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महिलाओं के लिए नहीं है वर्क-लाइफ बैलेंसः रिपोर्ट

एक नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कामकाजी महिलाओं में तनाव का स्तर पुरुषों के मुकाबले ज्यादा है.

महिलाओं के लिए नहीं है वर्क-लाइफ बैलेंसः रिपोर्ट
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

एक नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कामकाजी महिलाओं में तनाव का स्तर पुरुषों के मुकाबले ज्यादा है. आधी से ज्यादा कामकाजी महिलाएं दिन भर में "काफी तनाव" महसूस करती हैं, जबकि ऐसा कहने वाले पुरुषों का आंकड़ा 4 में 1 है.कामकाजी महिलाओं पर घर और ऑफिस की दोहरी जिम्मेदारियां भारी पड़ रही हैं. अमेरिकी सर्वेक्षण संस्था गैलप की रिपोर्ट के अनुसार कामकाजी महिलाएं खासकर जो मां हैं, अक्सर परिवार की जरूरतों के कारण प्रमोशन ठुकरा देती हैं या उसे टाल देती हैं.

इसके अलावा, बच्चों की देखभाल की आपातकालीन परिस्थितियों में महिलाओं को ही सबसे पहला संपर्क माना जाता है, जिसका असर दफ्तर में उनकी जिम्मेदारियों पर पड़ता है.

सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक 17 फीसदी महिलाएं कहती हैं कि उन्हें "रोजाना" या "कई बार" काम के दौरान पारिवारिक जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं. पुरुषों में यह आंकड़ा सिर्फ 11 फीसदी है.

गैलप की मैनेजिंग डायरेक्टर इलाना रॉन लेवी ने कहा, "महिलाओं की भलाई और उनकी लीडरशिप को बढ़ावा देने की बातें हो रही हैं. लेकिन हम महिलाओं में तनाव, चिंता और काम की थकान के रिकॉर्ड स्तर भी देख रहे हैं."

बदलाव से मिल सकता है समाधान

महिला अधिकार कार्यकर्ताओं के मुताबिक कार्यस्थलों पर सांस्कृतिक बदलाव और भलाई को प्राथमिकता देकर इस समस्या का समाधान संभव है. वर्ल्ड हैपीनेस समिट की आयोजक कैरेन गैगनहाइम ने कहा, "क्यों हमें चुनना पड़ता है? क्यों ऐसी परिस्थितियां बन रही हैं जहां लोग बेहतरीन माता-पिता और अच्छे प्रोफेशन में से एक को चुनने पर मजबूर हो रहे हैं?"

उन्होंने कहा, "महिलाओं की भलाई में निवेश करना न केवल अच्छा व्यापार है, बल्कि यह सामाजिक प्रगति का खाका है."

सर्वे के अनुसार, कामकाजी माताएं अक्सर सोचती हैं कि उन्हें अपने घंटे कम करने चाहिए या नौकरी छोड़ देनी चाहिए. यह आंकड़ा कामकाजी पिताओं के मुकाबले लगभग दोगुना है. ब्रिटेन में पिछले साल हुए एक सर्वे में बताया गया बच्चों की देखभाल महंगी होने के कारण महिलाओं को करियर में बड़ा नुकसान उठाना पड़ता है.

बच्चों की देखभाल का संकट

यह सर्वे उस समय आया है जब अमेरिका में बच्चों की देखभाल का संकट गहराता जा रहा है. अमेरिका के नए राष्ट्रपति चुने गए डॉनल्ड ट्रंप की दूसरी सरकार की शुरुआत से कुछ हफ्ते पहले इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है.

ट्रंप ने कहा है कि "बच्चों की देखभाल इस देश के लिए जरूरी है." उन्होंने विदेशी आयातों पर टैक्स बढ़ाने से बच्चों की देखभाल सुधारने का खर्च निकालने की बात कही. हालांकि, उनके प्रशासन की प्राथमिकताओं में यह मुद्दा नहीं दिखता.

उपराष्ट्रपति चुने गए जेडी वैंस ने पिछले प्रशासन की देखभाल खर्च कम करने की कोशिशों का विरोध किया. उनका कहना है कि इससे माता-पिता काम पर लौटने को मजबूर होते हैं, जबकि कुछ लोग घर पर बच्चों की देखभाल करना पसंद करते हैं.

वैंस ने सुझाव दिया कि माता-पिता को परिवार के सदस्यों पर ज्यादा भरोसा करना चाहिए. कामकाजी महिलाएं और पुरुष दोनों अपने व्यक्तिगत समय में काम के बारे में सोचते हैं. लेकिन महिलाएं इस दबाव को ज्यादा महसूस करती हैं. यह इसलिए भी चिंता की बात है क्योंकि ज्यादातर महिलाएं काम करना चाहती हैं. हाल ही में यूनिसेफ की एक रिपोर्ट में कहा गया कि महिलाओं के लिए पढ़ाई के बाद नौकरी अहम है, शादी नहीं.

क्या कर सकती हैं कंपनियां?

गैलप रिपोर्ट में कहा गया कि अगर कंपनियां काम और निजी जीवन के बीच संतुलन बनाने में मदद करती हैं, तो इससे महिलाओं का जुड़ाव और प्रदर्शन बेहतर हो सकता है.

गैलप में हायरिंग एनालिटिक्स की डायरेक्टर क्रिस्टीन बैरी के मुताबिक, "कंपनियां नीतियां और कार्यक्रम बना सकती हैं, मैनेजरों को सपोर्ट सिस्टम का हिस्सा बना सकती हैं और वर्कप्लेस कल्चर में भलाई को प्राथमिकता दे सकती हैं."

महिलाएं कार्यबल का लगभग आधा हिस्सा हैं. बैरी ने कहा, "अगर हम इस चुनौती को नजरअंदाज करते हैं, तो अपने लक्ष्य हासिल नहीं कर पाएंगे."

विशेषज्ञ कहते हैं कि इस समस्या को हल करना सिर्फ महिलाओं के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए जरूरी है, क्योंकि महिलाएं बेहतर संतुलन बनाएंगी तो न केवल ऑफिस बल्कि घर और समाज में भी सकारात्मक बदलाव आएगा.

वीके/एए (एपी)

(The above story first appeared on LatestLY on Dec 06, 2024 10:20 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).