देश की खबरें | वाल्मीकि निधि का दुरुपयोग बेल्लारी क्षेत्र के मतदाताओं को रिश्वत देने के लिए किया गया: ईडी

नयी दिल्ली/बेंगलुरु, 15 अक्टूबर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपने आरोपपत्र में दावा किया है कि इस साल आम चुनावों के दौरान बेल्लारी लोकसभा सीट के सात लाख से अधिक लोगों को कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में वोट देने के लिए 200-200 रुपये दिए गए थे और यह पैसा कर्नाटक के पूर्व जनजातीय मंत्री बी. नागेंद्र और उनके सहयोगियों द्वारा कथित वाल्मीकि घोटाले से हासिल धन से आया था।

ईडी ने यह भी आरोप लगाया कि विधायक ने इन सरकारी निधियों का उपयोग अपने निजी खर्चों को पूरा करने के लिए किया, जैसे स्वयं और अपने सहयोगियों के लिए हवाई जहाज की टिकट खरीदना, बिजली बिलों का भुगतान, वाहन रखरखाव और घरेलू कर्मचारियों के मासिक वेतन का भुगतान।

नागेन्द्र (53) को सोमवार को बेंगलुरू में विशेष जनप्रतिनिधि अदालत ने जमानत दे दी।

संघीय एजेंसी ने इस मामले में अपना पहला आरोपपत्र पिछले महीने बेंगलुरु में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की विशेष अदालत के समक्ष दायर किया था, जिसमें नागेंद्र को आरोपी नंबर एक के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। इसके अलावा 24 अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है, जिनमें उनके सहयोगी और कुछ कंपनियां शामिल हैं।

धन शोधन का यह मामला कर्नाटक पुलिस और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की एक प्राथमिकी पर आधारित है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि एसटी विकास निगम (केएमवीएसटीडीसी) के खातों से करोड़ों रुपये निकालकर रकम को “फर्जी खातों” में भेजा गया और बाद में फर्जी संस्थाओं के माध्यम से धन शोधन किया गया।

कथित अनियमितताएं तब सामने आईं जब वाल्मीकि निगम के लेखा अधीक्षक चंद्रशेखरन पी. 21 मई को मृत मिले। उन्होंने सुसाइड नोट में लिखा था जिसमें निगम से विभिन्न बैंक खातों में अवैध रूप से धन हस्तांतरित करने का आरोप लगाया गया था।

इस मामले में नागेन्द्र और उनसे कथित रूप से जुड़े पांच अन्य लोगों को ईडी ने गिरफ्तार किया था।

पूर्व मंत्री ने ईडी को बताया कि उनके मंत्रालय के तहत वाल्मीकि निगम के प्रबंध निदेशक जे जी पद्मनाभ ने उनकी जानकारी या बोर्ड की मंजूरी के बिना निगम के धन को “धोखाधड़ी से” हस्तांतरित कर दिया। उन्होंने कुछ भी गलत काम से इनकार करते हुए कहा कि उन्हें गबन किए गए धन से व्यक्तिगत रूप से कोई लाभ नहीं हुआ।

अपने बयान में पद्मनाभ ने ईडी को बताया कि वह नागेन्द्र सहित उच्च अधिकारियों के आदेश पर काम कर रहा था और धोखाधड़ी की गतिविधियों पर उसका कोई वास्तविक नियंत्रण नहीं था।

बेल्लारी ग्रामीण सीट से विधायक नागेंद्र ने इन आरोपों के बाद मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।

नागेद्र के निजी सहायकों - बी विजय कुमार गौड़ा और नेक्केंटी नागराज - और उनके सहयोगी रुद्रय्या की भूमिका के बारे में ईडी ने दावा किया कि उन्होंने बड़ी मात्रा में धनराशि इधर-उधर करने की बात “स्वीकार” की है, जो चुनावी उद्देश्यों के लिए धन की हेराफेरी की व्यापक साजिश से मेल खाती है।

एजेंसी ने कहा कि अपराध से हासिल आय का एक बड़ा हिस्सा नागेंद्र के पास आया था और उस राशि का उपयोग लोकसभा चुनाव 2024 से संबंधित गतिविधियों के लिए किया गया था।

इसने कहा, “वाल्मीकि निगम से निकाली गई यह नकदी बी नागेन्द्र के निजी सहायक विजय कुमार गौड़ा ने उनके निर्देश पर प्राप्त की और वितरित की।’’

ईडी के मुताबिक, गौड़ा ने एजेंसी को दिए अपने बयान में कहा कि उन्होंने नागेंद्र द्वारा बताए गए लोगों को नकदी सौंपी थी।

एजेंसी के अनुसार गौड़ा ने एजेंसी को दिए बयान में कहा कि 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान बेल्लारी संसदीय सीट पर किस तरह नकदी बांटी गई थी।

ईडी ने आरोप पत्र में कहा, “कांग्रेस उम्मीदवार श्री ई. तुकाराम के पक्ष में वोट डालने के लिए प्रत्येक मतदाता को 200 रुपये दिए गए। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक मतदान केंद्र को 10,000 रुपये आवंटित किए गए ताकि मतदाताओं की सहायता करने और मतदान केंद्रों की देखरेख के लिए जिम्मेदार कांग्रेस कार्यकर्ताओं को प्रतिफल दिया जा सके।”

इसमें आरोप लगाया गया है कि नागेंद्र ने बेल्लारी लोकसभा सीट के तहत आने वाले विधानसभा क्षेत्रों के विधायकों एन. भारत रेड्डी (बेल्लारी शहर), विधायक गणेश (कांपली) और कुडलिगी विधायक डॉ एन टी श्रीनिवास के साथ समन्वय करके पैसे बांटे।

ईडी के अनुसार, इन विधायकों ने यह सुनिश्चित किया कि नकदी उनके संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं को वितरित की जाए और जांच के दौरान एकत्र साक्ष्यों से इसकी ‘पुष्टि’ हुई।

ईडी ने कहा कि जांच में वाल्मीकि निगम के भीतर एक ‘जटिल’ धन शोधन अभियान का पता चला है, जिसमें 187.33 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मार्च-मई, 2024 के बीच निगम के खाते से धोखाधड़ी से निकाल ली गई थी।

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