इंदौर (मध्यप्रदेश), 23 अप्रैल कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा ने रविवार को कहा कि मानहानि के मामले में गुजरात की एक अदालत द्वारा उनकी पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को सजा सुनाए जाने के बाद उनके वकीलों ने ‘‘पारंपरिक दृष्टिकोण’’ से यह मुकदमा लड़ा।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर उन्हें इस मामले में एक वकील के तौर पर गांधी की पैरवी का मौका मिलता, तो वह दोषसिद्धि को लेकर निचली अदालत के फैसले को सीधे शीर्ष न्यायालय में चुनौती देते।
गौरतलब है कि कर्नाटक के कोलार में 2019 के दौरान गांधी द्वारा "मोदी उपनाम" के संबंध में की गई टिप्पणियों को लेकर दायर मानहानि के मामले में सूरत की एक अदालत ने उन्हें दोषी करार दिया था और दो साल कैद की सजा सुनाई थी, जिसके बाद कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष को संसद की सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिया गया था। इसके बाद गांधी को लुटियंस दिल्ली स्थित अपना सरकारी आवास भी खाली करना पड़ा है।
यह पूछे जाने पर कि क्या गांधी के खिलाफ दायर मानहानि मामले को कांग्रेस द्वारा कानूनी तौर पर बेहतर तरीके से संभाला जा सकता था, तन्खा ने इंदौर प्रेस क्लब में संवाददाताओं से कहा,‘‘कुछ मसले पार्टी नेतृत्व के होते हैं, जिनका जवाब मैं नहीं दे सकता और न ही देना चाहूंगा।’’
उन्होंने हालांकि कहा कि मानहानि मामले में दोषसिद्धि के बाद गांधी के वकीलों ने यह पारंपरिक दृष्टिकोण अपनाया कि निचली अदालत के फैसले को पहले सत्र अदालत में चुनौती दी जाए और अगर सत्र न्यायालय में मुकदमा जीता नहीं जा सके, तो उच्च न्यायालय का रुख किया जाए और उच्च न्यायालय में राहत नहीं मिलने पर शीर्ष न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाए।
उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ वकील तन्खा ने कहा,‘‘यह (मुकदमा लड़ने का) एक पारंपरिक दृष्टिकोण है और इसमें कोई गलती नहीं है। लेकिन हो सकता है कि कपिल सिब्बल या मेरे पास इस मुकदमे की पैरवी की बात आती, तो हम (मानहानि मामले में गांधी को निचली अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद) सीधे शीर्ष न्यायालय चले जाते। फिर यह अलग विषय है कि हमें इसमें सफलता मिलती या नहीं, लेकिन यह वकीलों की अलग-अलग सोच की बात है।’’
गौरतलब है कि तन्खा ने इंदौर प्रेस क्लब की ओर से आयोजित ‘‘प्रेस से मिलिए’’ कार्यक्रम में यह बात कही। इस कार्यक्रम में राज्यसभा सदस्य और कांग्रेस के पूर्व नेता सिब्बल भी मौजूद थे।
बहरहाल, जब सिब्बल से मानहानि मामले में गांधी की पैरवी के लिए कांग्रेस द्वारा अपनाए गए कानूनी तौर-तरीकों के संबंध में पूछा गया तो उन्होंने यह कहकर कुछ भी कहने से इंकार कर दिया कि फिलहाल वह इस पार्टी में नहीं हैं।
इससे पहले, कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य तन्खा ने केंद्र सरकार पर यह आरोप लगाते हुए निशाना साधा कि वह न्यायाधीशों की नियुक्ति की कॉलेजियम प्रणाली की "बेइज्जती" कर रही है।
तन्खा ने कहा,‘‘हमारे जैसे बहुत सारे लोग न्यायाधीशों की नियुक्ति की कॉलेजियम प्रणाली के पक्ष में मूल रूप से नहीं हैं, लेकिन हम न्यायाधीशों की नियुक्ति के तंत्र में शामिल होने के प्रयासों में मौजूदा सरकार के लोगों का साथ नहीं दे सकते, क्योंकि हमें स्वतंत्र न्यायपालिका को लेकर इस सरकार के नजरिये पर बिल्कुल भी विश्वास नहीं है। इसलिए आज के हालात में हम कॉलेजियम प्रणाली के पक्षधर हैं।’’
उन्होंने यह भी कहा कि वह कॉलेजियम प्रणाली पर सरकार के उस ‘‘प्रभाव’’ के खिलाफ हैं, जो इन दिनों साफ नजर आ रहा है।
देश में समलैंगिक शादियों को कानूनी मान्यता दिए जाने की बहस को लेकर निजी राय पूछे जाने पर तन्खा ने कहा,‘‘बुनियादी तौर पर मैं उदार मूल्यों वाला व्यक्ति हूं। मैं उन्हें (समलैंगिकों को) अपराधी नहीं समझता, लेकिन मैं अपने घर में यह (समलैंगिक शादी) नहीं चाहूंगा।’’
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