इंफाल, 21 जुलाई सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि मणिपुर में महिलाओं की रक्षा करने का दावा करने वाले महिला समूह ‘मीरा पैबिस’ से उत्पन्न खतरे से निपटने के लिए और अधिक महिला बटालियनों की आवश्यकता है क्योंकि यह समूह संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में न सिर्फ केन्द्रीय अर्धसैनिक बलों के आवागमन को बाधित कर रहा है, बल्कि गंभीर अपराधों को अंजाम देने में ‘‘मदद’’ भी कर रहा है।
असम राइफल्स में महिला कर्मियों की संख्या बहुत कम है और अधिकारियों का मानना है कि वे कानून-व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं से निपटने के लिए प्रशिक्षित नहीं हैं।
राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के काम में जुटे अधिकारी लगातार राज्य में अर्धसैनिक बलों की महिला कर्मियों की तैनाती पर जोर देते रहे हैं और खास तौर से वे दंगा रोधी उपकरणों से लैस त्वरित कार्रवाई बल (आरएएफ) की महिला कर्मियों की तैनाती का अनुरोध कर रहे हैं।
पहचान गुप्त रखने की शर्त पर एक अधिकारी ने कहा, ‘‘खुद को मीरा पैबिस बताने वाली इन महिलाओं को आप अकसर देखेंगे यह ये दबाव डालने पर स्वयं को निर्वस्त्र करने की धमकी देती हैं। जब सेना की टुकड़ियां पर्वतीय क्षेत्रों में दूसरे गंतव्य की ओर बढ़ती हैं, ये महिलाएं डंडे लेकर रास्ता रोकने के लिए खड़ी हो जाती हैं।’’
अधिकारियों ने बताया कि ऐसा कई बार हुआ है जब किसी हमले को रोकने या मणिपुर में दो समुदायों के बीच सशस्त्र संघर्ष में हस्तक्षेप के लिए जा रही सेना या असम राइफल्स की सहायता टुकड़ी को इन तथाकथित सुरक्षा ठेकेदारों ने रोक दिया और ये सभी से... फिर चाहे वे जवान हों या अधिकारी, पहचान पत्र दिखाने को कहती हैं।
लगभग 20 या इससे अधिक महिलाओं के समूह लाठी-डंडे लेकर इंफाल रोड के प्रमुख स्थानों पर खड़े होकर सबकी जांच करते हुए देख सकते हैं, ताकि पर्वतीय क्षेत्रों में फंसे जनजातीय लोगों तक कोई मदद न पहुंच सके।
यहां तक कि मणिपुर की स्थिति को कवर करने आए पत्रकारों को भी मीरा पैबिस की सदस्यों ने नहीं बख्शा।
अधिकारियों ने बताया कि कई अवसरों पर ऐसा भी होता है जब मीरा पैबिस की सदस्य ड्यूटी पर तैनात सैनिकों से बहस करती हैं और मणिपुर पुलिस पूरे समय मूकदर्शक बनी रहती है।
फिलहाल सीआरपीएफ (केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल) की तीन महिला कंपनी, महिला प्लाटून के साथ आरएएफ की 10 कंपनियां वहां तैनात हैं और इनमें महिला कर्मियों की कुल संख्या महज 375 है। सीआरपीएफ की एक कंपनी में 75 कर्मी होते हैं जबकि आरएएफ महिला प्लाटून में 15 कर्मी होते हैं। अर्धसैनिक बलों की इन महिला कर्मियों की संख्या मीरा पैबिस की सैकड़ों महिलाओं से निपटने के लिहाज से बहुत कम है।
हाल ही में खुद को मीरा पैबिस बताने वाली पांच महिलाओं को इंफाल के बाहरी हिस्से में नगा मारिंग की एक महिला की हत्या के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। अधिकारियों ने बताया कि ये तथाकथित महिला सुरक्षा समूह प्रतिबंधित आतंकवादी समूह केवाईकेएल के 12 कैडर की जून में हुई रिहाई के अभियान में भी सक्रिय रहीं। इन 12 कैडर में 2015 में 18 सैनिकों की हत्या करने का मुख्य आरोपी भी शामिल था।
‘एशियन रिव्यू ऑफ सोशल साइंसेज’ पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन ‘ए ब्रीफ रिव्यू ऑफ मीरा पैबिस : ए वूमेंस मूवमेंट इन मणिपुर’ के अनुसार, समुदाय को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करने वाली मुश्किल घड़ी में मणिपुर की हर महिला मीरा पैबिस बन जाती है।
भारत की आजादी से पहले और बाद में विभिन्न महिला संगठनों ने समाज से अन्याय को खत्म करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और मीरा पैबिस भी उन्हीं में से एक समूह है। यह मणिपुर में निवास करने वाले सबसे ज्यादा आबादी वाले समुदाय से ताल्लुक रखता है।
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