कोलकाता, 21 जुलाई विश्व भारती विश्वविद्यालय ने अमेरिका के दो नोबेल पुरस्कार विजेताओं सहित 300 से अधिक हस्तियों के बारे में मीडिया में आई उस खबर पर शुक्रवार को आश्चर्य व्यक्त किया, जिन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन से जुड़े भूमखंड मुद्दे पर नाखुशी जताई थी।
राष्ट्रपति विश्व भारती की ‘परिदर्शक’ (विजिटर) हैं और शिक्षाविदों ने विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा इस मुद्दे पर सेन को कथित तौर पर निशाना बनाने को लेकर अपनी नाखुशी व्यक्त की है।
नोबेल पुरस्कार विजेता अमेरिकी अर्थशास्त्री जॉर्ज ए. अकरलॉफ और जोसेफ स्टिग्लिट्ज सहित शिक्षा जगत से जुड़ी कुल 304 हस्तियों ने हाल में मुर्मू को पत्र लिखकर विश्व भारती के कुलपति विद्युत चक्रवर्ती की आलोचना की थी।
हस्ताक्षरकर्ताओं में प्रख्यात अर्थशास्त्री अमिया बागची भी शामिल हैं। पूर्व में इसी मुद्दे पर लगभग 300 हस्ताक्षरों वाला एक पत्र राष्ट्रपति को भेजा गया था। दो दिन पहले राष्ट्रपति को भेजे गए एक नये ई-मेल में अकरलॉफ, स्टिग्लिट्ज और बागची का नाम शामिल किया गया था।
विश्वविद्यालय की प्रवक्ता महुआ बंद्योपाध्याय ने शुक्रवार को एक बयान में आश्चर्य व्यक्त किया कि ‘‘भारत में कई और विदेश से कुछ’’ लोग भूमि मुद्दे पर विश्व भारती के दावे को खारिज करने के लिए दृढ़ हैं।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति को भेजे गए पत्र की खबर मीडिया में उस दिन सामने आई है, जब मामले की बीरभूम अदालत में सुनवाई होने वाली है।
प्रवक्ता ने कहा, ‘‘उद्देश्य बहुत स्पष्ट है। हमें उम्मीद है कि अदालत इस पर ध्यान देगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इसे ‘मीडिया ट्रायल’ का हिस्सा माना जा सकता है या नहीं।’’
सेन का घर ‘प्रतिची’ 1.38 एकड़ में बना है और इस साल मार्च में विश्व भारती ने दावा किया था कि 13 डेसीमल (0.13 एकड़) जमीन उसकी है। सेन ने कलकत्ता उच्च न्यायालय का रुख किया और मामला स्थानीय अदालत में भेज दिया गया, जहां 21 जुलाई को सुनवाई हुई। इस मामले में 28 जुलाई को अगली सुनवाई होगी।
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