नई दिल्ली, 29 अप्रैल: भारत ने अपनी 16वीं जनगणना (Census 2027) के साथ एक ऐतिहासिक डिजिटल युग में कदम रखा है. 'डिजिटल इंडिया' (Digital India) की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए सरकार ने 'सेल्फ-एन्युमरेशन' (Self-Enumeration) की सुविधा शुरू की है. इसके तहत नागरिक घर-घर आने वाले प्रगणक (Enumerator) के पहुंचने से पहले ही अपने परिवार और आवास का विवरण ऑनलाइन जमा कर सकते हैं. इस सप्ताह राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Droupadi Murmu) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने स्वयं अपनी जानकारी पोर्टल पर दर्ज कर इस अभियान का शुभारंभ किया. यह भी पढ़ें: Caste Based Census: मार्च 2027 से शुरू होगी जातीय जनगणना, दो चरणों पूरा करने की तैयारी; जानिए क्या होगा खास
प्रमुख राज्यों का शेड्यूल: 1 मई से महाराष्ट्र में शुरुआत
जनगणना का यह पहला चरण (House Listing) अलग-अलग राज्यों में चरणों में आयोजित किया जा रहा है. कर्नाटक और ओडिशा जैसे राज्यों में प्रक्रिया शुरू होने के बाद, अब 1 मई से 15 मई तक महाराष्ट्र, राजस्थान, झारखंड और दिल्ली (MCD क्षेत्र) में सेल्फ-एन्युमरेशन की खिड़की खुलने जा रही है.
- मध्य प्रदेश और हरियाणा: 16 अप्रैल से 30 अप्रैल तक (प्रक्रिया जारी).
- उत्तर प्रदेश: 7 मई से 21 मई तक.
- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख: 17 मई से 31 मई तक.
सेल्फ-एन्युमरेशन: ऑनलाइन पंजीकरण कैसे करें?
नागरिक आधिकारिक पोर्टल se.census.gov.in पर जाकर 16 विभिन्न भाषाओं में अपनी जानकारी भर सकते हैं. इसकी प्रक्रिया बेहद सरल है:
- पंजीकरण: अपने मोबाइल नंबर के जरिए लॉग-इन करें और ओटीपी (OTP) से वेरिफिकेशन पूरा करें.
- आवास विवरण: घर के निर्माण की सामग्री (फर्श, दीवार, छत) और मकान की स्थिति की जानकारी दें.
- सुविधाएं और संपत्ति: पीने के पानी, बिजली, ईंधन के प्रकार के साथ-साथ स्मार्टफोन, वाहन और इंटरनेट जैसी संपत्तियों का विवरण दर्ज करें.
- सबमिशन: जानकारी जमा करने के बाद आपको एक 11 अंकों का 'सेल्फ-एन्युमरेशन आईडी' (SE ID) प्राप्त होगा। इसे सुरक्षित रखें.
क्या ऑनलाइन फॉर्म भरने के बाद प्रगणक घर नहीं आएंगे?
ऑनलाइन डेटा जमा करने का मतलब यह नहीं है कि प्रगणक आपके घर नहीं आएंगे. जब प्रगणक आपके घर पहुंचेंगे, तो आपको उन्हें केवल अपना SE ID दिखाना होगा. वे अपने डिवाइस पर आपकी भरी हुई जानकारी को सत्यापित (Verify) करेंगे, जिससे आपका और उनका—दोनों का समय बचेगा. जो लोग ऑनलाइन फॉर्म नहीं भरेंगे, उनका डेटा प्रगणक पारंपरिक तरीके से घर आकर ही दर्ज करेंगे. यह भी पढ़ें: भारत: डिजिटल जनगणना के डेटा का राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल का सता रहा डर
डिजिटल जनगणना के लाभ
सरकार का लक्ष्य इस पेपरलेस प्रक्रिया के जरिए अधिक सटीक और त्वरित जनसांख्यिकीय डेटा प्राप्त करना है. जनगणना 2027 के दूसरे चरण (Population Enumeration) में फरवरी 2027 के दौरान जाति आधारित जनगणना भी की जाएगी, जो 1931 के बाद पहली बार होगी. यह डेटा भविष्य की लोक कल्याणकारी नीतियों और संसाधन आवंटन के लिए आधार बनेगा.













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