साजिद अली की फिल्म 'लैला मजनू' ने दर्शाया है कि वास्तव में प्रेम किसे कहते हैं. आज के दौर में जहां लोग 'प्रेम' शब्द का असली मतलब भूलते जा रहे हैं, वहीं इस फिल्म ने एक सच्ची प्रेम कहानी को बयां किया है. सच्चा प्यार उसे ही कहा जाता है जब दो लोग एक दूसरे के साथ रहने के लिए कुछ भी कर सकते हैं, फिर चाहे उन्हें इसके लिए कितना भी लंबा इंतजार क्यों न करना हो. अगर हमारी राय पूछी जाए तो आप लोगों को इस खूबसूरत प्रेम कहानी को मिस नहीं करना चाहिए. कश्मीर की सुंदर वादियों के बीच फिल्माई गई लैला और कैस की कहानी आपके दिलों को जीतने में सफल होगी. इस फिल्म में 'लैला मजनू' की कहानी को मॉर्डन टच दिया गया है.
कहानी : - फिल्म की कहानी लैला (तृप्ति डिमरी) और कैस (अविनाश तिवारी) के बारे में हैं. धीरे-धीरे दोनों एक दूसरे के काफी करीब आ जाते हैं और दोनों को प्यार हो जाता है. कैस और लैला शादी भी करना चाहते हैं लेकिन दोनों के परिवारों के बीच पहले से ही अनबन चल रही होती हैं. दरअसल, लैला के पिता (परमीत सेठी) का मानना है कि कैस के पिता ने उनकी जमीन पर कब्ज़ा कर वहां होटल बनवाया है जबकि कैस के पिता का कहना होता है कि उन्होंने सरकार से उस जमीन को खरीदा है. इसी वजह से लैला और कैस की शादी नहीं हो पाती है. लैला की शादी इब्बान (सुमित कौल) से करवा दी जाती है. फिल्म के पहले हाफ में मुख्य रूप से लैला और कैस की प्रेम कहानी को ही दर्शाया गया है. जहां पहले हाफ में लैला के रूप में तृप्ति डिमरी अपने अभिनय की छाप छोड़ती हैं, वहीं दूसरे हाफ में अविनाश तिवारी अपनी एक्टिंग से आप लोगों को खूब इम्रेस करेंगे.अब इस प्रेम कहानी में आगे क्या होता है, इस बात को जानने के लिए आपका इस फिल्म को देखना आवश्यक है.
अभिनय : तृप्ति डिमरी और अविनाश तिवारी फिल्म 'लैला मजनू' से बॉलीवुड में अपने पहले कदम रख रहे हैं. दोनों की जितनी तारीफ की जाए, उतनी कम है. खासतौर पर जिस तरह से अविनाश ने अपने किरदार को निभाया है, ऐसा लगा ही नहीं कि यह उनकी पहली फिल्म है. साथ ही सुमित कौल का अभिनय भी काफी अच्छा है.
निर्देशन : इम्तियाज अली के भाई साजिद अली का निर्देशन सराहनीय है. जिन इमोशन्स को साजिद दर्शकों तक पहुंचाना चाहते थे, वह उसमें पूरी तरह से सफल हुए हैं. कुछ सीन्स को देखकर आपके रोंगटे भी खड़े हो सकते हैं. साथ ही साजिद ने कश्मीर की खूबसूरत जगहों का भी खूबसूरती से इस्तेमाल किया है.
म्यूजिक : 'लैला मजनू' का म्यूजिक इस फिल्म में और जान डालता है. खासतौर पर मोहित चौहान द्वारा गाया गया 'हाफिज हाफिज' नामक गाना फिल्म का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसके अलावा 'आहिस्तां' और 'ओ मेरी लैला' जैसे गानें भी काफी अच्छे हैं.
फिल्म की खूबियां : -
1. अविनाश और तृप्ति की दमदार एक्टिंग.
2. बेहतरीन सिनेमेटोग्राफी
3. शानदार निर्देशन
फिल्म की खामियां : - पहले हाफ की शुरुआत थोड़ी धीमी होती है. इसके अलावा हमें इस फिल्म में और कोई खामी नहीं नजर आई.
कितने स्टार्स ?
इस खूबसूरत प्रेम कहानी को हम 3.5 स्टार्स देना चाहेंगे. जब आप इस फिल्म को देखकर थिएटर से बाहर निकलेंगे, तब आपके मन में सिर्फ एक ही सवाल होगा - क्या सच में दो लोग एक दूसरे से इतना प्यार कर सकते हैं ?













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