कोलकाता, 17 सितंबर केंद्रीय मंत्री आर के सिंह ने रविवार को प्रधानमंत्री कुसुम योजना को ‘‘लागू नहीं करने’’ पर पश्चिम बंगाल सरकार की आलोचना की। इस योजना के तहत किसानों को कम बिजली लागत के जरिए मदद मिल सकती थी।
इस योजना में सिंचाई पंपों के लिए सौर पैनलों की स्थापना की परिकल्पना की गई है, जो आमतौर पर डीजल से संचालित होते हैं।
केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री सिंह ने कहा कि योजना के तहत केंद्र व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण के रूप में 30 प्रतिशत सहायता प्रदान करता है।
सिंह ने यहां कहा, ‘‘इस व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण के साथ, सौर ऊर्जा उत्पादन लागत में कमी आएगी और किसानों को कम बिजली दर से लाभ हो सकता है... लेकिन बंगाल सरकार ने इसे लागू नहीं किया है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘राज्य सरकार की बिजली वितरण कंपनी को केवल सौर पैनल स्थापित करने वाली निजी एजेंसियों से बोलियां आमंत्रित करनी होंगी और फिर उनसे बिजली खरीदनी होगी।’’
सिंह ने कहा कि सबसे कम बोली लगाने वाली एजेंसी को ठेका दिया जाएगा।
दिल्ली में 13,000 करोड़ रुपये की प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना की शुरुआत के अवसर पर वह कोलकाता में इसके ऑनलाइन साक्षी बने।
विश्वकर्मा योजना का लक्ष्य पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों द्वारा पेश किए जाने वाले उत्पादों और सेवाओं की पहुंच तथा गुणवत्ता को बढ़ाना है।
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