Caste Census 2025: केंद्र सरकार ने देश में जातिगत जनगणना कराने का ऐलान कर दिया है. यह फैसला देश की सामाजिक संरचना को बेहतर ढंग से समझने और नीतिगत निर्णयों को अधिक समावेशी बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है. खास बात यह है कि इस बार जनगणना में केवल हिंदू समाज की ही नहीं, बल्कि मुस्लिम समुदाय की जातियों को भी दर्ज किया जाएगा.
मुस्लिमों की भी दर्ज होगी जाति
सरकारी सूत्रों के अनुसार, मुस्लिम समुदाय के भीतर भी विभिन्न जातियाँ और उपजातियाँ मौजूद हैं, जिनकी जानकारी अब तक जनगणना दस्तावेजों में शामिल नहीं की जाती थी. इस बार धर्म के साथ-साथ जाति का कॉलम हर नागरिक के लिए अनिवार्य होगा. हालांकि सरकार यह स्पष्ट कर चुकी है कि धर्म के आधार पर किसी भी प्रकार का आरक्षण नहीं दिया जाएगा.
गृह मंत्री अमित शाह ने पहले भी स्पष्ट शब्दों में कहा था कि संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण की अनुमति नहीं देता, और बीजेपी इस नीति पर अडिग रहेगी.
तीन महीने में शुरू होगी जनगणना
सूत्रों की मानें तो जातिगत जनगणना का काम अगले दो से तीन महीनों के भीतर शुरू किया जाएगा. इसके लिए सरकार अधिकारियों को डेपुटेशन पर तैनात करने की प्रक्रिया जल्द शुरू करेगी. इस बार डिजिटल तरीके, आधार और बायोमेट्रिक डाटा के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का भी इस्तेमाल किया जाएगा.
जनगणना की फील्ड प्रक्रिया करीब पंद्रह दिन में पूरी कर ली जाएगी, लेकिन आंकड़ों का विश्लेषण करने और रिपोर्ट तैयार करने में 1 से 2 साल का समय लग सकता है.
2029 चुनाव में महिला आरक्षण का लक्ष्य
केंद्र सरकार की रणनीति में जनगणना का एक अहम उद्देश्य 2029 लोकसभा चुनाव से पहले महिला आरक्षण लागू करना भी है. इसके लिए परिसीमन आवश्यक है, और परिसीमन के लिए जनगणना के अद्यतन आंकड़े चाहिए. इसी वजह से सरकार युद्ध स्तर पर जनगणना की तैयारियों में जुटी है.
बढ़ सकता है ओबीसी आरक्षण
जनगणना के जरिए जब ओबीसी समुदाय की सटीक जनसंख्या सामने आएगी, तब सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में मौजूदा 27% आरक्षण की सीमा बढ़ाने पर भी विचार हो सकता है. हालांकि जस्टिस रोहिणी कमीशन की रिपोर्ट पर अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, लेकिन आने वाले समय में सरकार इस पर निर्णय ले सकती है.
विपक्ष की भूमिका और राजनीतिक बहस
जातिगत जनगणना के बाद परिसीमन को लेकर उत्तर बनाम दक्षिण की बहस तेज हो सकती है, खासकर विपक्षी INDIA गठबंधन के दलों के बीच. सरकार सभी राजनीतिक दलों से बातचीत कर जनगणना के तौर-तरीकों को अंतिम रूप देने की कोशिश कर सकती है.
हालांकि निजी क्षेत्र में आरक्षण को लेकर सरकार अभी सावधानी भरा रुख अपनाए हुए है. पिछली यूपीए सरकार के समय भी निजी क्षेत्र में आरक्षण की मांग को प्राइवेट कंपनियों ने सिरे से खारिज कर दिया था.













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