नयी दिल्ली, 11 सितंबर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को नागरिक समाज से सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के कामकाज के बारे में व्यापक रूप से जागरूकता फैलाने के लिये आगे आने का अनुरोध किया। एक आधिकारिक बयान में यह बात कही गई है।
कार्मिक मंत्रालय द्वारा जारी बयान के मुताबिक इस कवायद का उद्देश्य केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के पास हल्के-फुल्के और अनावश्यक सवालों की भरमार नहीं होने देना है।
बयान के मुताबिक मंत्री ने सुझाव दिया कि अधिकारियों को टाली जा सकने वाली आरटीआई अर्जियों को स्वीकार नहीं करने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आज के समय में लगभग सभी सूचना सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है।
केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री सिंह ने कहा कि आरटीआई अधिनियम जम्मू कश्मीर में पूर्ण रूप से क्रियान्वित है और इसके कामकाज के बारे में जागरूकता पैदा करने की काफी जरूरत है।
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बयान में कहा गया है, ‘‘वरिष्ठतम सूचना आयुक्त डी पी सिन्हा के साथ बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री ने नागरिक समाज से इस अभियान के लिये व्यापक स्तर पर आगे आने का अनुरोध किया, ताकि केंद्रीय सूचना आयोग में हल्के-फुल्के और अनावश्यक सवालों की भरमार नहीं लगे।’’
उन्होंने कहा कि केंद्र में पिछले छह साल के शासन में प्रत्येक फैसला सूचना आयोगों को संसाधनों को मजबूत करने और इसकी स्वतंत्रता मजबूत करने के लिये लिया गया।
उन्होंने कहा कि देश का कोई भी नागरिक अब जम्मू कश्मीर तथा लद्दाख से जुड़े विषयों में आरटीआई अर्जी दे सकता है।
बयान के मुताबिक सिन्हा ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान और आंशिक लॉकडाउन के दौरान वीडियो कांफ्रेंस के जरिये सीआईसी की सुनवाई को प्रोत्साहित करने के लिये कई कदम उठाये गये।
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