नयी दिल्ली, छह अगस्त उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने रविवार को कहा कि अगर संसद में संवाद और चर्चा नहीं हुई तथा कार्यवाही में बार-बार व्यवधान डाला जाता रहा तो इस व्यवधान से उत्पन्न ‘रिक्तता’ को ऐसी ताकतें भर देंगी, जो संविधान के प्रति जवाबदेह नहीं हैं।
मणिपुर में जातीय हिंसा को लेकर संसद के मौजूदा सत्र के दौरान लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही में रोज़ाना व्यवधान डाले जाने के बीच उपराष्ट्रपति की यह टिप्पणी आई है।
राज्यसभा के सभापति धनखड़ ने कहा, “हममें से कुछ लोग हमारे संस्थानों की छवि को दागदार, कलंकित और बदनाम करने के लिए कुटिल प्रयास करते हैं।”
उन्होंने लोगों से ऐसी ताकतों के बारे में निर्णय लेने का आग्रह किया और कहा कि नागरिकों को "भारत विरोधी विमर्श" को बेअसर करने में कभी संकोच नहीं करना चाहिए।
धनखड़ ने यहां संस्कृति मंत्रालय के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, “आपको नकारात्मक सोच वाली कुटिल ताकतों को हराने के लिए अपनी बात पुरजोर तरीके से रखनी होगी।”
उन्होंने संसद को लोकतंत्र का ऐसा मंदिर बताया, जहां चर्चा, बहस और संवाद होता है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि कोई भी सदन में व्यवधान की उम्मीद नहीं करता है। धनखड़ ने यह भी कहा कि संसद में अनेक प्रतिभाशाली लोग हैं।
उन्होंने कहा कि वे लोग काफी अनुभवी हैं और राज्यसभा के सभापति के रूप में वह चाहते हैं कि उन प्रतिभाओं का इस्तेमाल राष्ट्रीय उद्देश्य के लिए किया जाए।
उपराष्ट्रपति ने कहा, “लेकिन अगर हमारे लोकतंत्र का मंदिर संवाद और चर्चा में शामिल नहीं होता है और वे व्यवधान से ग्रस्त रहता है, तो ये जगह रिक्त नहीं रहने वाली है। इस पर उन ताकतों का कब्जा होगा जो संविधान के प्रति जवाबदेह नहीं होंगे।”
उन्होंने लोगों से देश के नागरिक के रूप में अपनी शक्ति का उपयोग करने का आग्रह किया, ताकि देश को सबसे पहले और बाकी सभी चीजों से ऊपर रखने के लिए एक ईको-सिस्टम तैयार किया जा सके।
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