नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (Central Board of Secondary Education) यानी सीबीएसई (CBSE) ने गुरुवार को एक आधिकारिक एडवाइजरी (Official Advisory) जारी कर प्रश्नपत्रों पर प्रिंटेड क्यूआर (QR) कोड को लेकर फैल रही भ्रामक सूचनाओं पर स्थिति स्पष्ट की है. बोर्ड ने साफ तौर पर कहा है कि ये कोड उसकी आंतरिक प्रणाली का हिस्सा हैं और इन्हें किसी इंटरनेट हाइपरलिंक के रूप में इस्तेमाल करने के लिए नहीं बनाया गया है. बोर्ड ने छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों को ऐसी किसी भी अपुष्ट जानकारी पर विश्वास न करने की सलाह दी है जो बोर्ड की छवि खराब करने के उद्देश्य से फैलाई जा रही हो. यह भी पढ़ें: CBSE Result 2026: जल्द खत्म होगा इंतजार, अप्रैल-मई के बीच घोषित हो सकते हैं सीबीएसई बोर्ड की 10वीं और 12वीं के नतीजे
QR कोड का वास्तविक उद्देश्य
सीबीएसई ने अपनी एडवाइजरी में विस्तार से बताया कि ये कोड प्रमाणीकरण (Authentication), ट्रैकिंग और परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं. बोर्ड के अनुसार, स्कैन करने पर ये कोड किसी वेबसाइट के लिंक के रूप में नहीं खुलते, बल्कि केवल निर्धारित टेक्स्ट (Text) दिखाते हैं. हालांकि, यदि कोई उपयोगकर्ता उस टेक्स्ट को गूगल पर सर्च करता है, तो सर्च इंजन एल्गोरिदम के आधार पर कुछ अन्य शब्द सुझा सकता है, जो अक्सर भ्रम की स्थिति पैदा करते हैं.
एल्गोरिदम आधारित परिणामों से भ्रम
परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने चेतावनी दी है कि कुछ तत्व जानबूझकर गूगल सर्च के परिणामों को गलत तरीके से पेश कर रहे हैं ताकि बोर्ड की विश्वसनीयता को कम किया जा सके. बोर्ड ने स्पष्ट किया कि जब उपयोगकर्ता इन कोड्स को ऑनलाइन सर्च करने की कोशिश करते हैं, तो सर्च इंजन कई बार किसी व्यक्ति या संस्था के असंबद्ध परिणाम दिखा देता है. ये परिणाम पूरी तरह से एल्गोरिदम संचालित होते हैं और इनका सीबीएसई या उसकी परीक्षा प्रक्रिया से कोई लेना-देना नहीं है.
भ्रामक जानकारी न फैलाने की अपील
बोर्ड ने सभी हितधारकों, विशेषकर मीडिया प्लेटफॉर्म्स और शिक्षकों से सावधानी बरतने का आग्रह किया है. एडवाइजरी में कहा गया है कि किसी भी दावे को साझा करने से पहले सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट या सूचनाओं के माध्यम से तथ्यों की पुष्टि कर लेनी चाहिए. बोर्ड ने चेतावनी दी है कि संस्थागत साख को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी सामग्री को बढ़ावा न दें.
शिक्षकों के लिए पूर्व में जारी चेतावनी
इससे पहले, सीबीएसई ने कक्षा 10वीं और 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में लगे शिक्षकों को भी सख्त निर्देश दिए थे. बोर्ड ने देखा था कि कुछ मूल्यांकनकर्ता सोशल मीडिया पर अपनी राय और अनुभव साझा कर रहे हैं, जिससे छात्रों के बीच भ्रम और अफवाहें फैल सकती हैं. ऐसे मामलों में शामिल शिक्षकों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की बात कही गई है.
सीबीएसई ने अंत में जोर देते हुए कहा कि सार्वजनिक संस्थानों की अखंडता बनाए रखने के लिए सूचनाओं को जिम्मेदारी से साझा करना अत्यंत आवश्यक है.













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