नयी दिल्ली, नौ अक्टूबर केंद्र ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय को सूचित किया कि वह मणिपुर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति के लिए अधिसूचना शीघ्र जारी करेगा।
शीर्ष अदालत दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है जिसमें से एक में आरोप लगाया गया है कि न्यायाधीशों के तबादले और नियुक्ति के लिए कॉलेजियम की ओर से अनुशंसित नामों को मंजूरी देने में केंद्र सरकार विलंब कर रही है।
न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ को अवगत कराया गया कि उच्च न्यायालय के 14 न्यायाधीशों के तबादले से संबंधित फाइलों को मंजूरी दे दी गई है जबकि 12 न्यायाधीशों से संबंधित फाइल प्रक्रियाधीन है।
प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाले उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम ने पांच जुलाई को दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश सिद्धार्थ मृदुल को मणिपुर उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की अनुशंसा की थी।
पीठ इस मामले पर अगली सुनवाई 20 अक्टूबर को करेगी।
पीठ ने सोमवार को सुनवाई के दौरान कहा कि बड़ी संख्या में उच्च न्यायालयों की संस्तुतियों को, जो अब तक कानून मंत्रालय के पास लंबित थीं और उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम को नहीं भेजी गई थीं, आखिरकार भेज दी गई हैं।
पीट ने कहा कि उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम अब उच्च न्यायालयों द्वारा की गई अनुशंसाओं पर सलाहकार न्यायाधीशों के विचार जानेगा और प्रक्रिया यथा शीघ्र पूरी की जाएगी।
पीठ ने कहा, ‘‘जहां तक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति का सवाल है, जो काफी समय से लंबित है, वह भी एक संवेदनशील राज्य के लिए, यह बताया गया है कि फाइल को मंजूरी दे दी गई है और जल्द ही अधिसूचना जारी की जाएगी।’’
न्यायमूर्ति कौल ने कहा, ‘‘अगली तारीख पर मैं इसे पूरा करना चाहता हूं। मैं बहुत बहुत विनम्र हूं, मुझे विनम्र रहने दीजिए।’’
पीठ ने कहा, ‘‘पिछले हफ्ते तक 80 अनुशंसाएं लंबित थीं जब 10 नामों को मंजूरी दी गई थी। अब भी यह आंकड़ा 70 है। इनमें से 26 संस्तुतियां न्यायाधीशों के तबादले से संबंधित हैं।’’
पीठ ने कहा कि ये अनुशंसाएं पिछले साल नवंबर से लंबित हैं। इस पर अटॉर्नी जनरल ने केंद्र सरकार से निर्देश लेने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा था।
शीर्ष अदालत जिन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है उनमें से एक को ‘अधिवक्ता संघ बेंगलुरु’ ने दायर किया है और इसमें केंद्रीय कानून मंत्रालय के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई करने की मांग की गई है क्योंकि इसने कथित रूप से उस समय सीमा का पालन नहीं किया जिसका निर्धारण वर्ष 2021 के अदालत के फैसले में किया गया है।
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