विदेश की खबरें | श्वेत विशेषाधिकार: यह क्या है, इसका क्या अर्थ है और इसे समझना क्यों मायने रखता है..

स्टेलनबोश (दक्षिण अफ्रीका), 14 सितंबर (द कन्वरसेशन) दक्षिण अफ्रीका के प्रिटोरिया का एक प्रतिष्ठित, निजी स्कूल हाल ही में विरोध प्रदर्शन का एक स्थल बन गया। काले शिक्षार्थियों और अभिभावकों ने आरोप लगाया है कि कॉर्नवाल हिल कॉलेज ने बोर्ड में केवल श्वेत लोगों की बजाय विविध शिक्षार्थी निकाय के प्रतिनिधि शामिल करने की उनकी मांग को अस्वीकार कर दिया है।

इसके प्रदर्शन के जवाब में, दक्षिण अफ्रीका के एक युवा दक्षिणपंथी समूह ‘बिटरेइंडर्स’ (द बिटर एंडर्स) ने परिवर्तनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। समूह के एक सदस्य ने कहा कि ‘‘नाखुश हैं? तो अपना खुद का स्कूल बनाएं।’’

नस्ली असमानता परिवर्तन के इतनी खिलाफ क्यों है? कुछ लोगों का कहना है कि ऐसा श्वेत विशेषाधिकार को स्वीकार करने और उससे निपटने में विफलता के कारण है।

वर्ष 2020 में अमेरिकी शहर मिनियापोलिस में जॉर्ज फ्लॉयड की पुलिस के हाथों हत्या के बाद दुनियाभर में विरोध प्रदर्शन किए गए और अश्वेत विरोधी नस्लवाद पर भी गहन चर्चा हुई। फ्रांस से लेकर कोलंबिया और दक्षिण अफ्रीका तक, प्रदर्शनकारियों ने ‘‘श्वेत विशेषाधिकार’’ शब्द का इस्तेमाल अपने देशों में स्पष्ट नस्ली असमानताओं का सामना करने के एक साधन के रूप में किया। हालांकि यह स्पष्ट है कि यह शब्द विभिन्न संदर्भों में लोकप्रिय हो गया है, लेकिन कुछ ने इसके खिलाफ तर्क दिए हैं। वे कहते हैं कि ‘‘श्वेत विशेषाधिकार’’ शब्द रूढ़िवादी सोच की पुष्टि करता है, नस्ली अवधारणाओं को पुष्ट करता है, संभावित सहयोगियों का विरोध करता है और परिवर्तन के लिए और भी अधिक प्रतिरोध पैदा करता है। जैसा कि नस्ली न्याय के लिए आंदोलन अधिक वैश्विक हो गए हैं, यह शब्द राष्ट्रीय सीमाओं के पार भी परिचालित हो गया। हालांकि, इसका हमेशा इन नए संदर्भों में इस्तेमाल नहीं किया जाता।

इतिहास:

‘‘श्वेत विशेषाधिकार’’ शब्द की उत्पत्ति 1980 के दशक में अमेरिका में हुई थी, जिसमें नस्ली अन्याय के प्रणालीगत रूपों द्वारा श्वेत लोगों को स्पष्ट और अस्पष्ट रूप से मिलने वाले सभी लाभों को उल्लेख किया गया था। ‘‘ नस्ली अन्याय ’’ और ‘‘ प्रणालीगत नस्ली पूर्वग्रह’’ जैसे शब्दों के विपरीत, विशेषाधिकार का विचार कुछ व्यक्तियों पर केन्द्रित है। वर्ष 2000 के दशक के मध्य तक, अमेरिका में कई शिक्षकों और कार्यकर्ताओं द्वारा श्वेत विशेषाधिकार शब्द को अपनाया गया था। वे उन असंख्य तरीकों की ओर ध्यान आकर्षित करना चाह रहे थे जिनमें श्वेत लोग, चाहे वे किसी भी वर्ग से नाता रखते हो, उन्हें श्वेत वर्चस्व का फायदा मिलता है।

दक्षिण अफ्रीका में, श्वेत विशेषाधिकार रंगभेद की विरासत है, जिसने सभी ऐसे लोगों को अपने अधीन किया, जिनकी त्वचा का रंग सफेद नहीं था। रंगभेद के राजनीतिक खात्मे के बावजूद, श्वेत विशेषाधिकार कायम हैं। नस्ली संगठनों के परिवर्तन के आह्वान को श्वेत लोगों द्वारा खतरे के रूप में देखा जाता है। वहीं फ्रांस में, श्वेत विशेषाधिकार शब्द का प्रयोग अपेक्षाकृत हाल ही में शुरू हुआ है, जिसे 2000 के दशक के अंत में सामाजिक वैज्ञानिकों द्वारा पेश किया गया था। गुलामी और औपनिवेशिक राजनीति की विरासतों के वर्णन की अवधारणा विशेष रूप से सटीक है और यह संरचनात्मक नस्लवाद के अनुभव को दिखाती है, जिसे फ्रांस के कई निवासियों ने साझा किया है।

फिर भी, अवधारणा की बढ़ती स्वीकृति के साथ ही इसका प्रतिरोध भी हुआ है। कुछ लोग ‘‘श्वेत विशेषाधिकार’’ को अमेरिकीकरण के रूप में देखते हैं, जो फ्रांस की उदार परंपरा और सार्वभौमिकता के लिए उपयुक्त नहीं है।

एक राजनीतिक श्रेणी के रूप में:

श्वेत और उससे जुड़े विशेषाधिकारों का निर्माण कभी-कभी विरोधाभासी - नस्ली भेदभाव और नस्ली न्याय सक्रियता के इतिहास के अलग-अलग होता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि सामाजिक रूप से निर्मित श्रेणियों के रूप में नस्ल और नस्लीय श्रेणियों की समझ सभी जगह असंगत और असमान है।

इस पर होने वाली चर्चा:

एक श्रेणी के रूप में 'जाति' के परिणाम पश्चिमी यूरोप के बाहर, अफ्रीका और अमेरिका में अलग हैं.... जहां मूल आबादी को समाप्त कर दिया गया, गुलाम बना दिया गया और सामाजिक तथा राजनीतिक बहिष्कार के विभिन्न रूपों के अधीन किया गया। फिर भी, श्वेत या काले या स्वदेशी के रूप में किसे गिना जाता है, इस सवाल पर दुनिया भर में गहरा विवाद है। जैसा कि इन सामाजिक और कभी-कभी कानूनी रूप से निर्मित श्रेणियों में लोगों के परिणाम अलग और उनके साथ व्यवहार अलग तरह का होता है। इसलिए श्वेत और ऐसी श्रेणी में सदस्यता से जुड़े विशेषाधिकार, प्रासंगिक रूप से परिभाषित रहते हैं।

नस्ली न्याय के लक्ष्य की ओर:

यथास्थिति बनाए रखने के लिए अनगिनत कदम उठाए गए हैं, जैसे कि कॉर्नवाल हिल कॉलेज परिवर्तन-विरोधी विरोध, ‘यू साइलेंस वी एम्प्लीफाई’, और अमेरिकी राजधानी में विद्रोह। विशेषाधिकार सीधे मताधिकार पर निर्भर करते हैं, जिसे इस आधार पर आंका जाता है कि किसके पास पहुंच और अवसर है और किसके पास नहीं। श्वेत वर्चस्व के इतिहास वाले देशों में, श्वेत विशेषाधिकार का अर्थ कई लोगों को स्वतः स्पष्ट लग सकता है। लेकिन वहां और अन्य देशों के लिए, यह शब्द नए प्रश्नों और चुनौतियों का संकेत दे सकता है। हालांकि ‘श्वेत विशेषाधिकार’ की अवधारणा विभिन्न राष्ट्रीय संदर्भों में सामाजिक परिवर्तन की वकालत करने वाले लोगों के लिए मूल्यवान साबित हुई है, लेकिन कई देशों में इस धारणा का भी विरोध है कि श्वेत लोग अपनी जाति के तहत विशिष्ट रूप से ‘‘विशेषाधिकार प्राप्त’’ करते हैं। कुछ आलोचक श्वेत वर्चस्व को खत्म करने के लिए तैयार नहीं हैं, जबकि अन्य लोगों के जीवन को आकार देने वाली असमानताओं को दूर करने की दिशा में ‘‘ श्वेत विशेषाधिकार’’ की सीमाओं की ओर इशारा करते हैं।

जो स्पष्ट है, वह यह है कि, वकालत के लिए एक हथियार के रूप में, ‘‘श्वेत विशेषाधिकार’’ एक अंत नहीं हो सकता है, बल्कि यह एक शुरुआत है, जो कई अवधारणाओं में से एक है जो लोगों का ध्यान प्रणालीगत नस्लवाद और वैश्विक स्तर पर अश्वेत विरोधी की ओर ले जा सकती है।

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