क्यों हुई सुप्रीम कोर्ट को लोकतंत्र की चिंता
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

चंडीगढ़ महापौर चुनावों में निर्वाचन अधिकारी के आचरण पर सुप्रीम कोर्ट ने गहरी चिंता जताई है. चुनावों का वीडियो देख कर अधिकारी के आचरण को अदालत ने "लोकतंत्र की हत्या" करने के बराबर बताया है.मामले पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन अधिकारी अनिल मसीह के आचरण की कड़ी निंदा करते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह वीडियो में मतपत्रों को बिगाड़ते हुए साफ नजर आ रहे हैं और ऐसे में उन पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए.

मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा, "स्पष्ट है कि उन्होंने मतपत्रों को खराब किया है. उन पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए. वह कैमरे की तरफ क्यों देख रहे हैं? मिस्टर सॉलिसिटर, लोकतंत्र का मजाक उड़ाया जा रहा है और लोकतंत्र की हत्या की जा रही है."

क्या है मामला

मामला 30 जनवरी को चंडीगढ़ के महापौर के लिए हुए चुनावों से जुड़ा हुआ है. चुनावों में बीजेपी के प्रत्याशी मनोज सोनकर ने 'आप' और कांग्रेस के साझा प्रत्याशी कुलदीप कुमार को हरा दिया था.

सोनकर को 16 वोट मिले थे और कुमार को 12. निर्वाचन अधिकारी मसीह ने आठ वोटों को अवैध घोषित कर दिया था. 'आप' के कुलदीप कुमार ने तुरंत इस नतीजे के खिलाफ पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में अपील दर्ज करवाई थी.

कुमार का कहना था कि चुनावों में धोखाधड़ी और जालसाजी की गई है, जिस वजह से चुनाव दोबारा करवाए जाने चाहिए और हाई कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त जज की देखरेख में होने चाहिए. हाई कोर्ट ने मामले में नोटिस जारी किया था और तीन हफ्तों बाद सुनवाई की तारीख दी थी.

कुमार ने इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका डाली जिसमें उन्होंने अपील की कि सोनकर की महापौर के पद पर नियुक्ति पर रोक लगाई जाए. मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पार्डीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिसरा की पीठ इसी मामले की सुनवाई कर रही है.

'आप' के आरोप

हाई कोर्ट में दायर की गई याचिका में कुमार ने आरोप लगाए थे कि मसीह ने मौजूदा नियमों को ना मानते हुए पार्टियों के प्रतिनिधियों को वोटों की गिनती पर नजर रखने की इजाजत नहीं दी थी.

मसीह के सामने तीन टोकरियां रखी थीं, जिनमें से एक बीजेपी के प्रत्याशी, दूसरी कांग्रेस के प्रत्याशी और तीसरी अवैध वोटों के लिए थी. कुमार का आरोप था कि पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग में मसीह तीनों टोकरियों में मौजूद वोटों को फेंटते हुए साफ नजर आ रहे हैं.

कुमार के मुताबिक मसीह ने ऐसा "कंफ्यूजन" पैदा करने के लिए किया और इस दौरान उन्होंने "जालसाजी और हेरफेर के जरिए चुनावी प्रक्रिया को पूरी तरह से जोखिम में डाल दिया."

सुप्रीम कोर्ट ने मसीह के आचरण की निंदा करते हुए उन्हें नोटिस जारी किया है और आदेश दिया है कि चुनावों का पूरा रिकॉर्ड, मतपत्र और वीडियोग्राफी फैसला आ जाने तक संभाल कर रखे जाएं.

अदालत ने चंडीगढ़ नगर निगम को यह भी आदेश दिया कि अगली सुनवाई तक वह कोई भी कदम ना उठाए. अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 19 फरवरी तय की और मसीह को उस दिन अदालत में मौजूद रहने का आदेश दिया.