Bhavish Aggarwal: ओला इलेक्ट्रिक के CEO भाविश अग्रवाल के खिलाफ जमानती वारंट जारी, गोवा उपभोक्ता आयोग ने लिया सख्त एक्शन
भाविश अग्रवाल (Photo Credits: Wikimedia Commons)

मडगांव (गोवा): गोवा के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (District Consumer Disputes Redressal Commission of Goa) ने ओला इलेक्ट्रिक मोबिलिटी लिमिटेड (Ola Electric Mobility Ltd.) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) भाविश अग्रवाल (Bhavish Aggarwal) के खिलाफ एक सख्त कदम उठाते हुए जमानती वारंट (Bailable Warrant) जारी किया है. यह कार्रवाई एक ग्राहक की शिकायत पर सुनवाई के दौरान अग्रवाल के आयोग के समक्ष उपस्थित न होने के बाद की गई है. आयोग ने बेंगलुरु के कोरमंगला पुलिस स्टेशन (Koramangala Police Station) को निर्देश दिया है कि वह भाविश अग्रवाल को गिरफ्तार कर 23 फरवरी 2026 की सुबह 10:30 बजे आयोग के सामने पेश करे. यह भी पढ़ें: Bengaluru Shocker: ₹14.2 लाख की Tata Hexa SUV खरीद कर फंसा युवक, डीलर ने नहीं दिए डॉक्यूमेंट; कोर्ट कचहरी के चक्कर के बाद मिला इंसाफ

क्या है पूरा मामला?

यह मामला गोवा के एक निवासी प्रीतिश चंद्रकांत घाडी की शिकायत से जुड़ा है. घाडी ने ओला इलेक्ट्रिक से एक इलेक्ट्रिक बाइक खरीदी थी, जिसके लिए उन्होंने पूरी कीमत का भुगतान किया था. शिकायत के अनुसार, बाइक में खराबी आने के बाद उन्होंने उसे मरम्मत (रिपेयर) के लिए कंपनी के पास भेजा था. आरोप है कि कंपनी ने मरम्मत के बाद न तो बाइक वापस की और न ही ग्राहक को कोई संतोषजनक जवाब दिया. ग्राहक का दावा है कि उनकी बाइक अब 'लापता' है.

ओला इलेक्ट्रिक के CEO भाविश अग्रवाल के खिलाफ जमानती वारंट जारी

 

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आयोग की सख्त टिप्पणी और वारंट

आयोग ने इस मामले में स्पष्टीकरण के लिए 28 जनवरी, 2026 को एक नोटिस जारी किया था, जिसमें भाविश अग्रवाल को 4 फरवरी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया गया था.

निर्धारित तिथि पर अग्रवाल के अनुपस्थित रहने के बाद, आयोग ने कड़ा रुख अपनाया. आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यदि अग्रवाल 1.47 लाख रुपये का बेल बॉन्ड और इतनी ही राशि की मुचलका राशि (Surety) जमा करते हैं, तो उन्हें जमानत पर छोड़ा जा सकता है, बशर्ते वह अगली सुनवाई में अनिवार्य रूप से उपस्थित हों.

कानूनी प्रावधान (BNSS 2023)

आयोग ने यह वारंट भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 (BNSS 2023) की धारा 73 के तहत जारी किया है. यह नई धारा पूर्ववर्ती दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 71 के समकक्ष है. उपभोक्ता संरक्षण के मामलों में किसी बड़ी टेक कंपनी के शीर्ष अधिकारी के खिलाफ इस तरह का वारंट जारी होना एक दुर्लभ और गंभीर कानूनी कदम माना जा रहा है.

कंपनी की प्रतिक्रिया का इंतजार

ओला इलेक्ट्रिक और भाविश अग्रवाल की ओर से इस वारंट पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. पिछले कुछ समय से ओला इलेक्ट्रिक को अपनी सर्विस क्वालिटी और ग्राहकों की शिकायतों के प्रबंधन को लेकर सोशल मीडिया और विभिन्न उपभोक्ता मंचों पर आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है.