कारण उनकी स्थिति मजबूत बताई जा रही है. उनके पिता सुंदरलाल तिवारी भी पूर्व लोकसभा सांसद थे. अपने पारिवारिक बैकग्राउंड के चलते सिद्धार्थ की स्थिति काफी मजबूत बताई जा रही है.
(The above story first appeared on LatestLY on Nov 19, 2023 02:12 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

