नयी दिल्ली, 29 जुलाई दिव्यांग अधिकार से संबंधित संगठनों और कार्यकर्ताओं ने विधि आयोग से दिव्यांग लोागों के अधिकारों की रक्षा से जुड़े मौजूदा कानूनों के साथ समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को संबद्ध करने का आग्रह किया है।
यूसीसी पर जनता की राय के लिए विधि आयोग के आह्वान के जवाब में, लगभग 220 दिव्यांग अधिकार संगठनों और कार्यकर्ताओं ने दिव्यांगता के दृष्टिकोण से अपनी चिंताओं और सिफारिशों पर प्रकाश डाला है।
प्रमुख कार्यकर्ताओं, अधिवक्त्ताओं एवं दिव्यांग व्यक्तियों द्वारा समर्थित, उनके अनुरोध पत्र में दिव्यांगों (पीडब्ल्यूडी) के अधिकारों की रक्षा करने और यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया कि यूसीसी को अंतिम रूप में देते समय उनकी आवाज सुनी जाये।
दिव्यांग अधिकार कार्यकर्ताओं ने दिव्यांगों के सामने आने वाली समस्याओं को दूर करने और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए एक दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया है।
दिव्यांग अधिकार संगठनों ने यूसीसी को दिव्यांगों के अधिकारों की रक्षा करने वाले मौजूदा कानूनों जैसे दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 और मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 के साथ संबद्ध करने के महत्व पर जोर दिया गया।
इन समूहों ने अनुरोध पत्र में चिंता व्यक्त की कि यूसीसी यदि विचार किए बिना लागू किया गया, तो दिव्यांग व्यक्ति प्रभावित हो सकते हैं।
अनुरोध पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में मुरलीधरन (दिव्यांगों के अधिकारों के लिए राष्ट्रीय मंच के महासचिव), रोमा भगत (वकील, दिल्ली उच्च न्यायालय) और साधना आर्य (दिव्यांगता कार्यकर्ता) आदि शामिल हैं।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY