विदेश की खबरें | अमेरिका: फलस्तीन समर्थक शिविर पर हमले को रोकने के लिए कार्रवाई नहीं करने पर यूसीएलए की आलोचना
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

यूसीएलए में मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात को फलस्तीन समर्थक और इजराइल समर्थक प्रतिद्वंद्वी समूहों में झड़प हो गई थी जिसे रोकने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों को बुलाया गया।

इस दौरान किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया और झड़प में कम से कम 15 प्रदर्शनकारी घायल हो गए। अमेरिका के कुछ कॉलेज के परिसरों में इजराइल-हमास युद्ध को लेकर हिंसा की घटनाओं में हाल में तेजी आई है।

‘मुस्लिम पब्लिक अफेयर्स काउंसिल’ की ‘चीफ ऑफ स्टाफ’ रेबेका हुसैनी ने बुधवार को लॉस एंजिलिस स्थित परिसर में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘समुदाय को यह लगना चाहिए कि पुलिस उनकी रक्षा कर रही है, ना कि दूसरों को उन्हें नुकसान पहुंचाने में सक्षम बना रही है।’’

यूसीएलए में जहां पुलिस के अधिक हस्तक्षेप की मांग की जा रही है, वहीं इसके विपरीत, अमेरिका के अन्य परिसरों में अधिकारियों की कार्रवाई की निंदा की जा रही है। मैडिसन स्थित विस्कॉन्सिन विश्वविद्यालय में बुधवार तड़के पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों के तंबू नष्ट हटा दिए, जिसके बाद प्रदर्शनकारी पुलिस से भिड़ गए।

पुलिस कोलंबिया विश्वविद्यालय में भी मंगलवार रात दाखिल हुई जहां युद्ध विरोधी प्रदर्शनकारी जमा थे और उसने प्रदर्शन को समाप्त कराया।

‘एसोसिएटेड प्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, 18 अप्रैल के बाद से अमेरिका में शैक्षणिक संस्थानों में विरोध प्रदर्शनों के दौरान 30 स्थानों से 1,600 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

यूसीएलए के चांसलर जीन ब्लॉक ने एक बयान में कहा कि शिविरों पर हमले की सभी निंदा करते हैं लेकिन ‘‘हमारे छात्रों, संकाय और समुदाय के सदस्यों पर यह हमला पूरी तरह से अस्वीकार्य है।’’

कैलिफोर्निया के गवर्नर गेविन न्यूसोम और लॉस एंजिलिस के मेयर ने देरी से कार्रवाई को लेकर निंदा की जिसके बाद ब्लॉक ने इन घटनाओं की जांच किए जाने का वादा किया।

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