Ikkis Movie Review: धर्मेंद्र की यादगार विदाई, वीरता और भावनाओं का अद्भुत संगम
साल 2026 की शुरुआत एक ऐसी फिल्म से हुई है जो दर्शकों के दिल को छू जाएगी. हाल ही में हमने भारतीय सिनेमा के एक महान अभिनेता धर्मेंद्र (Dharmendra) को खोया है, और इक्कीस (Ikkis) उन्हें बड़े पर्दे पर देखने का आख़िरी मौका बनकर सामने आयी है...
Ikkis Movie Review: साल 2026 की शुरुआत एक ऐसी फिल्म से हुई है जो दर्शकों के दिल को छू जाएगी. हाल ही में हमने भारतीय सिनेमा के एक महान अभिनेता धर्मेंद्र (Dharmendra) को खोया है, और इक्कीस (Ikkis) उन्हें बड़े पर्दे पर देखने का आख़िरी मौका बनकर सामने आयी है. यह फिल्म सिर्फ एक वॉर फिल्म नहीं हैं बल्कि यादों, बलिदान और भावनाओं की गहरी कहानी है , एक ऐसी कहानी जो समय के साथ और भी भारी लगने लगती है. श्रीराम राघवन के निर्देशन में बनी फिल्म इक्कीस एक संतुलित और संवेदनशील बायोपिक वॉर ड्रामा है. यह फिल्म देशभक्ति के ऊँचे नारे लगाने के बजाय ठहरकर सोचने पर मजबूर करती है. यह भारत के सबसे कम उम्र के परमवीर चक्र विजेता, सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेतरपाल की कहानी है. लेकिन इसे एक ‘हीरो स्टोरी’ की तरह नहीं, बल्कि एक इंसान की कहानी की तरह कहा गया है. यह भी पढ़ें: ‘Tu Meri Main Tera Main Tera Tu Meri’ Movie Review: कार्तिक-अनन्या की डिस्काउंट DDLJ लव स्टोरी, जो रोम-कॉम एल्गोरिदम के लिए बनी लगती है, फैन्स के लिए नहीं
फिल्म दो अलग-अलग समय काल में चलती है और यही इसकी सबसे बड़ी ताकत बनती है. पहला हिस्सा हमें दिसंबर 1971 के युद्ध में ले जाता है, जहाँ 21 साल का अरुण खेतरपाल अपने टैंक यूनिट का नेतृत्व करता दिखाई देता है. युद्ध के सभी दृश्यों में डर, दबाव और जिम्मेदारी की सच्ची झलक दिखाई देती है.
अगस्त्य नंदा अरुण खेतरपाल की भूमिका में ईमानदार और प्रभावशाली नजर आये हैं. अरुण बहादुर जरूर है, लेकिन बनावटी नहीं. वह जो करता है, वह दिखाने के लिए नहीं बल्कि अपने विश्वास के कारण करता है. कहीं-कहीं उसका जोश ज़रूरत से ज़्यादा लगता है, लेकिन यह किरदार की सच्चाई का हिस्सा है. जब अरुण को पीछे हटने का आदेश मिलता है और वह जलते हुए टैंक को छोड़ने से इनकार करता है, तो वह दृश्य नाटकीय नहीं लगता बल्कि ऐसा लगता है जैसे यही उसका स्वभाव है. अगस्त्य इस भूमिका में एक सच्चाई लेकर आये हैं.
फिल्म का दूसरा हिस्सा 2001 में घटित होता है और यही इक्कीस का भावनात्मक केंद्र है. धर्मेंद्र यहाँ अरुण के पिता, ब्रिगेडियर एम. एल. खेतरपाल के किरदार में हैं. युद्ध खत्म हुए दशकों बीत चुके हैं, लेकिन उसके घाव आज भी ताज़ा हैं. यहीं फिल्म में जयदीप अहलावत की एंट्री होती है, जो ब्रिगेडियर ख्वाजा मोहम्मद नसीर के रूप में नजर आते हैं. एक ऐसा सैनिक, जो उसी युद्ध से गुज़रा है, बस दूसरी तरफ से. धर्मेंद्र और जयदीप के बीच के दृश्य बेहद सादगी के साथ फिल्माए गए हैं. पुरानी गलियों में साथ चलना, यादों से भरी जगहों पर रुकना और अंत में बसंतर की उसी ज़मीन पर खड़े होना, यह सब फिल्म को एक अलग ऊँचाई पर ले जाता है.
धर्मेंद्र का अभिनय शब्दों से ज़्यादा खामोशी में बोलता है. छोटी-छोटी हरकतों, आँखों की नमी और रुक-रुक कर आती सांसों से वह दुख, गर्व और अधूरापन सब कुछ कह देते हैं. यह जानना कि यह उनकी आख़िरी फिल्म है, इन दृश्यों को और भी भावुक बना देता है. फिल्म में जयदीप अहलावत का अभिनय उनके करियर के सबसे बेहतरीन और असरदार कामों में से एक है.
इक्कीस में VFX का इस्तेमाल सीमित लेकिन प्रभावी है. टैंक युद्ध के दृश्य असली लगते हैं. भारी और डर पैदा करने वाले. हर धमाका कहानी को आगे बढ़ाने के लिए है, ध्यान खींचने के लिए नहीं. बैकग्राउंड म्यूज़िक भी बेहद सधा हुआ है. वह कभी दृश्य पर हावी नहीं होता, बस भावनाओं को सहारा देता है. युद्ध के समय आवाज़ें बोलती हैं, और शांत हिस्सों में संगीत खुद चुप रहना जानता है. डायलॉग भी सरल, सीधे और असरदार हैं.
श्रीराम राघवन का निर्देशन भरोसे से भरा हुआ है. स्क्रीनप्ले जिसे उन्होंने अरिजीत बिस्वास और पूजा लाधा सुर्ती के साथ मिलकर लिखा है, दोनों समय काल को बेहद संतुलन के साथ जोड़ता है. सिमर भाटिया अरुण की प्रेमिका किरण के रूप में कम समय के लिए दिखती हैं, लेकिन उनकी मौजूदगी फिल्म में अहम है. वह उस ज़िंदगी की झलक देती हैं, जो अरुण कभी जी नहीं सका. उनका अभिनय सच्चा और भावनात्मक है.
प्रोडक्शन के स्तर पर इक्कीस यह दिखाती है कि मैडॉक फिल्म्स जिम्मेदारी के साथ कहानियाँ कहने वाला बैनर बन चुका है. इस फिल्म में मुनाफे से ज़्यादा संवेदनशीलता दिखती है. फिल्म में इतिहास का पूरा सम्मान रखा गया है और कहानी को ईमानदारी से दिखाया गया है.
इक्कीस इंसानियत की फिल्म है — युद्ध के बीच भी ज़िंदा रहने वाली भावनाओं की. यह एक ऐसी फिल्म है जो ख़त्म होने के बाद भी चुपचाप आपके अंदर चलती रहती है और शायद यही इसकी सबसे बड़ी जीत है.
(The above story first appeared on LatestLY on Jan 01, 2026 10:00 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

