चुनाव में जीत हासिल करने वाले अधिकतर लोगों की उम्र 40 के आसपास या उससे कम है। इनमें जोशुआ वोंग और जिम्मी शाम जैसे कार्यकर्ता भी शामिल हैं जिन्होंने नागरिक मानवाधिकार मोर्चा के संयोजक के तौर पर पिछले साल के सरकार विरोधी प्रदर्शनों के आयोजन में मदद की थी।
लोकतंत्र समर्थक खेमा कुछ महीनों में होने वाले विधायिका के चुनावों में उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है।
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हांगकांग के संवैधानिक मामलों के मंत्री एरिक सांग की पिछली हफ्ते दी गई चेतावनी के बावजूद इस चुनाव का आयोजन किया था।
चुनाव में कार्यकर्ता वोंग और शाम के अलावा अयोग्य ठराए गए सांसद टेड हुई और एडी चू ने भी जीत दर्ज की।
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हांगकांग में लोकतंत्र समर्थकों के धड़े में कई पार्टियां शामिल हैं। वे प्राइमरी का इस्तेमाल कर सितंबर में होने वाले आधिकारिक चुनाव में बेहतरीन उम्मीदवार उतारने की कोशिश में है। उनका मकसद बहुमत हासिल करने का है। आमतौर पर विधायिका का झुकाव बीजिंग समर्थक खेमे की ओर होता है।
जोशुआ वोंग ने मंगलवार को फेसबुक पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘ प्राइमरी चुनाव में कार्यकर्ताओं की जीत का मतलब है कि देश की स्वतंत्रता पर चीन के बढ़ते प्रतिबंधों के खिलाफ हमारे प्रतिरोध की भावना की निरंतरता।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ मतदाताओं की नजर में, प्रतिरोध की भावना वाले उम्मीदवार नीतिगत मंचों, अकादमिक और पेशेवर पृष्ठभूमि जैसे अन्य पारंपरिक तत्वों का पछाड़ते हैं।’’
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