Ashok Kharat और सोहम नाइक के वायरल वीडियो, आखिर क्यों हो रही है इनकी तुलना एपस्टीन फाइल्स से?

Ashok Kharat and Soham Naik Viral Videos: पिछले कुछ हफ्तों में महाराष्ट्र और गोवा से सामने आए दो बड़े यौन शोषण मामलों ने पूरे देश का ध्यान खींचा है. नाशिक के स्वयंभू ज्योतिषी अशोक खरात और गोवा के सोहम नाइक से जुड़े इन मामलों को सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में 'भारत की एपस्टीन फाइल्स' (Epstein Files) कहा जा रहा है. इन मामलों में न केवल मासूमों के शोषण के आरोप हैं, बल्कि प्रभावशाली हस्तियों के शामिल होने की बात भी सामने आ रही है.

अशोक खरात के साम्राज्य और 100+ वीडियो का काला सच

67 वर्षीय पूर्व मर्चेंट नेवी अधिकारी अशोक खरात, जिसे 'कैप्टन' के नाम से भी जाना जाता है, को 18 मार्च, 2026 को नाशिक में गिरफ्तार किया गया. खरात पर आरोप है कि उसने आध्यात्मिक मार्गदर्शन और 'अघोरी' अनुष्ठानों के नाम पर महिलाओं को झांसे में लिया.  यह भी पढ़े: Ashok Kharat Scandal: ढोंगी बाबा अशोक खरात की एक और घिनौनी करतूत CCTV में कैद, मां के सामने बच्ची से दुर्व्यवहार का नया VIDEO आया सामने

एसआईटी (SIT) की जांच में खरात के पास से ऐसे उपकरण जब्त किए गए हैं जिनमें 100 से अधिक आपत्तिजनक वीडियो क्लिप मिले हैं. इन वीडियो में महिलाओं को नशीला पदार्थ देकर उनके शोषण की बात सामने आई है. इस मामले के राजनीतिक तार तब जुड़े जब महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर का खरात के साथ एक वीडियो वायरल हुआ, जिसके बाद उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा.

पॉलिटिकल इम्प्लिकेशन: विपक्षी नेता संजय राउत (सेना UBT) ने ‘एपस्टीन फाइल्स’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए दावा किया कि ये वीडियो कई ताकतवर लोगों को घेरते हैं और इससे राज्य सरकार अस्थिर हो सकती है.

संजय राउत ने क्या कहा

सोहम नाइक केस

महाराष्ट्र के साथ-साथ गोवा के करचोरम (Curchorem) में भी एक ऐसा ही मामला सामने आया है. 20 वर्षीय सोहम नाइक, जो एक स्थानीय नगर पार्षद का बेटा है, पर 25 से 30 नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण और उनके अश्लील वीडियो बनाने का आरोप है. 22 मार्च, 2026 को उसकी गिरफ्तारी के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है. आरोप है कि सोहम इन वीडियो को टेलीग्राम और व्हाट्सएप के जरिए फैलाता था और लड़कियों को ब्लैकमेल करता था.

सोहम नाइक के खिलाफ पुलिस ने POCSO एक्ट लगाया

क्यों हो रही है 'एपस्टीन फाइल्स' से तुलना?

अमेरिका के कुख्यात जेफरी एपस्टीन मामले की तरह ही इन दोनों मामलों में कुछ समानताएं देखी जा रही हैं:

  • सुनियोजित नेटवर्क: दोनों मामलों में बड़ी संख्या में पीड़ितों और उनके वीडियो का एक 'डेटाबेस' होने का दावा किया गया है.

  • सत्ता का संरक्षण: यह आरोप लगाए जा रहे हैं कि आरोपियों को राजनीतिक या प्रशासनिक रसूख वाले लोगों का संरक्षण प्राप्त था.

  • ब्लैकमेलिंग का हथियार: विपक्ष का दावा है कि इन वीडियो का इस्तेमाल प्रभावशाली लोगों को डराने या ब्लैकमेल करने के लिए किया जा सकता है.

सावधान

इन मामलों के ट्रेंड होने के साथ ही साइबर अपराधी भी सक्रिय हो गए हैं. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे X (ट्विटर), फेसबुक और इंस्टाग्राम पर 'Full Leaked Video' या 'CCTV Footage' के नाम से फर्जी लिंक शेयर किए जा रहे हैं.

सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ये लिंक अक्सर फिशिंग ट्रैप (Phishing Trap) होते हैं. इन पर क्लिक करने से आपका सोशल मीडिया अकाउंट हैक हो सकता है, आपके फोन में मालवेयर (Malware) आ सकता है या आपकी बैंकिंग जानकारी चोरी हो सकती है. पुलिस ने स्पष्ट किया है कि ऐसे सभी वीडियो साक्ष्य के तौर पर सील कर दिए गए हैं और सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध नहीं हैं.

वर्तमान स्थिति और जांच

फिलहाल एसआईटी अशोक खरात से किसी गुप्त स्थान पर पूछताछ कर रही है ताकि जांच की गोपनीयता बनी रहे. वहीं गोवा में सोहम नाइक के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदर्शन जारी हैं. दोनों ही मामलों में पुलिस अब उन 'बड़े नामों' की तलाश कर रही है जो इस काले खेल का हिस्सा हो सकते हैं.