भोपाल: गरबा में जाना है? पहले 'जय श्री राम' बोलें, फिर गोमूत्र का छिड़काव और गंगाजल का आचमन करें, किसने बनाया ने नियम?
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Bhopal, Garba Non-Hindu Entry: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में इस नवरात्रि, गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं का प्रवेश रोकने के लिए एक अनोखा तरीका अपनाया जा रहा है. आयोजकों ने एंट्री के लिए ऐसी शर्तें रखी हैं, जिन्हें वे 'धार्मिक शुद्धता' बनाए रखने का फॉर्मूला बता रहे हैं.

क्या है एंट्री का नया नियम?

भोपाल के अवधपुरी इलाके में श्री कृष्ण सेवा समिति गरबा मंडल ने प्रवेश के लिए कई स्तरों वाली एक प्रक्रिया बनाई है. गरबा पंडाल में घुसने से पहले हर व्यक्ति की जांच की जा रही है.

  1. सबसे पहले आधार कार्ड देखा जाता है.
  2. इसके बाद माथे पर तिलक लगाया जाता है और हाथ में कलावा बांधा जाता है.
  3. फिर, 'जय श्री राम' का जयकारा लगवाया जाता है.
  4. अगले चरण में, आम के पत्तों से गंगाजल पिलाया (आचमन कराया) जाता है.
  5. आखिर में, तांबे के लोटे से गोमूत्र का छिड़काव किया जाता है.

आयोजकों का मानना है कि इस प्रक्रिया से गैर-हिंदू खुद ही गरबा में आने से बचेंगे, क्योंकि वे गंगाजल और गोमूत्र का सेवन नहीं करेंगे. इस नियम के बिना किसी को भी पंडाल के अंदर जाने की इजाजत नहीं है.

लोगों और नेताओं की क्या है राय?

गरबा देखने आए कुछ लोगों ने इस कदम की तारीफ की है. उनका कहना है कि गंगाजल और गोमूत्र पवित्र हैं और यह एक अच्छी पहल है. इस नई गाइडलाइन ने गरबा के आयोजन को पूरी तरह से एक धार्मिक रंग दे दिया है.

इस मामले पर भोपाल के सांसद आलोक शर्मा ने भी अपनी बात रखी है. उन्होंने कहा, "कुछ लोग कलावा और तिलक जैसे हिंदू प्रतीकों का इस्तेमाल करके गरबा में घुसने की कोशिश करते हैं ताकि वे हिंदू महिलाओं को लुभा सकें." उन्होंने साफ किया कि राज्य सरकार ऐसी किसी भी हरकत को बर्दाश्त नहीं करेगी और नवरात्रि का त्योहार केवल हिंदुओं और सनातन धर्म को मानने वालों के लिए है.

गौरतलब है कि 22 सितंबर से नवरात्रि का त्योहार शुरू हो चुका है, जिसमें देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है. गरबा, जो मूल रूप से गुजरात का एक पारंपरिक नृत्य है, अब पूरे देश में नवरात्रि के दौरान बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है.