पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को सजा और उनकी पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ पर कार्रवाई का साया 8 फरवरी को रहे चुनावों पर दिख रहा है.
अगर हालात में जल्दी बदलाव नहीं हुआ तो 2050 तक तीन अरब लोग ऐसे होंगे जो पानी के लिए त्राहि-त्राहि कर रहे होंगे.
क्या चांद को धनी लोगों की अस्थियां फैलाने, वहां घूमने फिरने और स्पोर्ट्स ड्रिंक्स की बोतलें फेंकने की जगह बनाना है? वैज्ञानिकों के बीच यह बहस भी तेज होती जा रही है.
ईरान की परमाणु ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख ने घोषणा की है कि देश इस्फहान न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर में एक ताकतवर परमाणु संयंत्र बना रहा है.
यूरोपीय संघ सदस्य देश रेप पर कानून चाहते हैं लेकिन उसकी परिभाषा तय करने को लेकर विभाजित दिखते हैं.
बीजेपी सांसद हरनाथ सिंह यादव ने सोमवार को राज्यसभा में मांग की कि पूजा स्थल अधिनियम, 1991 को रद्द कर दिया जाना चाहिए.
चंडीगढ़ महापौर चुनावों में निर्वाचन अधिकारी के आचरण पर सुप्रीम कोर्ट ने गहरी चिंता जताई है.
उत्तर प्रदेश और हरियाणा में हजारों कंस्ट्रक्शन मजदूरों की इस्राएल जाने के लिए भर्ती हो रही है.
दुनिया का सबसे बड़ा मेंढक-प्रोजेक्ट एक ऐप की मदद से आम लोगों के विज्ञान जगत में योगदान की मिसाल बन गया है.
जर्मनी ने 2030 तक अपने पवन ऊर्जा फार्मों से ऊर्जा उत्पादन को चार गुना करने का लक्ष्य रखा है.
भांग लेने के बाद आखिर इतनी भूख क्यों लगती है? वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि दिमाग में क्या प्रतिक्रिया होती है.
जासूसी के आरोप में गिरफ्तार एक ऑस्ट्रेलियाई लेखक और ब्लॉगर को चीन की एक अदालत ने निलंबित मृत्युदंड की सजा सुनाई है.
समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के मसौदे को उत्तराखंड कैबिनेट की मंजूरी मिलने से राज्य विधानसभा में इसे पेश करने का रास्ता साफ हो गया है.
भारत इस साल मालदीव से अपने सैनिकों को वापस बुला लेगा.
फ्रांस के किसानों ने फसलों की कम कीमतों और फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर तत्काल कार्रवाई की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शनों से दो हफ्ते तक पेरिस को बेचैन रखा.
भारत की युवा आबादी पुरानी पीढ़ियों के मुकाबले ज्यादा दबाव महसूस कर रही है.
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को राज्य के गोपनीय सूचनाओं को लीक करने और भ्रष्टाचार के मामलों में कई साल की जेल की सजा सुनाई गई है.
यूरोप के संग्रहालयों पर औपनिवेशिक काल में एशियाई देशों से लूटी गईं कलाकृतियां लौटाने का दबाव बढ़ रहा है.
जर्मनी की राष्ट्रीय रेलवे सेवा डॉयचे बान मौजूदा समय में कई तरह की समस्याओं का सामना कर रही है.
जर्मनी में रहने वाला कोई भी शख्स अपनी राजनीतिक पार्टी बना सकता है, यहां तक कि विदेशी मूल के लोग भी.