जरुरी जानकारी | संयुक्त अरब अमीरात आने-जाने वाली उड़ानों को सऊदी अरब के वायुक्षेत्र से गुजरने की अनुमति

इसके लिए जारी एक बयान में सीधे तौर पर इस्राइल का नाम लिए बगैर उसकी उड़ानों को मंजूरी दी गयी है। इस पूरे घटनाक्रम को इस्राइल-संयुक्त अरब अमीरात के संबंधों को सामान्य बनाने की अमेरिकी कोशिशों के प्रति सऊदी अरब की रजामंदी के तौर पर देखा जा रहा है।

हालांकि कुछ दिन पहले ही सऊदी अरब ने इस्राइल की संयुक्त अरब अमीरात के लिए पहली सीधी वाणिज्यिक यात्री उड़ान को उसके वायुक्षेत्र इस्तेमाल की मंजूरी दी थी।

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उल्लेखनीय है कि संयुक्त अरब अमीरात और इस्राइल के बीच किसी भी सीधी उड़ान को वाणिज्यिक रूप से व्यवहारिक बनाने के लिए सऊदी अरब के वायुक्षेत्र का इस्तेमाल करना ही होता है।

बयान में सऊदी अरब ने ईरान और कतर जैसे देशों का भी नाम नहीं लिया है। हालांकि मौजूदा वक्त में सऊदी अरब इन दोनों देशों का बहिष्कार कर रहा है।

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सऊदी प्रेस एजेंसी ने कहा कि यूएई के आग्रह पर यह निर्णय किया गया है।

सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैस़ल बिन फ़रहान ने ट्वीट किया कि सऊदी अरब की फलस्तीन को लेकर स्थिर और स्थापित धारणा नहीं बदलेगी।

हालांकि उन्होंने अपने ट्वीट में सीधे तौर पर इस्राइल का नाम नहीं लिया।

इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू ने एक ऑनलाइन वीडियो में इस घोषणा की तारीफ की।

उन्होंने कहा, ‘‘ सालों से मैं इस्राइल और पूर्व के बीच वायुक्षेत्र को खोलने की दिशा में काम कर रहा हूं। अब यह मौका आ गया है। इस्राइली विमान अब सीधे आबूधाबी और दुबई आना-जाना कर सकेंगे।’’

इससे उड़ानें सस्ती होंगी और पर्यटन एवं अर्थव्यवस्था के विकास को बल मिलेगा।

इस हफ्ते की शुरुआत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद और वरिष्ठ सलाहकार जेरेड कुशनर ने यूएई के लिए एक उच्च स्तरीय इस्राइली प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था। यह यूएई और इस्राइल के बीच पहली सीधी वाणिज्यिक यात्री उड़ान थी।

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