देश की खबरें | तीनों सेवाओं का एकीकरण करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं: राजनाथ सिंह
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को कहा कि भारत सशस्त्र बलों की तीनों सेवाओं का एकीकरण करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और साजो-सामान के लिए साझा मंजूरी व्यवस्था कायम करने के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि एक सेवा के संसाधनों को अन्य सेवा के लिए निर्बाध रूप से उपलब्ध कराया जा सके।
नयी दिल्ली, 12 सितंबर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को कहा कि भारत सशस्त्र बलों की तीनों सेवाओं का एकीकरण करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और साजो-सामान के लिए साझा मंजूरी व्यवस्था कायम करने के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि एक सेवा के संसाधनों को अन्य सेवा के लिए निर्बाध रूप से उपलब्ध कराया जा सके।
केंद्रीय मंत्री ने यहां सैन्य साजो सामान के बारे में एक सेमिनार को संबोधित करते हुए यह बात कही।
सेमिनार के उद्घाटन समारोह में थलसेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वी. आर. चौधरी और नौसेना प्रमुख एडमिरल आर. हरि कुमार तथा नीति आयोग के सदस्य वी. के. सारस्वत समेत अन्य लोग शामिल हुए।
रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में, नागरिक और सैन्य हितधारकों के बीच आवश्यक तालमेल पर भी जोर दिया और कहा कि भारत 'अमृत काल' की दहलीज पर खड़ा है ऐसे में दोनों पक्षों के विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए “प्रतिबद्धता” दर्शाती है।
सिंह ने कहा, “हम तीनों सेवाओं के एकीकरण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। साजो-सामान के लिए साझा मंजूरी व्यवस्था कायम करने के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि एक सेवा के संसाधनों को अन्य सेवाओं के लिए निर्बाध रूप से उपलब्ध कराया जा सके।”
रक्षा मंत्री ने दिल्ली कैंट में मानेकशॉ सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि तीनों सेवाओं के एकीकरण से सबसे अधिक फायदा साजो-सामान को लेकर होगा।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)
(The above story first appeared on LatestLY on Sep 12, 2022 01:02 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

