नयी दिल्ली, 24 अप्रैल हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अरुण मिश्रा ने कहा है कि मूल कंपनी वेदांता लिमिटेड की विदेशी परिसंपत्तियों को खरीदने की योजना अभी बंद नहीं की गई है।
मिश्रा ने तिमाही नतीजों पर एक चर्चा के दौरान उठे सवाल पर कहा कि जिंक इंटरनेशनल के अधिग्रहण संबंधी प्रस्ताव निदेशक मंडल के वापस नहीं लिए जाने तक यह योजना बंद नहीं हुई है।
उन्होंने जिंक इंटरनेशनल के अधिग्रहण प्रस्ताव को एक बड़ी सोच बताते हुए कहा कि निदेशक मंडल ने यही सोचकर इसके लिए हामी भरी थी। उन्होंने कहा, ‘‘हम इस योजना पर काम कर रहे हैं। हमारा अब भी यह मानना है कि हिंदुस्तान जिंक के लिए हमें इसे अंजाम देना होगा।’’
हालांकि, हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड में 29.54 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली सरकार नहीं चाहती है कि कंपनी वेदांता लिमिटेड की विदेशी परिसंपत्तियों का अधिग्रहण करे।
वेदांता ने अपना अंतरराष्ट्रीय जिंक कारोबार 2.98 अरब डॉलर के मूल्यांकन पर हिंदुस्तान जिंक को बेचने का प्रस्ताव रखा था। लेकिन सरकार इसे ऊंचा मूल्यांकन बताते हुए योजना का विरोध कर रही है। इस दिशा में आगे बढ़ने पर कानूनी कार्रवाई की भी धमकी दी गई है।
शेयरों की बिक्री पेशकश के बारे में पूछे जाने पर मिश्रा ने कहा, ‘‘हम इसके 31 मार्च तक आने की उम्मीद कर रहे थे लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। मुझे यकीन है कि सरकार इसके लिए उपयुक्त अवसर देख रही होगी।’’
सरकार हिंदुस्तान जिंक में अपनी बची हुई हिस्सेदारी की बिक्री की मंशा जता चुकी है।
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