वाह! Ashish Chanchlani ने 6 महीने में घटाया 40 किलो वजन, शेयर किया अपना जादुई डाइट और वर्कआउट प्लान

Ashish Chanchlani Weight Loss: मशहूर यूट्यूबर और कंटेंट क्रिएटर आशीष चंचलानी, जो अपने मज़ेदार वीडियो के लिए जाने जाते हैं, ने अपने ज़बरदस्त फिजिकल ट्रांसफॉर्मेशन से फैंस को हैरान कर दिया है. अपनी कॉमेडी और relatable वीडियो से सबका दिल जीतने वाले आशीष ने सिर्फ छह महीनों में लगभग 40 किलो वज़न कम कर लिया. एक समय पर उनका वज़न करीब 130 किलो था, लेकिन उन्होंने खुद से एक पक्का वादा किया - कि वे अपनी 30 की उम्र में एक ज़्यादा हेल्दी और एनर्जेटिक इंसान बनकर कदम रखेंगे.

वो पल जब आया बदलाव का ख्याल

आशीष चंचलानी (Ashish Chanchlani) ने एक इंटरव्यू में अपनी फिटनेस यात्रा के बारे में बताते हुए कहा कि वज़न कम करने का फैसला उनके मन में अपने लुक्स को लेकर आई गहरी निराशा से पैदा हुआ. उन्होंने उस पल को याद किया जब वह शीशे के सामने खड़े थे और खुद को देखकर बेहद निराश महसूस कर रहे थे. वज़न घटाने की सालों की प्लानिंग और नाकाम कोशिशों के बाद यह एक इमोशनल मोड़ था. उस समय वह अपनी निजी ज़िंदगी में भी कुछ परेशानियों से जूझ रहे थे, जिससे उनकी निराशा और बढ़ गई थी.

आशीष ने फैसला किया कि वह अपने 30वें जन्मदिन पर भी इस वज़न का बोझ नहीं उठाना चाहते. उन्होंने एक साफ़ लक्ष्य तय किया: 30 साल का होने से पहले अपने वज़न को दो अंकों में लाना.

संतुलित तरीका: आशीष के ट्रांसफॉर्मेशन की नींव

आशीष (Ashish Chanchlani) ने किसी बहुत सख़्त डाइट या थका देने वाले वर्कआउट के बजाय एक समझदारी भरा और टिकाऊ रास्ता अपनाया. वह समझ गए थे कि वज़न घटाने के लिए खान-पान और कसरत दोनों में लगातार बने रहना ज़रूरी है. उनका मुख्य ध्यान एक पोषक तत्वों से भरपूर डाइट बनाने पर था, जो सज़ा की तरह न लगे, बल्कि बेहतर जीवनशैली की ओर एक बदलाव लगे.

आशीष ने एक ऐसी डाइट अपनाई जिसमें प्रोटीन ज़्यादा, हेल्दी फैट औसत मात्रा में और कार्बोहाइड्रेट बहुत कम थे. उन्होंने ऐसे मैक्रोन्यूट्रिएंट्स को प्राथमिकता दी जो लंबे समय तक एनर्जी और शरीर की रिकवरी में मदद करते हैं. प्रोटीन उनके भोजन का मुख्य हिस्सा था. इसके बाद फाइबर और हेल्दी फैट का नंबर आता था, जबकि कार्बोहाइड्रेट उनकी डाइट का सबसे छोटा हिस्सा थे.

उनका तरीका वैज्ञानिक होने के साथ-साथ सहज भी था. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अच्छा फैट न केवल ऊर्जा के लिए, बल्कि दिमाग के बेहतर कामकाज, त्वचा के स्वास्थ्य और शरीर की कई अन्य प्रक्रियाओं के लिए भी ज़रूरी है.

एक दिन में क्या खाते थे आशीष?

आशीष ने अपने रोज़ के खाने के बारे में विस्तार से बताया:

  • नाश्ता: इसमें या तो छह उबले अंडे होते थे या प्रोटीन से भरपूर आमलेट, अक्सर स्प्राउट्स के साथ.
  • दोपहर का खाना: इसमें एक रोटी और लगभग 200 ग्राम ग्रिल्ड चिकन होता था, साथ में खीरे और अजवाइन जैसे ताज़े जूस होते थे.
  • शाम: शाम को लगभग 6 बजे वह एक व्हे प्रोटीन शेक पीते थे ताकि मसल्स की मरम्मत हो सके और भूख भी शांत रहे.
  • रात का खाना: रात में भी वह चिकन ही खाते थे, लेकिन इस बार बिना किसी कार्ब्स के, ताकि यह प्रोटीन से भरपूर और पचने में हल्का हो.

इस डाइट प्लान से आशीष कैलोरी की कमी (calorie deficit) में रहते हुए भी पेट भरा हुआ और ऊर्जावान महसूस करते थे. समय के साथ, उन्हें पोर्शन साइज़ का इतना अंदाज़ा हो गया कि वह बिना तौले ही अपनी प्लेट में कैलोरी का अनुमान लगा लेते थे.

परहेज़ नहीं, संतुलन: चीट मील्स की भूमिका

अपने सख़्त रूटीन के बावजूद, आशीष अपनी पसंदीदा चीज़ों, खासकर मिठाइयों को पूरी तरह छोड़ने में विश्वास नहीं करते थे. उन्हें गुलाब जामुन और रसमलाई जैसी भारतीय मिठाइयां बहुत पसंद हैं. इन्हें पूरी तरह से खत्म करने के बजाय, उन्होंने खुद को हफ़्ते में एक बार इन्हें सीमित मात्रा में खाने की छूट दी. रविवार उनका ट्रीट डे होता था, जहाँ उनकी पसंदीदा मिठाई के दो पीस उनका इनाम होते थे.

अपनी कैलोरी की सीमा बनाए रखने के लिए, वह दिन में पहले ही छोटे-मोटे समझौते कर लेते थे - जैसे एक रोटी या कोई दूसरी कार्ब वाली चीज़ छोड़ देना - ताकि उनकी ट्रीट दैनिक सीमा को पार न कर दे.

आशीष के लिए, सफलता का राज़ परफेक्शन नहीं, बल्कि संतुलन था. उन्होंने जोर देकर कहा कि हफ़्ते में एक बार अपनी पसंद की चीज़ खाने से मानसिक स्वास्थ्य बहुत अच्छा रहता है. उन्होंने इस धारणा को खारिज कर दिया कि चीनी दुश्मन है, और कहा कि असली मुद्दा किसी खास भोजन का नहीं, बल्कि उसके ज़्यादा सेवन का है.

एक अनपेक्षित प्रेरणा: शाहरुख खान के साथ एक मुलाकात

आशीष की यात्रा पर सबसे महत्वपूर्ण प्रभावों में से एक बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान से आया. सालों पहले एक पार्टी के दौरान, शाहरुख ने आशीष को अपनी सेहत सुधारने के लिए प्रोत्साहित किया था. उन्होंने कहा था कि अगर वह कुछ वज़न कम कर लें तो और भी अच्छे लगेंगे. वह बातचीत, जिसमें बहुत ईमानदारी और परवाह थी, आशीष के दिमाग़ में बस गई. हालांकि उस चिंगारी को आग बनने में आठ साल लग गए, लेकिन आशीष उस प्रेरणा को कभी नहीं भूले. आख़िरकार, जब उन्होंने अपना लक्ष्य हासिल कर लिया, तो उन्होंने गर्व से इस याद को दुनिया के साथ साझा किया.