नयी दिल्ली, 27 अक्टूबर भारत और अमेरिका के बीच ‘टू प्लस टू’ वार्ता के तीसरे संस्करण में पूर्वी लद्दाख और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीनी सेना की आक्रामकता का मुद्दा प्रमुखता से उठा और अमेरिका ने कहा कि अपनी संप्रभुता और स्वतंत्रता की सुरक्षा के भारत के प्रयासों में वह उसके साथ खड़ा है। दोनों देशों ने अपने सुरक्षा संबंधों को और बढ़ाने का संकल्प जताते हुए रणनीतिक रक्षा समझौते बीईसीए पर मुहर लगाई।
उच्चस्तरीय बैठक में भारतीय पक्ष का प्रतिनिधित्व रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने किया जबकि अमेरिकी पक्ष का प्रतिनिधित्व वहां के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ और रक्षा मंत्री मार्क टी एस्पर कर रहे थे। दोनों देशों ने छद्म रूप से आतंकवादियों का इस्तेमाल करने वालों की निंदा की और पाकिस्तान से कहा कि वह 26/11 के मुंबई, उरी और पठानकोट समेत सभी आतंकी हमलों के साजिशकर्ताओं को न्याय के दायरे में लेकर आए। दोनों पक्षों के शीर्ष सैन्य और रक्षा अधिकारियों ने इसमें सहयोग दिया।
चीन की कटु आलोचना करते हुए पोम्पिओ ने चीनी सेना के साथ पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में संघर्ष में 20 भारतीय सैन्य कर्मियों के मारे जाने का उल्लेख किया और कहा कि अमेरिका और भारत न सिर्फ चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) द्वारा उत्पन्न बल्कि सभी तरह के खतरों से निपटने के लिये सहयोग बढ़ाने के लिये कदम उठा रहे हैं।
शीर्ष सरकारी सूत्रों ने कहा कि बातचीत का एक अहम मुद्दा दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में चीन का 'विस्तारवादी व्यवहार' रहा। दोनों ने अपने साझा नजरिये और हितों के तहत क्षेत्र और उससे इतर सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिये दृढ़ता से साथ चुनौतियों का सामना करने का संकल्प व्यक्त किया।
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भारतीय समकक्ष एस जयशंकर,रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अमेरिकी रक्षा मंत्री मार्क टी एस्पर के साथ संयुक्त प्रेस ब्रीफिंग में पोम्पिओ ने कहा, ' आज सुबह हम यात्रा के दौरान दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की रक्षा के लिये जान देने वाले भारतीय सशस्त्र बलों के वीर पुरुषों और महिलाओं को श्रद्धांजलि देने राष्ट्रीय समर स्मारक गए। इन शहीदों में जून में गलवान घाटी में पीएलए द्वारा मारे गए 20 भारतीय सैन्यकर्मी भी शामिल हैं।'' उन्होंने कहा, ''भारत के लोग जब अपनी संप्रभुता और स्वतंत्रता पर खतरे का सामना करते हैं तो अमेरिका उनके साथ खड़ा होगा।''
अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों से महज एक हफ्ते पहले हो रही बातचीत में दोनों देशों ने काफी समय तक बातचीत के बाद ‘बेसिक एक्सचेंज एंड कोऑपरेशन एग्रीमेंट’ (बीईसीए) समेत कुल पांच समझौतों पर हस्ताक्षर किये। बीईसीए के तहत अत्याधुनिक सैन्य प्रौद्योगिकी, उपग्रह के गोपनीय डाटा और दोनों देशों की सेनाओं के बीच अहम सूचना साझा करने की अनुमति होगी।
अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि वुहान से आई कोरोना वायरस महामारी की चुनौती को हराने का मुद्दा भी चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के बारे में 'मजबूत चर्चा' के दौरान उठा।
पोम्पिओ ने कहा, ''हमारे नेता और नागरिक बढ़ती स्पष्टता के साथ यह देख पा रहे हैं कि सीसीपी लोकतंत्र, कानून के शासन और पारदर्शिता की मित्र नहीं है। मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि अमेरिका और भारत न सिर्फ सीसीपी द्वारा उत्पन्न बल्कि सभी तरह के खतरों से निपटने के लिये सहयोग बढ़ाने के लिये कदम उठा रहे हैं।''
बातचीत के बाद जारी एक संयुक्त बयान में दोनों पक्षों ने छद्म रूप से आतंकवाद के इस्तेमाल की निंदा करते हुए पाकिस्तान से कहा की कि वह यह सुनिश्चित करने के लिये तत्काल, सतत और अपरिवर्तनीय कदम उठाए कि उसके नियंत्रण वाले किसी भी क्षेत्र का इस्तेमाल आतंकवादी हमलों के लिये नहीं होगा और 26/11 मुंबई, उरी और पठानकोट समेत ऐसे सभी हमलों के साजिशकर्ताओं को तेजी से कानून के दायरे में लाए।
इसमें कहा गया, ''उन्होंने सभी अलकायदा, आईएसआईएस/दाएश, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिज्ब-उल-मुजाहिद्दीन समेत सभी आतंकी नेटवर्कों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की जरूरत पर बल दिया।''
अमेरिकी रक्षा मंत्री मार्क एस्पर ने कहा कि अमेरिका सभी के लिये खुले व स्वतंत्र हिंद-प्रशांत के समर्थन में 'कंधे से कंधा मिलाकर' खड़ा है खासतौर पर चीन की बढ़ती आक्रामक और अस्थिरता वाली गतिविधियों के मद्देनजर। उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय रक्षा सहयोग लगातार बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा, ''मुझे यह बताते हुए खुशी है कि आज हमनें अपने रिश्तों को और मजबूत करने की दिशा में खासी प्रगति की है।''
एस्पर ने भारत के साथ रक्षा सहयोग में व्यापक और अग्रोन्मुखी प्रतिबद्धता को फिर दोहराया जिसमें हिंद महासागर क्षेत्र, दक्षिण पूर्व एशिया और विस्तृत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में द्विपक्षीय रक्षा सहयोग शामिल है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपनी टिप्पणी में कहा कि दोनों पक्षों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति का साझा आकलन किया और क्षेत्र के सभी देशों के लिये शांति, स्थिरता और समृद्धता की प्रतिबद्धता जाहिर की।
सिंह ने कहा, ''हमनें नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बरकरार रखने, अंतरराष्ट्रीय समुद्र में कानून के शासन और नौवहन की स्वतंत्रता पर सहमति जताई और सभी राष्ट्रों की क्षेत्रीय अक्षुण्ता और संप्रभुता बरकारर रखने पर भी प्रतिबद्धता जाहिर की।''
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि बातचीत में हिंद प्रशांत क्षेत्र पर 'खास तौर पर हमारा ध्यान था' और 'बहु ध्रुवीय दुनिया का आधार निश्चित रूप से बहु ध्रुवीय एशिया होना चहिए'। इस बयान को भारतीय स्थिति के स्पष्ट प्रतिरूप के तौर पर देखा जा रहा है कि चीन का प्रभुत्व उसे स्वीकार नहीं है।
जयशंकर ने कहा, ''हमनें क्षेत्र के सभी देशों के लिये शांति, स्थिरता और समृद्धता के महत्व पर जोर दिया। जैसा रक्षा मंत्री ने कहा, यह तभी संभव है जब नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बरकररार हो, अंतरराष्ट्रीय समुद्र में नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित हो, खुला संपर्क हो तथा सभी राष्ट्रों की क्षेत्रीय अक्षुण्ता व संप्रभुता का सम्मान किया जाए।''
विदेश मंत्री ने कहा कि चर्चा में भारत के पड़ोसी देशों के घटनाक्रम भी शामिल रहे।
उन्होंने कहा, ''हमनें स्पष्ट किया की सीमा-पार से आतंकवाद पूरी तरह से अस्वीकार्य है। अफगानिस्तान में उसकी सुरक्षा और विकास में भारत का योगदान स्पष्ट है जो इस दिशा में अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में हमारे योगदान की इच्छा को परिलक्षित करता है।''
बातचीत में दोनों पक्षों ने परमाणु ऊर्जा, तेल और गैस, अंतरिक्ष,स्वास्थ्य, साइबर सुरक्षा, रक्षा व्यापार और लोगों से लोगों के स्तर पर संपर्क पर भी चर्चा की।
टू प्लस टू वार्ता के बाद पोम्पिओ और एस्पर ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात कर क्षेत्रीय और वैश्विक महत्व के कई मुद्दों पर चर्चा की।
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