विदेश की खबरें | बिना उचित नियम के आप समुद्र तल में खनन नहीं कर सकते
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

पॉट्सडैम(जर्मनी), तीन जुलाई (360 इंफो) बिना उचित नियमों के समुद्र तल में खनन करना अजीब लगता है लेकिन यह जल्द हकीकत बन सकता है।

दुनिया के महासागरों के लिए 10 जुलाई 2023 ‘डी-डे’ (वह दिन होता है जिस दिन लड़ाकू हमला या अभियान शुरू किया जाता है) हो सकता है। यह वह दिन है जब राष्ट्रीय अधिकार क्षेत्र से परे समुद्री क्षेत्रों में खनन नियमों को अंतिम रूप देने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुद्र तल प्राधिकरण को दी गई दो साल की समय सीमा समाप्त हो रही है।

नियमों के अभाव में समुद्र तल में खनन को हरी झंडी मिलने की संभावना ने सदस्य देशों, पर्यावरण समूहों और जनता के बीच चिंता पैदा कर दी है। इसके मद्देनजर अब गहरे समुद्र में खनन पर रोक लगाने की मांग बढ़ती जा रही है।

यदि प्राधिकरण तय समय सीमा से चूक जाता है, जो लगभग तय है, कि इसकी परिषद केवल 10 जुलाई को बैठक करेगी, उस स्थिति में सदस्य देशों को खनन के लिए प्राप्त किसी भी आवेदन पर ‘‘विचार करना होगा और अस्थायी रूप से मंजूरी देनी होगी।’’ देशों को यह मंजूरी गतिविधियों को नियंत्रित करने के नियमों की गैरमौजूदगी के बावजूद देनी होगी।

यह विशेष रूप से चिंताजनक है क्योंकि बातचीत में अभी लंबा रास्ता तय किया जाना है और जोखिम किसी भी लाभ से अधिक हो सकते हैं।

अंतरराष्ट्रीय समुद्रतल प्राधिकरण उचित नियमों के बिना खनन को मंजूरी देने या नहीं देने पर कैसे प्रतिक्रिया करता है यह देखना होगा।

अंतरराष्ट्रीय समुद्रतल प्राधिकरण एक स्वायत्त अंतरराष्ट्रीय संगठन है जो समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र संधि 1982 के तहत स्थापित किया गया है। इसके सदस्य 168 देश और यूरोपीय संघ है जो देशों के राष्ट्रीय न्यायाधिकार क्षेत्र के परे समुद्री क्षेत्र में खनिज संसाधन के प्रशासन के लिए जिम्मेदार है। कानूनी रूप से यह मानवता के लिए समान विरासत के लिए अधिकृत है।

प्राधिकरण की सर्वोच्च इकाई सभा है जिसमें सभी सदस्य देशों का प्रतिनिधित्व होता है। वहीं हर चार साल के लिए 36 देशों को कार्यकारी परिषद के लिए चुना जाता है।

समुद्र संबंधी कानून पर संयुक्त राष्ट्र संधि अंतरराष्ट्रीय समुद्र तल में खनन के लिए नियामक पृष्ठभूमि प्रदान करता है, 1994 में संपन्न एक कार्यान्वयन समझौते में प्रारंभिक ढांचे के कुछ पहलुओं को संशोधित किया गया था।

एक महत्वपूर्ण संशोधन ‘दो-वर्ष नियम’ नामक प्रावधान को शामिल करना था, जिसे 1994 के समझौते में शामिल किया गया।

हालांकि खनन नियमों को मंजूरी देने की जिम्मेदारी आमसभा की है, लेकिन परिषद के पास उन पर बातचीत करने, अपनाने और लागू करने की शक्ति है। परंतु किसी प्रस्ताव को परिषद द्वारा स्वीकार करने के लिए जरूरी है कि सभी 36 सदस्यों की आम सहमति हो। सबसे अहम है कि एक सदस्य की आधिकारिक रूप से जताई गई आपत्ति प्रस्ताव के स्वीकार करने में रोड़ा अटका सकती है।

‘दो वर्ष नियम’ का प्रावधान यह सुनिश्चित करने के लिए शामिल किया गया ताकि गतिरोध को दूर किया जा सके और एक या दो आधिकारिक आपत्तियों की वजह से खनन कार्य को रोका नहीं जा सके।

लेकिन अगर केवल एक या कुछ देश या निजी संस्थाएं आगे बढ़ना चाहती हैं तो खनन गतिविधियों को शुरू करने की अनुमति देने के प्रावधान की परिकल्पना नहीं की गई थी।

परिषद की मार्च 2023 में आखिरी बैठक हुई थी जिसमें सदस्य देश इस निष्कर्ष पर पहुंचे थे और निर्णय लिया था कि बिना नियम के खनिजों के वाणिज्यिक दोहन शुरू करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

परिषद इस निष्कर्ष पर भी पहुंची कि सदस्य देश नियम की अनुपस्थिति में आवेदन को अस्वीकार करने की शक्ति अपने पास रखेंगे।

परिषद ने समुद्री पर्यावरण की रक्षा और किसी भी खनन गतिविधि के हानिकारक नतीजों से प्रभावी तरीके से निपटने के प्राधिकरण की कानूनी बाध्यता पर भी जोर दिया। इसका अभिप्राय है कि समुद्री पर्यावरण को किसी व्यक्तिगत खनन हित के मुकबाले सबसे अधिक प्राथमिकता दी जाएगी।

किसी भी सहमत नियम, स्पष्ट पर्यावरणीय सीमा और बाध्यकारी मानकों के बिना, प्राधिकरण के लिए किसी भी खनन आवेदन को मंजूरी देने और आत्मविश्वास के साथ संचालन की निगरानी करने का निर्णय लेना असंभव लगता है।

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