Pune  Shocker: 2 साल के मासूम ने गलती से पी लिया एसिड, गंभीर रूप से घायल बच्चे को हॉस्पिटल में किया एडमिट, पुणे के डॉक्टरों ने बचाई बच्चे की जान
Child drank acid (Photo Credits Twitter)

Pune  News: पुणे के डॉक्टरों ने समय पर इलाज और सतर्क मेडिकल देखभाल से एक दो वर्षीय बच्चे (Two-Year-Old Child) को नई जिंदगी दी है. गलती से एसिटिक एसिड (Acetic Acid) पी लेने के बाद बच्चे की हालत बेहद गंभीर हो गई थी, लेकिन सही समय पर इलाज मिलने से उसकी जान बचा ली गई.यह दर्दनाक घटना बाल दिवस (Children’s Day) के दिन सामने आई, जब सातारा के रहने वाले इस मासूम ने अनजाने में घर में रखे कॉर्रोसिव केमिकल (Corrosive Chemical) को पानी समझकर पी लिया.

एसिड एक पानी की बोतल (Water Bottle) में रखा हुआ था, जिससे बच्चे के होंठ, मुंह, फूड पाइप (Food Pipe) के साथ-साथ सीना और जांघ (Chest and Groin) बुरी तरह झुलस गए.ये भी पढ़े:Ghaziabad Shocker: महिला ने ऑटो में जुड़वां बच्चों को दिया जन्म, स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही आई सामने; देखें VIDEO

सांस लेने में तकलीफ

एसिड पीते ही बच्चे को तेज दर्द हुआ और वह सांस के लिए हांफने (Breathing Difficulty) लगा. माता-पिता घबराहट में कुछ समझ नहीं पा रहे थे कि अचानक उनका खेलता-कूदता बच्चा इतनी गंभीर स्थिति में कैसे पहुंच गया.बच्चे को तुरंत सातारा अस्पताल (Satara Hospital) ले जाया गया, जहां डॉक्टर घोरपड़े ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए उसे प्राथमिक रूप से स्थिर किया और बिना देरी किए हायर पेडियाट्रिक केयर (Higher Pediatric Care) के लिए रेफर किया.इसके बाद पुणे के अंकुरा हॉस्पिटल (Ankura Hospital, Pune) की विशेष टीम सातारा पहुंची. बच्चे को वेंटिलेटर सपोर्ट (Ventilator Support) पर रखते हुए एक स्पेशलाइज्ड एम्बुलेंस (Specialised Ambulance) से सुरक्षित पुणे लाया गया.

पीआईसीयू टीम ने संभाला मोर्चा

पुणे पहुंचने के बाद डॉ. मिलिंद जांबगी (Dr Milind Jambagi) और पेडियाट्रिक आईसीयू टीम (PICU Team) ने बच्चे का इलाज शुरू किया. तत्काल एंडोस्कोपी (Endoscopy) की गई, जिसमें फूड पाइप में गंभीर केमिकल चोटें पाई गईं, हालांकि राहत की बात यह रही कि परफोरेशन (Perforation) नहीं हुआ था.डॉक्टरों ने बताया कि बच्चे के शरीर पर मौजूद केमिकल बर्न्स (Chemical Burns) का विशेष ड्रेसिंग और दवाओं से इलाज किया गया ताकि संक्रमण (Infection) न हो. साथ ही सांस की नली, पोषण और घावों की 24x7 निगरानी (Round-the-Clock Monitoring) की गई.

एक हफ्ते में दिखा चमत्कारी सुधार

धीरे-धीरे बच्चे की हालत में सुधार होने लगा. पहले फीडिंग ट्यूब (Feeding Tube) से खाना शुरू कराया गया और बाद में मुंह से खिलाना संभव हुआ. कुछ दिनों बाद बच्चे को वेंटिलेटर से हटाया गया और एक हफ्ते (One Week) में उसे हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी गई.

पेरेंट्स के लिए डॉक्टरों की चेतावनी

डॉ. जांबगी ने माता-पिता से अपील की कि घरेलू केमिकल्स (Household Chemicals), दवाइयां और नुकीली चीजें बच्चों की पहुंच से दूर रखें. खासतौर पर पांच साल से कम उम्र (Below Five Years) के बच्चों में ऐसी दुर्घटनाएं बेहद खतरनाक हो सकती हैं.

मां की भावुक प्रतिक्रिया

बच्चे की मां ने कहा कि अपने बेटे को दर्द से तड़पते देखना उनके जीवन का सबसे डरावना पल था. डॉक्टरों और नर्सों की टीम ने जिस तरह बच्चे की देखभाल की, वह उनके लिए किसी चमत्कार (Miracle) से कम नहीं था. उन्होंने पुणे के डॉक्टरों को अपने बच्चे को दूसरी जिंदगी (Second Chance at Life) देने के लिए धन्यवाद दिया.