फ्रांस में 'चारिवारी' से शुरु हुआ विरोध का ऐसा तरीका
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

फ्रांस के किसानों ने फसलों की कम कीमतों और फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर तत्काल कार्रवाई की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शनों से दो हफ्ते तक पेरिस को बेचैन रखा. देश में ऐसे विरोध जताने का रहा है लंबा इतिहास.जनवरी से ही फ्रांस के किसान सरकार की नीतियों के विरोध में कई सड़कों को बंद कर प्रदर्शन कर रहे हैं. कहीं उन्होंने घास की गठरियां जलाईं तो वहीं एक स्थानीय प्रांत में तरल खाद का छिड़काव किया. किसान सरकार पर नियमों में ढील देने, आयात को सस्ता करने और लागत कम करने में मदद करने का दबाव बनानना चाहते हैं. किसानों ने कहा कि सड़कों पर ट्रैक्टरों की लंबी कतारों के साथ विरोध प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं. सत्ता संभालते ही देश के नए प्रधानमंत्री गैब्रिएल अताल के सामने यह पहली बड़ी चुनौती आ खड़ी हुई है.

इस तरह से विरोध-प्रदर्शन करना फ्रांस की जनता के लिए कोई नई बात नहीं है. फ्रांसीसी लोग अपने अतरंगी और अनोखे विरोध-प्रदर्शन के तरीकों के लिए दुनियाभर में मशहूर हैं. कभी बढ़ती महंगाई को लेकर हजारों लोग सड़कों पर उतर आते हैं. तो कभी सरकारी दफ्तरों पर खाद का छिड़काव करते हैं. मगर फ्रांसीसी लोग विरोध-प्रदर्शन करने में इतने आगे क्यों दिखते हैं? इसके पीछे फ्रांस में एक लंबी परंपरा रही है.

'चारिवारी' है फ्रांस में विरोध प्रदर्शनों की जड़

विरोध जताना फ्रांसीसी संस्कृति और सभ्यता का एक बहुत बड़ा हिस्सा रहा है. मध्यकाल और आधुनिक काल की शुरुआत से ही यूरोपीय लोग 'चारिवारी' नाम के लोक कार्यक्रम में भाग लेते थे. इसमें स्थानीय समुदाय के लोग नैतिक अपराधों के आरोपियों के घरों के बाहर जाते और उस इंसान का सार्वजनिक तौर पर मजाक उड़ाते. ऐसे शख्स के घर के बाहर बर्तन पीट-पीट कर शोर मचाने का भी रिवाज था. फिर समय के साथ-साथ फ्रांस में, चारिवारि का राजनीति में भी चलन बढ़ा और बाद में भ्रष्ट राजनेताओं और अधिकारियों के घरों को भी निशाना बनाया जाने लगा.

तब से, विरोध फ्रांसीसी सार्वजनिक जीवन का एक अभिन्न पहलू बन गया है. फ्रांसीसी क्रांति और पेरिस 1871 का कम्यून फ्रांसीसियों के कड़े विरोध-प्रदर्शन की मिसालें हैं.

नए कानूनों से फ्रांस की विरोध संस्कृति पर असर

फ्रांस की संसद ने हाल के सालों में नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं की आलोचना के बावजूद पुलिस की शक्तियां बढ़ाने वाले नए सुरक्षा कानून पारित किए हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे कानून आने वाले समय में देश में मौजूद विरोध-प्रदर्शन की जीवंत संस्कृति को कमजोर कर सकते हैं.

2021 में ऐसा एक कानून फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमानुएल माक्रों की पार्टी लाई थी, जिसके विधेयक को बड़े बहुमत के साथ पारित किया गया. इसके अलावा, जुलाई 2023 में भी कई विरोध-प्रदर्शनों के बावजूद फ्रांस ने एक ऐसा बिल पारित किया जो पुलिस को पहले से कहीं ज्यादा शक्तियां देता है. इससे पुलिस को किसी भी संदिग्ध के फोन का कैमरा, माइक और जीपीएस एक्टिवेट करने की छूट मिल गई. कुछ आलोचक मानते हैं कि फ्रांस ऐसी सुरक्षा रणनीतियों को बढ़ावा दे रहा है जिससे लोगों पर निगरानी रखना आसान हो सके.